खुदा बने बैठे नेताओं से खुदाबख्श लायब्रेरी बचाने की मुहिम..

चिकने-चौड़े हाईवे, एक-दूसरे को काटते फ्लाई ओवर, उनके नीचे और ऊपर से गुजरती मेट्रो, चारों ओर सीमेंट और कांक्रीट के बने विशालकाय ढांचे, देश में इसी को विकास का पर्याय मान लिया गया है। कभी कोई नेता सत्ता में आने के बाद किसी शहर को शंघाई बनाने का ऐलान करता है, किसी शहर को क्योटो। इन शहरों की चमक-धमक वाकई निराली है, लेकिन इसके साथ-साथ वहां इतिहास सांस ले सके, इसकी गुंजाइश भी जरूर रखी गई है। दुनिया के अधिकतर विकसित देशों में शहरीकरण और सौंदर्यीकरण के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत को संजोने का काम किया गया। लेकिन भारत में ऐसा...

कोरोना के टीके लगवाएं या नहीं, एक दुविधाभरा सवाल

इतिहास गवाह है कि टीकों के विकास में लंबा समय लगता है और क्योंकि यह महामारी बहुत सी जिंदगियां ले रही है इसलिए आधी-अधूरी तैयारी के साथ ही इन टीकों को परीक्षण के तौर पर लगाया जा रहा है। आज जब यह सवाल उठता है कि इन टीकों का असर कितने समय तक रहेगा, तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है, क्योंकि उतना तो समय ही इन्हें बने हुए नहीं हुआ है, ऐसे में यह टीके परीक्षण ही हैं।

जल्द से जल्द विचार करे सरकार

गनीमत है कि सरकार ने 10वीं बोर्ड की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। लेकिन 12वीं कक्षा के बच्चे अब भी असमंजस की स्थिति में हैं। दरअसल बैठक में यह तय हुआ है कि 10वीं के नतीजे आंतरिक मूल्यांकन यानी बोर्ड के बनाए वस्तुनिष्ठ मापदंडों के आधार पर किए जाएंगे। अगर छात्र इस मूल्यांकन से असंतुष्ट हुए तो वे स्थिति सामान्य होने पर परीक्षा दे सकेंगे। जबकि 12वीं की परीक्षा 31 मई तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

हर कुछ महीनों में बिखरी चुनावी गंदगी लोकतंत्र का क्या भला कर रही..

-सुनील कुमार॥ जब जनतंत्र और जिंदगी में से किसी एक को बचाने की प्राथमिकता तय करना हो तो जाहिर तौर पर पहले जिंदगी को छांटना चाहिए क्योंकि जन है तो ही तंत्र है, जनतंत्र तो बाद में बना है, पहले तो जन ही था, और आखिरी तक जन ही रहने चाहिए। अब यह सवाल हम आज इसलिए उठा रहे हैं कि हिंदुस्तान में जनतंत्र जारी और कायम रखने के नाम पर चुनाव नाम का जो ढकोसला चल रहा है, उस ढकोसले को समझने की जरूरत है। अगर यह नहीं होता तो लोगों के मन में बेचैनी रहती कि देश में...

महामारी में कुंभ स्नान..

पूरी दुनिया पिछले एक साल से भी अधिक वक्त से कोरोना के खौफ में जी रही है। भारत दुनिया के सर्वाधिक कोरोना प्रभावित देशों में से एक है और इसकी दूसरी लहर तो देश पर बहुत भारी पड़ती दिख रही है। अब देश में रोजाना एक-डेढ़ लाख मामले सामने आ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर मरीजों की कतारें देख कर समझा जा सकता है कि पिछले एक साल में सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए कोई खास मेहनत नहीं की। वैसे भी केन्द्र सरकार का ध्यान विधानसभा चुनावों पर ज्यादा है। पहले बिहार चुनाव में प्रधानमंत्री व्यस्त रहे,...

