कहीं पे हकीकत, कहीं पे फसाना..

-सुनील कुमार।।हिन्दुस्तान में इन दिनों हकीकत देखनी हो तो कार्टून देखें और अखबारों में खबरें पढ़ें, और फसाने देखने हों तो टीवी चैनलों पर खबरें

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टीवी चैनलों की बहस के बाद मौत से उपजे सवाल..

–सुनील कुमार||कांग्रेस पार्टी के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव त्यागी की कल मौत हो गई। वे एक समाचार चैनल की बहस पर थे, और वहां भाजपा

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सीना ठोंक कर हिसाब माँगने वाले राहत साहब हम से जुदा हो गए..

-तौसीफ कुरैशी।। 1 जनवरी 1950 को इंदौर में जन्मे राहत क़ुरैशी इंदौरी ने लगभग 16 वर्षों से अधिक उर्दू साहित्य को इंदौर विश्व विद्यालय में

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अपूर्वानंद के लिए दो शब्द: अजय तिवारी

-अजय तिवारी।। अपूर्वानंद मेरे सहकर्मी रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में वे रीडर (अब के अनुसार एसोशिएट प्रोफ़ेसर) होकर आये थे, जब हम

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कोरोना पीड़ित और न्यू इंडिया..

कोरोना से लड़ाई में भारत बुरी तरह मात खा चुका है, इसका ताजा प्रमाण ये है कि अब देश में मामले इकाई-दहाई में नहीं बल्कि

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इन्साफ की डगर पे..

-विष्णु नागर।। जिस दिन यह टिप्पणी लिख रहा हूँ उस दिन पता नहीं क्यों सुबह से ही हेमंत कुमार का गाया और बचपन में और

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