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Category: राजनीति

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आज पत्रकारिता के समक्ष तोप मुक़ाबिल है

राजीव रंजन प्रसाद – इस घड़ी बाबा रामदेव के प्रयासों की वस्तुपरक एवं निष्पक्ष आलोचकीय बहस-मुबाहिसे की आवश्यकता है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बाबा रामदेव को कई लोग कई तरह से विज्ञापित-आरोपित कर रहे हैं। कोई कह रहा है-संघ के हैं रामदेव, तो कोई उन्हें महाठग कह अपनी तबीयत दुरुस्त कर रहा है। कई तो उन्हें गाँधी के...

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भारत में वैचारिक आपातकाल का नया दौर शुरू

जन-समाज, सभ्यता और संस्कृति के ख़िलाफ की गई समस्त साजिशें इतिहास में कैद हैं। बाबा रामदेव की रामलीला मैदान में देर रात हुई गिरफ्तारी इन्हीं अंतहीन साजिशों की परिणती है। यह सरकार के भीतर व्याप्त वैचारिक आपातकाल का नया झरोखा है जो समस्या की संवेदनशीलता को समझने की बजाय तत्कालीन उपाय निकालना महत्त्वपूर्ण समझती है।...

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उल्टा पड़ा बाबा पर वार, चारों तरफ से घिरी सरकार

भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव की मुहिम को हथकंड़ों से खत्म करने के बाद भारत सरकार घिर गई है. अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक की बैठक का बहिष्कार कर दिया, जबकि बीजेपी विशेष संसद सत्र की मांग कर रही है. इन सबसे अलग खुद बाबा रामदेव ने अपना सत्याग्रह फिर शुरू कर दिया है. उनका...

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बाबा रामदेव! यह आपने क्या किया?

-आनंद सिंह बाबा रामदेव को लेकर हमारी बिरादरी वाले पृथक-पृथक बातें कर रहे हैं। कुछ साथियों का कहना है कि बाबा रामदेव भ्रष्ट सरकार के झांसे में आ गए तो कुछ साथियों की तल्ख टिप्पणी है कि बाबा रामदेव के साथ सरकार ने विश्वासघात किया है। चर्चाओं का दौर जारी है। सरकार को अंदेशा है...

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कब तक बचेगी हस्ती…?

(हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष)   कहते हैं हर देश की पत्रकारिता की एक अपनी जरूरत होती है और उसी के मुताबिक वहां की लेखनी का तेवर तय होता है। इस दृष्टि से अगर देखा जाए तो भारत की पत्रकारिता और पश्चिमी देशों की पत्रकारिता में बुनियादी स्तर पर कई फर्क दिखते हैं। भारत को...

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खरा सोना हैं अंबिकानंद सहाय

कहते हैं थानेदार की ईमानदारी का पता करना हो तो चोर से पूछो… भारतीय पत्रकारिता में राडिया और अमर सिंह के फोन कॉल सार्वजनिक होते ही जितने भी तथाकथित थानेदार पत्रकार थे सब की कलई खुल गई, लेकिन कोई ऐसा भी है जो खालिस सोने की तरह चमक रहा है। अंबिकानंद सहाय ऐसे ही सोने...

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क्या भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की भेंट चढ़ जायेगा भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन?

इतिहास गवाह है. राजा महाराजा अपनी रियासतों के विस्तार के लिए एक दूसरी रियासत पर हमला करते थे और अपने साम्राज्य के विस्तार में लगे रहते थे. युद्ध के लिए सेना जंहा से गुजरती, उस रस्ते में पड़ने वाले गांवों को लूट लिया जाता, फसलें तबाह कर दी जाती तथा जिस राज्य पर हमला होता...