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Category: राजनीति

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राहुल गांधी का जज्बा..

राहुल गांधी का जज्बा..

पिछले लगभग दो दशकों से राहुल गांधी की छवि नौसिखिए राजनेता जैसी दिखाने के लिए मीडिया के कुछ सेलिब्रिटी पत्रकारों और संपादकों ने काफी मेहनत की। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के काम में लगाए गए लोगों ने भी इसमें खूब मदद की। उनके वीडियो और तस्वीरों को कभी काट-छांट करके, कभी छेड़छाड़ करके जनता के...

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माईक सामने आते ही लोगों को यह क्यों लगता है कि उन्हें कुछ बेवकूफी उगलनी है?

माईक सामने आते ही लोगों को यह क्यों लगता है कि उन्हें कुछ बेवकूफी उगलनी है?

-सुनील कुमार॥ महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के एक बयान को लेकर बखेड़ा खड़ा हो गया है जिसमें मुम्बई के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच से माईक पर बोलते हुए राज्यपाल ने कहा- कभी-कभी मैं यहां लोगों से कहता हूं कि महाराष्ट्र में, विशेषकर मुम्बई और ठाणे से, गुजरातियों और राजस्थानियों को निकाल दो,...

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अब नोटों के इतने ऊंचे जखीरे पर बैठे नेता भला किस मुंह से बदले की कार्रवाई कह सकते हैं…

अब नोटों के इतने ऊंचे जखीरे पर बैठे नेता भला किस मुंह से बदले की कार्रवाई कह सकते हैं…

-सुनील कुमार॥ पश्चिम बंगाल की ममता बैनर्जी सरकार के साथ केन्द्र सरकार का टकराव, और तनातनी जारी है। लेकिन इस बार बात महज राजनीतिक नहीं है, बल्कि सत्ता का भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है। ममता मंत्रिमंडल के पार्थ चटर्जी से जुड़े ठिकानों पर कल ईडी ने छापा मारा था। और मंत्री की एक बहुत ही...

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गढ़ने होंगे नए शब्द..

गढ़ने होंगे नए शब्द..

18 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरु होने जा रहा है, जिसमें सरकार के सामने प्रश्नों की झड़ी लगाने के लिए विपक्ष तैयारियों में जुटा हुआ है। महंगाई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था में गिरावट जैसे स्थायी मुद्दों के अलावा इस बार अग्निपथ योजना, नुपूर शर्मा विवाद, जांच एजेंसियों का दुरुपयोग, रूपए में ऐतिहासिक गिरावट, किसानों से...

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शिवसेना की फ़ज़ीहत..

शिवसेना की फ़ज़ीहत..

भाजपा से परहेज तो ठीक है, लेकिन शिवसेना का विभाजन लोकतंत्र का पतन नहीं है… -सुनील कुमार॥ महाराष्ट्र में शिवसेना की फजीहत और बेइज्जती खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। ऐसा भी नहीं है कि शिवसेना के इतिहास में कभी छोटे-मोटे बागी हुए ही न हों, लेकिन इस पैमाने पर बगावत का...

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विधायकों के प्लेन और होटल पर खर्च क्या अब भी चर्चा के लायक हैं?

विधायकों के प्लेन और होटल पर खर्च क्या अब भी चर्चा के लायक हैं?

-सुनील कुमार॥ सोशल मीडिया की मेहरबानी से किसी भी जलते-सुलगते मुद्दे पर खास से लेकर आम लोगों तक को अपने मन की बात कहने का मौका हासिल है। और इसी के चलते हुए अभी लगातार यह बात लिखी जा रही है कि महाराष्ट्र से शिवसेना के विधायकों को लेकर पहले भाजपा शासित गुजरात और फिर...

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सवाल फोकस और एंगल का है..

सवाल फोकस और एंगल का है..

-सर्वमित्रा सुरजन॥ बाढ़ में तटबंधों को तोड़कर सारी मर्यादाएं पानी उफान के साथ बहा कर ले जाता है, वैसे ही सत्तालोलुपता की बाढ़ में पिछले आठ सालों में देश में लोकतंत्र की मर्यादाएं, बंधन, नैतिकता, शिष्टाचार, संस्कार सब बह गए हैं। बाढ़ का ये पानी कब उतरेगा, कब नदी शांत होकर बहेगी, कुछ पता नहीं,...

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किसी धर्म-जाति के राष्ट्रपति बनने से भला उस धर्म-जाति के भले का क्या लेना-देना..?

किसी धर्म-जाति के राष्ट्रपति बनने से भला उस धर्म-जाति के भले का क्या लेना-देना..?

-सुनील कुमार॥ अखबार की जिंदगी भी बड़ी अजीब रहती है, अक्सर ही पहले पन्ने पर जगह पाने के लिए खबरों में धक्का-मुक्की होती है, और अगर पहला पन्ना तैयार करने वाले लोगों को मेहनत से परहेज न हो, तो आखिरी पलों तक खबरें ऊपर-नीचे, बाहर-भीतर होती रहती हैं। अब कल ही एक तरफ तो महाराष्ट्र...

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राहुल जिंदाबाद, इंसानियत जिंदाबाद..

राहुल जिंदाबाद, इंसानियत जिंदाबाद..

-सर्वमित्रा सुरजन॥ राहुल के बचाव में लगे तमाम लोगों की जितनी तारीफें की जाएं, कम हैं। राहुल तक पहुंचने के लिए तरह-तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया गया और इससे फिर साबित हुआ कि विज्ञान का ज्ञान और वैज्ञानिक नजरिया दोनों हमारे जीवन के लिए कितने उपयोगी हैं। जमीन के नीचे केवल रस्सी डालकर निकालना...

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सोनिया गांधी के नाम खुला ख़त..

सोनिया गांधी के नाम खुला ख़त..

-सर्वमित्रा सुरजन॥ अगर कांग्रेस सत्ता में लौटना चाहती है कि तो उसे अपने प्रतिद्वंद्वी की शक्ति का अहसास, रणनीतियों का अंदाज और अगली चालों का अनुमान लगाना होगा। ये काम एक-दो चिंतन शिविरों से नहीं हो सकता। इसके लिए हर रोज 24 घंटे कांग्रेस के नेताओं को सतर्क रहकर काम करना होगा। एक-दूसरे से संवाद...

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असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश..

असल मुद्दों से भटकाने की कोशिश..

बड़े पदों के साथ बड़ी जिम्मेदारियां भी आती हैं, जिन्हें निभाने के लिए आपको स्वार्थ के दायरे से ऊपर उठते हुए व्यापक नजरिया अपनाना पड़ता है, नैतिकता की यह जरूरी बात भाजपा के कुछ लोगों को समझना बहुत जरूरी है। वैसे तो पिछले आठ सालों में ऐसे कई उदाहरण देश के सामने प्रस्तुत हुए हैं,...

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देश किस हाल में, आंख खोलने की जरूरत..

देश किस हाल में, आंख खोलने की जरूरत..

हिमाचल प्रदेश में रविवार सुबह उस वक्त सियासी गहमागहमी तेज हो गई, जब धर्मशाला में विधानसभा गेट पर खालिस्तान के झंडे और गुरुमुखी लिपि में खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे मिले। इस मामले के सामने आने के बाद से हड़कंप मच गया। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस पूरी घटना की निंदा की...