19 जून, जन्मदिन और राहुल गाँधी

आज राहुल गाँधी का जन्मदिन है। पिछले साल ‘राहुल जन्मदिवस’ पूरे रूआब के साथ मना था। हमारे शहर वाराणसी में भी ‘केक’ कटे थे। अख़बार के

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जन लोकपाल कानून का मसौदा

(प्रस्तुत दस्तावेज़  शान्ति भूषण, जस्टिस संतोष हेगड़े, प्रशांत भूषण एवं अरविन्द केजरीवाल द्वारा तैयार जनलोकपाल बिल के  वर्ज़न-2.2 का हिन्दी अनुवाद है.) इस विधेयक का

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कांग्रेस का अवनमन-काल

राजीव रंजन प्रसाद – आजकल राजनीति में एक नई संस्कृति विकसित हुई है-‘पॉलिटिकल नेकेडनेस’ अर्थात राजनीतिक नंगई। इस मामले में कमोबेश सभी दल समानधर्मा हैं। सन् 1885 ई0

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खोने की जरूरत कहाँ? लोकतांत्रिक अधिकार छीन रही है सरकार!

मीडिया दरबार आलेख प्रतियोगिता के तहत प्रकाशित:- राजीव रंजन प्रसाद – यह बुरा समय है। दिन स्याह और रात खौफनाक। सरकार लोकतांत्रिक अधिकार का ज़िबह कर

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राहुल गाँधी का मिशन-2012 हुआ गोलपोस्ट से बाहर

शीर्षक देख लग रहा होगा कि इस पंक्ति का लेखक अति-उत्साह का मारा है। उसकी राजनीतिक समझ गहरी नहीं है। सोच भी दूरदर्शी न हो कर

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आज पत्रकारिता के समक्ष तोप मुक़ाबिल है

राजीव रंजन प्रसाद – इस घड़ी बाबा रामदेव के प्रयासों की वस्तुपरक एवं निष्पक्ष आलोचकीय बहस-मुबाहिसे की आवश्यकता है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बाबा रामदेव को

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भारत में वैचारिक आपातकाल का नया दौर शुरू

जन-समाज, सभ्यता और संस्कृति के ख़िलाफ की गई समस्त साजिशें इतिहास में कैद हैं। बाबा रामदेव की रामलीला मैदान में देर रात हुई गिरफ्तारी इन्हीं

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उल्टा पड़ा बाबा पर वार, चारों तरफ से घिरी सरकार

भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव की मुहिम को हथकंड़ों से खत्म करने के बाद भारत सरकार घिर गई है. अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक की

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बाबा रामदेव! यह आपने क्या किया?

-आनंद सिंह बाबा रामदेव को लेकर हमारी बिरादरी वाले पृथक-पृथक बातें कर रहे हैं। कुछ साथियों का कहना है कि बाबा रामदेव भ्रष्ट सरकार के

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कब तक बचेगी हस्ती…?

(हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष)   कहते हैं हर देश की पत्रकारिता की एक अपनी जरूरत होती है और उसी के मुताबिक वहां की लेखनी

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खरा सोना हैं अंबिकानंद सहाय

कहते हैं थानेदार की ईमानदारी का पता करना हो तो चोर से पूछो… भारतीय पत्रकारिता में राडिया और अमर सिंह के फोन कॉल सार्वजनिक होते

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क्या भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की भेंट चढ़ जायेगा भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन?

इतिहास गवाह है. राजा महाराजा अपनी रियासतों के विस्तार के लिए एक दूसरी रियासत पर हमला करते थे और अपने साम्राज्य के विस्तार में लगे

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