या तो समाज को बदलने की ताकत रखें, या फिर खुद बदलने को तैयार रहें

या तो समाज को बदलने की ताकत रखें, या फिर खुद बदलने को तैयार रहें

-सुनील कुमार॥ उत्तरप्रदेश के गोंडा की एक खबर है कि चार बच्चों की एक मां और सत्रह साल के उसके प्रेमी लडक़े ने एक साथ, लेकिन अलग-अलग जगहों पर आत्महत्या कर ली। दोनों ने फांसी लगा ली। इस महिला का पति बाहर रहकर काम करता है, उसके चार बच्चे हैं, जिनमें बड़ी लडक़ी की उम्र मां के इस प्रेमी लडक़े से कुल पांच साल कम है। नवीं कक्षा में पढऩे वाला यह लडक़ा घर के आसपास की ही इस दोगुनी उम्र, 34 बरस की इस महिला के साथ प्रेम-संबंध में था। आसपास के लोगों को जब इसकी खबर लगी तो...

जी हां, वह शैतान थी..

जी हां, वह शैतान थी..

डॉ. अव्यक्त अग्रवाल॥ मैंने दिवाली गिफ़्ट खोला था । उसमें प्यारी सी शर्ट थी जिसपर लिखा था “आप मेरे भगवान हो ।” मैं सुन्न सा…. महसूस करवा रहा था ख़ुद को कि क्या मैं वाकई किसी के लिए भगवान हूँ । उत्तर जो मिला था उन यादों से, ये संस्मरण वही है । लगभग 10 वर्ष पूर्व की बात है ।एक 12 वर्षीय बच्चा स्नेक बाईट के साथ हमारे पास लाया गया था । मेरे चिकित्स्कीय जीवन में आये हज़ारों मरीजों में से यह केस मुझे ऐसे याद है जैसे कल की ही बात हो । बच्चे के सभी हाव...

नेहरूजी को मिटाने की कोशिश..

नेहरूजी को मिटाने की कोशिश..

देश में पिछले आठ सालों में लोकतंत्र पर मंडराते खतरे को कई बार, कई तरह से चिंता व्यक्त की गई। लोकतंत्र के मूल्यों के दांव पर लगने का एक बड़ा कारण कमजोर विपक्ष को ठहराया गया। भाजपा ने सत्ता संभालने के साथ ही कई बार कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था। और जहां कांग्रेस नहीं है, वहां मौजूद अन्य विपक्षी दलों को कमजोर करने में भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इससे भाजपा की मंशा साफ है कि वह अपने लिए केवल बहुमत नहीं चाहती, बल्कि काफी हद तक निरंकुशता की इच्छा भी रखती है, ताकि उसके फैसलों, नीतियों...

गरीब बाप का कंधे पर बेटी की लाश ढोना यानि लोकतंत्र की लाश ढोना..

गरीब बाप का कंधे पर बेटी की लाश ढोना यानि लोकतंत्र की लाश ढोना..

-सुनील कुमार॥ छत्तीसगढ़ का एक वीडियो कल से सोशल मीडिया पर तैर रहा था, और उसने देखने वालों को बड़ा विचलित भी कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव के अपने इलाके सरगुजा में एक सरकारी अस्पताल में सात साल की एक गरीब बच्ची गुजर गई। उसके शव को घर ले जाने के लिए जब कोई सरकारी गाड़ी नहीं मिल पाई तो उसका पिता उसे कंधे पर लेकर ही 8-10 किलोमीटर पैदल गया। इस वीडियो ने उन अच्छे-अच्छे शहरी लोगों को भी हिलाकर रख दिया जिनके मन में आमतौर पर सबसे गरीब तबके के लिए कोई हमदर्दी नहीं होती है, और...

कौन बनेगा आगरा की रंगमंच की नैया का खिवैया ?

कौन बनेगा आगरा की रंगमंच की नैया का खिवैया ?

