नफरत और तानाशाही को आईना हमेशा ही गद्दार लगता आया है..

एक कामयाब और समर्पित पेशेवर प्रेस फोटोग्राफर की ऐसी मौत पर भी लोग जश्न मना रहे हैं और खुशियां मना रहे हैं, और उसकी जिंदगी को कोस रहे हैं। इससे दानिश सिद्दीकी के पत्रकारिता में योगदान को कोई चोट नहीं पहुंचाई जा सकती, लेकिन लोग इस बात का सबूत सामने जरूर रख रहे हैं कि वे इंसान की शक्ल में दिख जरूर रहे हैं, उनके भीतर हैवान पूरी तरह से काबिज है..

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