Home राजनीति

Category: राजनीति

Post

कांग्रेस का अवनमन-काल

राजीव रंजन प्रसाद – आजकल राजनीति में एक नई संस्कृति विकसित हुई है-‘पॉलिटिकल नेकेडनेस’ अर्थात राजनीतिक नंगई। इस मामले में कमोबेश सभी दल समानधर्मा हैं। सन् 1885 ई0 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिसके गौरवपूर्ण अतीत की समृद्ध परम्परा हमारे समाज में मौजूद है; वह भी इस संस्कृति की मुख्य किरदार है। उसकी क्षमता अकूत है, तो गति-मति अतुलनीय। भाजपा...

Post

खोने की जरूरत कहाँ? लोकतांत्रिक अधिकार छीन रही है सरकार!

मीडिया दरबार आलेख प्रतियोगिता के तहत प्रकाशित:- राजीव रंजन प्रसाद – यह बुरा समय है। दिन स्याह और रात खौफनाक। सरकार लोकतांत्रिक अधिकार का ज़िबह कर रही है; लेकिन हमारी दिलफेर पीढ़ी सिनेमा ‘रेड्डी’ देखती हुई कहकहा लगा रही है। जनहित के संवेदनशील मुद्दे को ले कर छेड़े गए इस आन्दोलन का रूख या फिर हश्र क्या होगा?...

Post

राहुल गाँधी का मिशन-2012 हुआ गोलपोस्ट से बाहर

शीर्षक देख लग रहा होगा कि इस पंक्ति का लेखक अति-उत्साह का मारा है। उसकी राजनीतिक समझ गहरी नहीं है। सोच भी दूरदर्शी न हो कर तात्कालिक अधिक है। जो कह लें; बर्दाश्त है। यह प्राक्कल्पित समाचार है जिसमें सही निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए सभी संभाव्य परिणामों पर विचार करना ही पड़ता है। प्रस्तुत है उत्तर प्रदेश में...

Post

आज पत्रकारिता के समक्ष तोप मुक़ाबिल है

राजीव रंजन प्रसाद – इस घड़ी बाबा रामदेव के प्रयासों की वस्तुपरक एवं निष्पक्ष आलोचकीय बहस-मुबाहिसे की आवश्यकता है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बाबा रामदेव को कई लोग कई तरह से विज्ञापित-आरोपित कर रहे हैं। कोई कह रहा है-संघ के हैं रामदेव, तो कोई उन्हें महाठग कह अपनी तबीयत दुरुस्त कर रहा है। कई तो उन्हें गाँधी के...

Post

भारत में वैचारिक आपातकाल का नया दौर शुरू

जन-समाज, सभ्यता और संस्कृति के ख़िलाफ की गई समस्त साजिशें इतिहास में कैद हैं। बाबा रामदेव की रामलीला मैदान में देर रात हुई गिरफ्तारी इन्हीं अंतहीन साजिशों की परिणती है। यह सरकार के भीतर व्याप्त वैचारिक आपातकाल का नया झरोखा है जो समस्या की संवेदनशीलता को समझने की बजाय तत्कालीन उपाय निकालना महत्त्वपूर्ण समझती है।...

Post

उल्टा पड़ा बाबा पर वार, चारों तरफ से घिरी सरकार

भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव की मुहिम को हथकंड़ों से खत्म करने के बाद भारत सरकार घिर गई है. अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक की बैठक का बहिष्कार कर दिया, जबकि बीजेपी विशेष संसद सत्र की मांग कर रही है. इन सबसे अलग खुद बाबा रामदेव ने अपना सत्याग्रह फिर शुरू कर दिया है. उनका...

Post

बाबा रामदेव! यह आपने क्या किया?

-आनंद सिंह बाबा रामदेव को लेकर हमारी बिरादरी वाले पृथक-पृथक बातें कर रहे हैं। कुछ साथियों का कहना है कि बाबा रामदेव भ्रष्ट सरकार के झांसे में आ गए तो कुछ साथियों की तल्ख टिप्पणी है कि बाबा रामदेव के साथ सरकार ने विश्वासघात किया है। चर्चाओं का दौर जारी है। सरकार को अंदेशा है...

Post

कब तक बचेगी हस्ती…?

(हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष)   कहते हैं हर देश की पत्रकारिता की एक अपनी जरूरत होती है और उसी के मुताबिक वहां की लेखनी का तेवर तय होता है। इस दृष्टि से अगर देखा जाए तो भारत की पत्रकारिता और पश्चिमी देशों की पत्रकारिता में बुनियादी स्तर पर कई फर्क दिखते हैं। भारत को...

Post

खरा सोना हैं अंबिकानंद सहाय

कहते हैं थानेदार की ईमानदारी का पता करना हो तो चोर से पूछो… भारतीय पत्रकारिता में राडिया और अमर सिंह के फोन कॉल सार्वजनिक होते ही जितने भी तथाकथित थानेदार पत्रकार थे सब की कलई खुल गई, लेकिन कोई ऐसा भी है जो खालिस सोने की तरह चमक रहा है। अंबिकानंद सहाय ऐसे ही सोने...

Post

क्या भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की भेंट चढ़ जायेगा भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन?

इतिहास गवाह है. राजा महाराजा अपनी रियासतों के विस्तार के लिए एक दूसरी रियासत पर हमला करते थे और अपने साम्राज्य के विस्तार में लगे रहते थे. युद्ध के लिए सेना जंहा से गुजरती, उस रस्ते में पड़ने वाले गांवों को लूट लिया जाता, फसलें तबाह कर दी जाती तथा जिस राज्य पर हमला होता...