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Category: राजनीति

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फर्ज़ी गनर आदेश मामले में ललित भारद्वाज के खिलाफ़ जांच के आदेश गायब?

क्या पत्रकारों को पकड़ाया था प्रशासन ने झुनझुना?  साल भर बाद मीडिया दरबार में खुला राज़! यह दास्तान है एक ऐसे पत्रकार की जो खुलेआम मचा रहा है अंधेरगर्दी और जेब मे रख कर घूम रहा है राजनीति, पुलिस और प्रशासन को। उसने मचाया उत्पात थाने में, अधिकारियों के दफ्तरों पर और खुलेआम धूल झोंका...

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महज़ दिखावा है लोकपाल बिल पर सरकारी क़वायद

-कविता सहाय (मीडिया दरबार की साप्ताहिक आलेख प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित) देश में भ्रष्टाचार आज इतनी गहरी जडें जमा चुका है कि इसे रोकने के सारे उपाय फेल हो चुके हैं। यह एक ऐसा भ्रष्ट तंत्र बन गया है जहां सीवीसी तक की नियुक्ति विवादों के घेरे में आ जाती है। ऐसे मे...

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19 जून, जन्मदिन और राहुल गाँधी

आज राहुल गाँधी का जन्मदिन है। पिछले साल ‘राहुल जन्मदिवस’ पूरे रूआब के साथ मना था। हमारे शहर वाराणसी में भी ‘केक’ कटे थे। अख़बार के कतरन बताते हैं कि 10-जनपथ पर जश्न का माहौल था। लेकिन इस साल स्थितियाँ पलटी मारी हुई दिख रही हैं। राहुल गाँधी मीडिया-पटल से लापता हैं। उन्हें जन्मदिन की बधाईयाँ देने वाले...

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जन लोकपाल कानून का मसौदा

(प्रस्तुत दस्तावेज़  शान्ति भूषण, जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण एवं अरविन्द केजरीवाल द्वारा तैयार जनलोकपाल बिल के  वर्ज़न-2.2 का हिन्दी अनुवाद है.) इस विधेयक का मसविदा केन्द्र में लोकपाल नामक संस्था की स्थापना के लिए तैयार किया गया है. लेकिन इस विधेयक के प्रावधान इस तरह के होंगे ताकि प्रत्येक राज्य में इसी तरह की...

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कांग्रेस का अवनमन-काल

राजीव रंजन प्रसाद – आजकल राजनीति में एक नई संस्कृति विकसित हुई है-‘पॉलिटिकल नेकेडनेस’ अर्थात राजनीतिक नंगई। इस मामले में कमोबेश सभी दल समानधर्मा हैं। सन् 1885 ई0 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जिसके गौरवपूर्ण अतीत की समृद्ध परम्परा हमारे समाज में मौजूद है; वह भी इस संस्कृति की मुख्य किरदार है। उसकी क्षमता अकूत है, तो गति-मति अतुलनीय। भाजपा...

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खोने की जरूरत कहाँ? लोकतांत्रिक अधिकार छीन रही है सरकार!

मीडिया दरबार आलेख प्रतियोगिता के तहत प्रकाशित:- राजीव रंजन प्रसाद – यह बुरा समय है। दिन स्याह और रात खौफनाक। सरकार लोकतांत्रिक अधिकार का ज़िबह कर रही है; लेकिन हमारी दिलफेर पीढ़ी सिनेमा ‘रेड्डी’ देखती हुई कहकहा लगा रही है। जनहित के संवेदनशील मुद्दे को ले कर छेड़े गए इस आन्दोलन का रूख या फिर हश्र क्या होगा?...

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राहुल गाँधी का मिशन-2012 हुआ गोलपोस्ट से बाहर

शीर्षक देख लग रहा होगा कि इस पंक्ति का लेखक अति-उत्साह का मारा है। उसकी राजनीतिक समझ गहरी नहीं है। सोच भी दूरदर्शी न हो कर तात्कालिक अधिक है। जो कह लें; बर्दाश्त है। यह प्राक्कल्पित समाचार है जिसमें सही निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए सभी संभाव्य परिणामों पर विचार करना ही पड़ता है। प्रस्तुत है उत्तर प्रदेश में...

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आज पत्रकारिता के समक्ष तोप मुक़ाबिल है

राजीव रंजन प्रसाद – इस घड़ी बाबा रामदेव के प्रयासों की वस्तुपरक एवं निष्पक्ष आलोचकीय बहस-मुबाहिसे की आवश्यकता है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बाबा रामदेव को कई लोग कई तरह से विज्ञापित-आरोपित कर रहे हैं। कोई कह रहा है-संघ के हैं रामदेव, तो कोई उन्हें महाठग कह अपनी तबीयत दुरुस्त कर रहा है। कई तो उन्हें गाँधी के...

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भारत में वैचारिक आपातकाल का नया दौर शुरू

जन-समाज, सभ्यता और संस्कृति के ख़िलाफ की गई समस्त साजिशें इतिहास में कैद हैं। बाबा रामदेव की रामलीला मैदान में देर रात हुई गिरफ्तारी इन्हीं अंतहीन साजिशों की परिणती है। यह सरकार के भीतर व्याप्त वैचारिक आपातकाल का नया झरोखा है जो समस्या की संवेदनशीलता को समझने की बजाय तत्कालीन उपाय निकालना महत्त्वपूर्ण समझती है।...

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उल्टा पड़ा बाबा पर वार, चारों तरफ से घिरी सरकार

भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव की मुहिम को हथकंड़ों से खत्म करने के बाद भारत सरकार घिर गई है. अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक की बैठक का बहिष्कार कर दिया, जबकि बीजेपी विशेष संसद सत्र की मांग कर रही है. इन सबसे अलग खुद बाबा रामदेव ने अपना सत्याग्रह फिर शुरू कर दिया है. उनका...

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बाबा रामदेव! यह आपने क्या किया?

-आनंद सिंह बाबा रामदेव को लेकर हमारी बिरादरी वाले पृथक-पृथक बातें कर रहे हैं। कुछ साथियों का कहना है कि बाबा रामदेव भ्रष्ट सरकार के झांसे में आ गए तो कुछ साथियों की तल्ख टिप्पणी है कि बाबा रामदेव के साथ सरकार ने विश्वासघात किया है। चर्चाओं का दौर जारी है। सरकार को अंदेशा है...

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कब तक बचेगी हस्ती…?

(हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष)   कहते हैं हर देश की पत्रकारिता की एक अपनी जरूरत होती है और उसी के मुताबिक वहां की लेखनी का तेवर तय होता है। इस दृष्टि से अगर देखा जाए तो भारत की पत्रकारिता और पश्चिमी देशों की पत्रकारिता में बुनियादी स्तर पर कई फर्क दिखते हैं। भारत को...