-अनिल शुक्ल॥ कौन विश्वास करेगा कि जिस आगरा में आज रंगमंच के तोते उड़ गए दिखते हैं, वहां उन्नीसवीं सदी के आखिरी दशकों में भी बेहद समृद्ध रंग परंपरा थी।यूं तो आगरा में हिंदुस्तानी नाटकों की परंपरा भारतेन्दु हरिश्चंद के समकालीन है लेकिन आगरा में नए नवेले नाटकों का लिपिबद्ध इतिहास सन 1880 के दौरान ही मिलना शुरू होता है। आगरा की ‘इलाही प्रेस’ से 1886 में नाटक ‘शकुंतला’ और सन1891 में ‘ज़ोहरा बेहराम’ के प्रकाशन का उल्लेख मिलता है। दोनों के लेखक हाफ़िज़ मुहम्मद अब्दुल्ला थे और दोनों ही नाटकों के खेले जाने की भी खबर मिलती है। ‘शकुंतला’...

कश्मीर फाइल्स एक हौलनाक हिन्दू विरोधी फ़िल्म है..

कश्मीर फाइल्स एक हौलनाक हिन्दू विरोधी फ़िल्म है..

-आशुतोष कुमार॥ कहना तो मानव विरोधी चाहिए। किसी फिल्म को समुदाय विशेष के समर्थन या विरोध की फ़िल्म के रूप में देखना ठीक नहीं। लेकिन यह फ़िल्म खुद ही हिन्दू मुसलमान की भाषा में बोलती है। बहुत से लोग इसे मुस्लिम विरोधी फ़िल्म समझ रहे हैं। लेकिन यह हिन्दू विरोधी ज़्यादा है। इस फ़िल्म में दो तरह के हिन्दू दिखाए गए हैं। कुछ तो वे हैं जिनकी इस्लामी आतंकवादियों के साथ सीधी सांठ गांठ है। वे बड़े प्रतिष्ठित और शक्तिशाली लोग हैं। बड़ी एलीट यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर और छात्र हैं। लेकिन हिंदुओं के ‘जनसंहार’ में शामिल आतंकियों के मददगार हैं।...

परिवारों के भीतर हिंसा और अश्लीलता के बढ़ते खतरे…

परिवारों के भीतर हिंसा और अश्लीलता के बढ़ते खतरे…

–सुनील कुमार॥ छत्तीसगढ़ के एक जिले जीपीएम में 45 साल की एक महिला की रिपोर्ट पर उसके पति और बेटे को गिरफ्तार किया गया है। उसने शिकायत की थी कि उसका एक न्यूड वीडियो फैलाया जा रहा है, और यह काम उसका पति और बेटा कर रहे हैं। महिला का अपने पति से झगड़ा चल रहा था, और वह मायके चली जाती थी। अभी वह ससुराल लौटी तो 19 बरस के बेटे ने उससे उसका मोबाइल मांगा, और उसमें से उसके कुछ वीडियो निकालकर रिश्तेदारों के बीच फैला दिए। इस महिला के मुताबिक ये वीडियो उसके पति ने ही बनाए...

भारत सरकार को नज़रिया बदलना ही होगा..

हाल ही में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मुस्लिम देशों के संगठन ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, जिसके प्रस्ताव में कश्मीर, भारतीय स्कूलों में हिजाब पर प्रतिबंध और पाकिस्तान पर गलती से मिसाइल दागने की घटना को लेकर भारत की आलोचना की गई। इस बैठक में भारत के संबंध में जिस तरह की बातें हुईं, वह भारत के लिए चिंताजनक हैं ही, शर्मिंदगी का भी विषय हैं, क्योंकि एक अंतरराष्ट्रीय मंच से भारत की आलोचना की गई है। इस संगठन से या इस मंच से कही गई बातों से भारत भले इत्तेफाक न रखे और अपने ऊपर उठी...

जागते रहो लेकिन जनता का भला भी करो..

