शहीदों की चिताओं पर लगते हैं हर बरस मेले… अपनी रोटी सेंकने वाले मुनाफाखोरों और चोरों के?

हम भारतवासी बेशक खुद को पाक-साफ बता कर भष्टाचार-रहित समाज के अखाड़े में उछल-उछल कर पहलवानी करें कि हम “भ्रष्ट नहीं हैं”, और सरकार या व्यवस्था की गलतियों पर “डुगडुगी लेकर भारत भ्रमण पर निकल जाएँ” या फिर देश की राजधानी के जंतर मंतर पर “लंगोटा” लपेट कर धरना देने पर आमादा हों जाएँ, लेकिन इस सत्य को कोई नहीं झुठला सकता कि देश के 44 हज़ार से भी ज्यादा 70-72 साल के बुजुर्ग जिनकी उम्र आज़ादी के समय 5-7 साल से ज्यादा नहीं रही होगी, स्वतंत्रता आन्दोलन के क्रांतिकारियों और शहीदों के कफ़न को नोच-नोच कर खा रहे हैं...

अध्यापक पात्रता परीक्षा में गलत क्या है?

-मनोज कुमार सिंह ‘मयंक’ || हमारे देश को आजाद हुए ६४ वर्ष से अधिक हो गए हैं,हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने पराधीन भारत में स्वतंत्र भारत का जो स्वप्न देखा था,हम उसके आस पास भी नहीं हैं|अपने अधिकारों और कर्तव्यों की कौन कहे,इन ६४ सालों में हम आज तक समग्र साक्षरता के मह्त्वाकांक्षी लक्ष्य को भी हासिल नहीं कर पाए हैं|हालांकि,इतने सालों में हमने अच्छी उपलब्धि हासिल की है और आज साक्षरता के क्षेत्र में हम ब्रिटिश राज के १२ प्रतिशत के आकडें को पार करते हुए २०११ के आंकड़ों के अनुसार ७५.०४ प्रतिशत तक पहुँच गए हैं किन्तु तुलनात्मक दृष्टि...

बेकार हो गयी भगत सिंह की कुर्बानी……

आज हमारे देश की जो हालत है या यूँ कहे की हमने आज जो अपने देश की हालत कर दी है उससे ये यकीन नहीं होता की इसी देश के  लाल  ने कहा होगा “माँ , मेरी लाश लेने आप मत आना , कुलबीर को भेज देना , वरना आपको रोता देख लोग कहंगे , देखो भगत सिंह की माँ रो रही है .” ये जज्बा था भारत के उस वीर सपूत का जिसने देश कि आजादी के लिए बिना आपने माँ-बाप कि चिंता किए हुए देश के लिए मौत को भी हस्ते हुए गले से लगा लिया क्यूँ कि...

बाबा बनाम बलात्कार: कुकुरमुत्तों के तरह पनप रहे हैं भारत में ‘स्वयंभू गुरुजन और स्वामी”

धरा जब जब विकल होती, मुसीबत का समय आता; कोई किसी रूप में आकर, मानवता की रक्षा करता.” -शिवनाथ झा।। आज के परिप्रेक्ष्य में मानवता के रक्षक के रूप में नहीं वरन “भक्षक” के रूप में लोग अवतरित हों रहे हैं विभिन्न नामों से – बाबाओं, विचारकों, प्रचारकों, आध्यात्म गुरुओं, योगियों के रूप में – इतिहास साक्षी है. स्वतंत्र भारत के जन-मानस के “अंध-विश्वासों” को, विशेषकर महिलाओं को, अपना कवच बनाकर पिछले पांच दशको से भी अधिक से, उनका मानसिक, आर्थिक, शारीरिक और धार्मिक रूप से बलात्कार कर रहे ये “गुरूवर”. सुर्ख़ियों में रहना इन “तथाकथित महात्माओं” का जन्म सिंद्ध...

