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Category: व्यंग

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हिन्दू हृदय सम्राट का मुकुट खतरे में है..

-विष्णु नागर॥ हिन्दू हृदय सम्राट को यूँ तो जूते से मुकुट तक सब पहनकर सोने का अभ्यास था मगर उस रात उनके गंजे सिर में खुजली बहुत चली।वह सिर खुजाते और मुकुट पहनते।फिर खुजाते और फिर पहनते। कोई सौ बार के बाद थक कर उन्होंने मुकुट सिरहाने रख दिया। तुरंत ही ईश्वर की कृपा से...

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1969 में इंदिरा गांधी ने किया था बैंको का राष्ट्रीयकरण..

-नामालूम॥ जो बैंक राष्ट्रीयकृत हुए थे उनमें से एक था Central bank of India. अब जिन बैंको के दरवाज़े से आम लोगों(तब बस अमीर और गरीब हुआ करते थे, मिडिल क्लास जैसा कुछ नहीं था) को हट गरीब कह कर भगा दिया जाता था, उन्हें भी बैंक के अंदर आने का अवसर मिला। इस अवसर...

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राजा तिरीचन्द और टेढ़ापुर की अर्थव्यवस्था..

-सुधीन्द्र मोहन शर्मा॥ तो एक थे राजा तिरीचंद, और एक उनका राज्य था टेढ़ापुरकुछ दिनों से टेढ़ापुर राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ती ही जा रही थी.तो एक बार तिरीचंद जी ने टेढ़ापुर के विद्वान अर्थशास्त्रियों की बैठक बुलाई. ना, ये जानने के लिए नही कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर कैसे लाया जाए , उसमें तो तिरीचंद...

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मुझे लात मारने से पहले तीन डॉट..

-पंकज के. चौधरी॥ बरसों पहले की बात है। मैं एक सरकारी स्कूल में पढ़ रहा था। एक बार मैंने ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया यह टीचर साला है… अगले दिन क्लास टीचर आये। पूछ कि ये किसने लिखा है। मैंने कहा कि मैंने लिखा है। मेरे क्लास टीचर ने जूतों से, लात से घूसों से मुझे...

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रंगा सियार बन बैठा सम्राट ककुदुम ..

-राजीव मित्तल॥ एक समय की बात है. एक सियार किसी हादसे में घायल हो गया. कई दिन तक वह अपनी खोह में पड़ा रहा..जब ठीक हो कर बाहर आया तो काफी कमजोर हो चुका था. ऊपर से भूखा.. किसी मृत जानवर की तलाश में चलते चलते वो एक बस्ती में आ गया..जहां कुत्तों ने उसे...

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आपके आये या नहीं, रेपिस्टों के अच्छे दिन आ गए..

-विष्णु नागर।। लगता है कि उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा यह सिद्ध करने पर आमादा है कि 19 साल की हाथरस की दलित लड़की के साथ बलात्कार नहीं हुआ था और वे लड़के जिन पर ऐसा आरोप है,वे निर्दोष हैं या कम से कम बलात्कार के दोषी नहीं हैं।दोषियों की जाति के लोगों ने शुरू...

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एचआर तोताराम के चलते टाईम्स समूह का प्रस्ताव ठुकरा दिया..

-ओम थानवी।। 1984 की बात है। राजेंद्र माथुर नवभारत टाइम्स का संस्करण शुरू करने के इरादे से जयपुर आए। पहली, महज़ परिचय वाली, मुलाक़ात में कहा: “जानता हूँ आप इतवारी का काम देखते हैं। “फिर अगले ही वाक्य में, “और अच्छा देखते हैं”। कुछ रोज़ बाद में उन्होंने मुझे नवभारत टाइम्स में आने को कहा।...

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गावस्कर का आत्मघाती मजाक खासा महंगा पड़ा

-सुनील कुमार।।हिन्दुस्तानी क्रिकेट के एक बड़े नामी-गिरामी और इज्जतदार भूतपूर्व खिलाड़ी, वर्तमान कमेंटेटर सुनील गावस्कर अपनी एक लापरवाह एक टिप्पणी को लेकर ऐसे बुरे फंसे हैं कि उन्होंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं होगा। गावस्कर का नाम तमाम विवादों से परे रहते आया है, और उनके बारे में यह कल्पना भी मुश्किल है कि वे...

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कहीं पे हकीकत, कहीं पे फसाना..

-सुनील कुमार।।हिन्दुस्तान में इन दिनों हकीकत देखनी हो तो कार्टून देखें और अखबारों में खबरें पढ़ें, और फसाने देखने हों तो टीवी चैनलों पर खबरें देखें, और सोशल मीडिया पर फुलटाईम नौकरी की तरह काम करने वाली ट्रोल आर्मी की पोस्ट देखें। कुछ महीनों से यह लतीफा चल रहा था कि अलग-अलग किस चैनल को...

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