जागते रहो लेकिन जनता का भला भी करो..

-सर्वमित्रा सुरजन॥ याद कीजिए, सत्ता संभालने से पहले भी उन्होंने ऐसा ही एक ऐलान किया था। न खाऊंगा, न खाने दूंगा। लोगों ने समझा नरेन्द्र भाई भ्रष्टाचार मिटाने की बात कर रहे हैं। भ्रष्ट लोगों को डराने के लिए कह रहे हैं कि न खाऊंगा, न खाने दूंगा। मगर भ्रष्टाचारियों को किसी बात का डर तो नहीं लगा, अलबत्ता उनके पर जरूर निकल आए। इधर बैंकों से कर्ज की मोटी रकम ऐंठी, कुछेक बड़े घोटालों में अपना नाम दर्ज करवाया और उधर दौलत के परों के सहारे विदेशों के लिए उड़ान भर ली। जनता अपने बैंक खातों में 15-15 लाख...

फैसलों में भागीदारी से बचा जा सकता है बहुत बड़ी ऐतिहासिक चूक से..

फैसलों में भागीदारी से बचा जा सकता है बहुत बड़ी ऐतिहासिक चूक से..

-सुनील कुमार॥ आज कांग्रेस पार्टी के भीतर चुनावी शिकस्त को लेकर दिख रही बेचैनी कोई नई बात नहीं है। दो बरस पहले जब पार्टी को लोकसभा चुनावों में उम्मीदों के खिलाफ जाकर बड़ी बुरी हार मिली थी तब भी यह बेचैनी शुरू हुई थी, और तब से अब तक जारी ही थी। लेकिन इसे पार्टी के खिलाफ गद्दारी भी कहा गया, लोगों की भाजपा में जाने की कोशिश भी करार दिया गया। लोगों को बार-बार यह नसीहत दी गई कि घर की बात घर के भीतर रखनी चाहिए, हालांकि यह बात किसी ने नहीं कही कि घर की बात घर...

कब तक ठगी जाएगी जनता.?

कब तक ठगी जाएगी जनता.?

  पांच राज्यों के चुनावी नतीजे सामने आ चुके हैं और चार राज्यों में भाजपा अपनी सरकार बनाने की कवायद शुरु कर चुकी है, ऐसे में एक बार फिर देश में तेल और गैस के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। चुनाव के कारण ही पिछले चार महीनों से दामों पर अंकुश लगाकर रखा गया था, लेकिन अब महंगाई का कोई राजनैतिक नुकसान तत्काल नहीं होने वाला है, इसलिए सत्तारुढ़ भाजपा ने एक बार फिर आम आदमी को चोट पहुंचाने वाला काम किया है। देश में चुनाव दर चुनाव जीतने के कारण नरेन्द्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की खूब तारीफें...

केन्द्र सरकार का सोचना है कि मरने के करीब पहुंचे लोगों को कोई रियायत क्यों?

केन्द्र सरकार का सोचना है कि मरने के करीब पहुंचे लोगों को कोई रियायत क्यों?

-सुनील कुमार॥ भारतीय रेल के मुसाफिरों को कोरोना लॉकडाऊन के पहले तक मिलने वाली टिकट पर रियायत अब शुरू नहीं की जा रही है। इसे लॉकडाऊन के बाद चलने वाली गिनी-चुनी रेलगाडिय़ों में बंद रखा गया था, लेकिन अब लोकसभा में रेलमंत्री ने यह जानकारी दी है कि रियायत पर यह पाबंदी जारी रहेगी। अब न तो लॉकडाऊन रहा, और न कोरोना की कोई लहर बची है, फिर भी बुजुर्ग मुसाफिरों को मिलने वाली यह बड़ी रियायत छीन ली गई है। ये लोग संख्या में कम हो सकते हैं, इनका सफर भी कम हो सकता है, लेकिन बुढ़ापे की सीमित...