मुलायम ने कहा: “जनहित में तो सरकार चली जाती है, मोंटेक सिंह किस खेत की मूली हैं?”

एक तरफ महंगाई सिरसा के मुहं की तरह बढती जा रही है, जिसके चलते आम आदमी का जीना दुश्वार हो चूका है वहीँ पिछले सोमबार को योजना आयोग के जो आकडे जारी किये गए उसके आधार पर यह माना जा रहा है कि देश में 2004-05 और 2009-10 के बीच गरीबी और गरीबों की संख्या में कमी आई है, साथ ही, पूर्व के 32 रूपये प्रतिदिन के प्रति परिवार भोजन पर पर खर्च राशि को घटा कर 29 रुपये कर दिया गया है. यानि की जो व्यक्ति अपने परिवार के भोजन पर 29 रुपये खर्च करता है वह गरीब आदमी की श्रेणी से...

निर्मल बाबा के अंधभक्तों ने बैतूल में ताप्ती को किया प्रदूषित, मंदिरो में लगाया शिवलिंगो का अम्बार

ताप्तीचंल में एक बार फिर अंधविश्वास एवं आस्था की तथाकथित बयार चलने से बैंको से दस रूपए की गड्ढी, दुकानो से काला पर्स का संकट इस तरह गहराया है कि जिले में काला पर्स या दस रूपए की गड्ढी मांगने वाला भी संदेह की नजर से देखा जाने लगा है। पूरे जिले में कुछ टीवी चैनलो पर हो रहे निर्मल बाबा के प्रतिदिन प्रवचन सुनने के बाद सबसे बड़ा सकंट नदियों के संरक्षण को लेकर आ खड़ा हुआ है।  सूर्यपुत्री ताप्ती नदी से लेकर जिले की अन्य नदियों , पोखरो , तालाबों के पास इन दिनो देवी – देवताओं की...

मुकद्दमों से घिरे प्रेस क्लब की अध्यक्ष नहीं बनना चाहती नानकी, बाकी निर्विरोध चुने जाएंगे

नानकी हंस चंडीगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गईं हैं. पुरानी मैनेजमेंट उनकी शर्तें मानने को तैयार नहीं हुई. वे ऐसे क्लब की अध्यक्ष नहीं होना चाहती थीं जिसपे अदालतों में मुक़दमे चल रहे हों और जिसकी प्रधान तो वे हों मगर बाकी सारे पदाधिकारी पुरानी मैनेजमेंट के. नतीजा ये है कि कुल नौ में से छ: पदाधिकारी तो पुरानी मैनेजमेंट के निर्विरोध ही चुने जाएंगे. अध्यक्ष और संयुक्त सचिव के सिर्फ दो पदों के मतदान होना है. हालांकि इसमें विनय मलिक पुरानी मैनेजमेंट के उम्मीदवार सुखबीर बाजवा के सामने एक बड़ी चुनौती हैं. इस...

भारतीय खुफिया विभाग की ” पैनी नजर ” है ” स्वयंभू गुरु ” रविशंकर पर

-शिवनाथ झा।। कहते हैं “लाख छुपाओ छुप न सकेगा राज़ हो कितना गहरा, दिल की बात बता देता है असली नकली चेहरा”। स्वयं-भू आध्यात्म गुरु और ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के संस्थापक के मुख से कुछ ऐसा ही निकला और भारतीय खुफिया एजेंसी जागरूक हो गईं उस कड़ी को जोड़ने में जहाँ पांच साल पूर्व पश्चिम बंगाल के तामलुक क्षेत्र के नंदीग्राम इलाके के एक लगभग जंगल में बसे एक स्कूल में गए थे आध्यात्म गुरु नंदीग्राम नर-संहार के बाद। अपने बयान की सफाई में रविशंकर भले ही यह कहें: “मैंने यह नहीं कहा था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले...