चुनावी चादर हुई लहूलुहान

प.बंगाल में आठ चरणों में चुनाव करवाने के पीछे निर्वाचन आयोग का तर्क था कि सुरक्षा बलों की व्यवस्था के कारण ऐसा करना पड़ा। लेकिन निर्वाचन आयोग का ये तर्क चौथे चरण के मतदान में ही दम तोड़ता दिख गया। राज्य में 10 अप्रैल को चौथे चरण के मतदान के दौरान कूचबिहार के सीतलकुची में एक मतदान केंद्र पर हिंसक झड़प में चार लोगों की मौत हो गई। तीन चरणों तक बंगाल में मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुए थे, तो बड़ी राहत थी कि राजनैतिक दलों के तमाम उकसावे और भड़काऊ बयानों के बावजूद किसी तरह की हिंसा मतदान के दौरान...

धर्म, राजनीति, और बाजार का खतरनाक मेला जुटा हुआ है कोरोना के स्वागत के लिए 

-सुनील कुमार॥ राजनीति और धर्म दोनों अपने आपमें पर्याप्त जानलेवा होते हैं, और जब इन दोनों का एक घालमेल होता है तो वह लोकतंत्र को भी खत्म करने की ताकत रखता है, और इंसानियत को तो खत्म करता ही है। उत्तराखंड में कल हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान सुबह से शाम तक 31 लाख लोग पहुंचे। राज्य सरकार ने खुद ही यह मान लिया है कि वह लोगों पर काबू नहीं रख सकी, और इस विकराल भीड़ के बीच कोरोना की सावधानी लागू कर पाना उसके लिए नामुमकिन था। देश में आज कोरोना जिस तरह छलांग लगाकर आगे बढ़...

महज़ अपनी खाल बचाता, आत्मकेंद्रित सुप्रीम कोर्ट

-सुनील कुमार॥सुप्रीम कोर्ट में कुछ कर्मचारियों के कोरोनावायरस निकलने के बाद जजों ने यह तय किया है कि वे अपने घरों से ही वीडियो कांफ्रेंस पर मामलों की सुनवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में करीब 34 सौ कर्मचारी हैं, जिनमें से 44 कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे, उसके बाद आनन-फानन यह फैसला लिया गया है। दूसरी तरफ कल बड़ी संख्या में हरिद्वार में लोग कोरोनाग्रस्त मिले हैं और उसके बाद भी आज वहां कुंभ मेले के शाही स्नान में लाखों लोगों को एक साथ नहाने की छूट दी गई है। वहां की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं उनसे लगता...

आपदा में उत्सव मनाना भी शग़ल.!

रोजाना एक लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को भर्ती होने के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है और उसके बाद भी इलाज मिलने की कोई गारंटी नहीं है। अस्पतालों में वेंटिलेटर, दवाओं, आक्सीजन सिलेंडरों की भारी कमी है।

अभूतपूर्व कोरोना और जड़ों से कटा प्रशासन..

-सुनील कुमार॥ छत्तीसगढ़ में अंधाधुंध रफ्तार से कोरोना बढ़ रहा है वह लोगों के लिए तो फिक्र की बात है ही, लेकिन वह शासन और प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती भी है। केंद्र सरकार जिस रफ्तार से कोरोना के टीके उपलब्ध करा पा रही है उसका अधिकतम इस्तेमाल छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में हो भी रहा है। लेकिन पहले टीके के बाद दूसरा टीका लगना और उसके बाद एक पखवाड़े और गुजर जाने पर ही यह उम्मीद की जा सकती है कि उसका असर शुरू होगा। टीका बनाने वाले वैज्ञानिकों का भी यह निष्कर्ष है कि करीब 70 फीसदी...

उस दिन बंधन टूटे, बेड़िया टूटी..

महाराष्ट्र के पुणे में पहली मर्तबा लड़किया स्कूल की देहरी चढ़ी ! कोई 172 साल पहले उस दम्पति ने जब कन्या पाठशाला शुरू की , भूचाल आ गया। ज्योतिबा फुले और उनकी रफिके हयात सावित्री देवी ने जब स्कूल की बुनियाद रखी तो समाज के एक हिस्से को यह ‘अनर्थ’ लगा। यह पहला मौका था जब लड़किया स्कूल में दाखिल हुई। -नारायण बारेठ॥ आज ज्योतिबा फुले का जन्म दिन है।वे औरतो और दलितों के हको हकूक के पैरोकार थे। उनके व्यक्तित्व की बुनावट में शिक्षक ,लेखक,कवि ,तर्क शास्त्री ,समाज सुधारक और बहुत कुछ था। कोई कल्पना कर सकता है उस...