टैक्सास से एमबीए त्रिवेदी को फेल कर 12 वीं पास रॉय को पास किया ‘अकड़ू दीदी’ ने

-शिवनाथ झा।। एक जमाना था जब बंगाल को “बंगाल टाइगर” के नाम से जाना जाता था, क्रांतिकारियों के नाम से जाना जाता था, शहीदों के नाम से जाना जाता था, विद्वानों के नाम से जाना जाता था, कला, कलाकारों और संस्कृति के नाम से विख्यात था। आज ममता के नाम से ‘कुख्यात’ हो गया है, जिसने खुलेआम हुगली नदी के पार बैठ कर भारतीय संसद की गरिमा को नेस्तनाबूद कर दिया। ‘बंगाल की दीदी’ का दिल्ली में यह एक ‘राजनितिक जेहाद’ ही माना जायेगा इतिहास के पन्नों पर। त्रिनमूल कांग्रेस वर्तमान सरकार में एक सहयोगी पार्टी है और उसकी अध्यक्ष...

“आग लगाने के लिए एक चिंगारी ही काफी है, बशर्ते हवा मिलती रहे”

कौन कहता है सपने सच नहीं होते, सपने सच होते वैसे सपने सच नहीं होते जो सोते हुए देखे जाये और कुछ पलो के बाद हम भूल जाये. बल्कि वैसे सपने सच होते हैं जो हमारी नींद उड़ा दें. ऐसा ही एक सपना आज से लगभग 3 साल पहले मैंने देखा था. वो सुबह मुझे आज भी याद है, जब मैंनेएक सपना देखा था कि मै अपने कुछ दोस्तों के साथ मिल कर गाँव के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों पढ़ा रहा हूँ. उन बच्चों को पढते और हँसते मुस्कुराते हुए देख हमे बहुत सुकून मिल रहा है. तभी घडी...

सरकार की एक-एक फाईल देखेंगे मुलायम ‘मुख्य मंत्री कार्यालय का ठप्पा’ लगने से पहले

-शिवनाथ झा।। मिथिला ही नहीं अवध में भी एक कहावत बहुत प्रचलित है – “छौंरा (युवा) मालिक, बुढ (बुजुर्ग) दीवान, काम बिगड़े सांझ-बिहान.” यानि, जिस शासन और व्यवस्था की बाग़-डोर किसी ‘अनुभवहीन’ युवा के हाथों सौंप दिया जाए और राज्य के कोषागार की देख-रेख बुजुर्गों के हाथ दे दिया जाए, उस प्रदेश का विकास तो होगा, परन्तु, विकास के मार्ग में ‘अनवरत बाधाएं’ उपस्थित होती रहेंगी, जो ‘जन-कल्याण’ के ‘प्रतिकूल’ होगा। ईश्वर ना करे कि उत्तर प्रदेश के नव-निर्वाचित मुख्य मंत्री श्री अखिलेश यादव के क्रिया-कलाप में किसी भी प्रकार का कोई भी ‘विघ्न’ बढ़ाएं उपस्थित हों, और प्रदेश के...

अगर “खादी” के जुल्मों से बचना है, तो “खाकी” का साथ देना होगा

-शिवनाथ झा।। कितनी बड़ी विडंबना है कि भष्टाचार के खिलाफ समाज के “तथाकथित” ठेकेदारों ने संसद को सड़क पर लाने का अथक प्रयास भी किया, करोड़ों रूपये का आदान-प्रदान हुआ, पूरे देश में मानो एक ‘कोहराम’ मच गया, लेकिन इसी समाज में जब एक ईमानदार पुलिसकर्मी  अपने माता-पिता, अपनी पत्नी को विधवा और बच्चों को अनाथ कर इन्ही भ्रष्ट लोगों का शिकार हो गया और अपनी जान गवां बैठा, तो ये कथित अलंबरदार और समाज के संभ्रांत लोग अपने-अपने घरमे दुबक जाते हैं उसी तरह जैसे “सांप काट लिया हों।” बाबजूद इसके कि लोगों का खाकी वर्दी वालों पर से...