एचआर तोताराम के चलते टाईम्स समूह का प्रस्ताव ठुकरा दिया..

Desk

-ओम थानवी।। 1984 की बात है। राजेंद्र माथुर नवभारत टाइम्स का संस्करण शुरू करने के इरादे से जयपुर आए। पहली, महज़ परिचय वाली, मुलाक़ात में कहा: “जानता हूँ आप इतवारी का काम देखते हैं। “फिर अगले ही वाक्य में, “और अच्छा देखते हैं”। कुछ रोज़ बाद में उन्होंने मुझे नवभारत […]

कोविड पश्चात दुनिया और बहुजन कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी

admin

-प्रमोद रंजन।।कहा जा रहा है कि अगर नए कोरोना वायरस के संक्रमण को कड़े लॉकडाउन के सहारे रोका नहीं गया होता तो मानव-आबादी का एक बड़ा हिस्सा इसकी भेंट चढ़ जाता। लेकिन क्या सच उतना एकांगी है, जितना बताया जा रहा है? लॉकडाउन के कारण दुनिया भर में लाखों लोग […]

गावस्कर का आत्मघाती मजाक खासा महंगा पड़ा

admin

-सुनील कुमार।।हिन्दुस्तानी क्रिकेट के एक बड़े नामी-गिरामी और इज्जतदार भूतपूर्व खिलाड़ी, वर्तमान कमेंटेटर सुनील गावस्कर अपनी एक लापरवाह एक टिप्पणी को लेकर ऐसे बुरे फंसे हैं कि उन्होंने कभी ऐसा सोचा भी नहीं होगा। गावस्कर का नाम तमाम विवादों से परे रहते आया है, और उनके बारे में यह कल्पना […]

नित्यानंद गायेन की एक कविता – राजा से हर मौत का हिसाब लेना चाहिए

Desk

नये भारत की सरकारमारे गए नागरिकों की गिनती नहीं करतीमने किसी सरकारी खाते और डेटाबेस मेंकोई रिकार्ड नहीं रखतीदरअसल आसान भाषा में समझ लीजिएकि सरकार अब लाशों की गिनती नहीं करती सरकार तो अब जीते हुए लोगों कोलाश बनाकर छोड़ देती है राजा का सिंहासन जब लाशों की ढेर पर […]

नागरी प्रचारिणी सभा और एक सम्पादक की व्याकुल-चिंता !

Desk

-सुधेंदु पटेल|| कवि-नाटयकार व्योमेश शुक्ल ने अपनी फेसबुक पोस्ट ‘एक बवाल हिंदी वालों की जान पर यह भी है’ लिखकर आज मेरी दुखती रग को छेड़ दिया है l मैं ही नहीं साथी नरेन्द्र नीरव, विश्वनाथ गोकर्ण आदि भी उद्धवेलित हुए l नीरव ने तो पुनः सभा के लिए आंदोलन […]

कहीं पे हकीकत, कहीं पे फसाना..

Desk

-सुनील कुमार।।हिन्दुस्तान में इन दिनों हकीकत देखनी हो तो कार्टून देखें और अखबारों में खबरें पढ़ें, और फसाने देखने हों तो टीवी चैनलों पर खबरें देखें, और सोशल मीडिया पर फुलटाईम नौकरी की तरह काम करने वाली ट्रोल आर्मी की पोस्ट देखें। कुछ महीनों से यह लतीफा चल रहा था […]

‘शाकिर उर्फ़…’: दोयम दर्जे का दंश और पहचान छिपाने का संकट..

Desk

-कामेश्वर।। दलित लेखकों की मान्यता है कि उनकी पीड़ा और संघर्ष का सही चित्रण कोई सवर्ण लेखक नहीं कर सकता। उन्हें तो प्रेमचंद का भी दलित-चित्रण वास्तविकता से दूर लगता है। हालांकि महत्व, दूर से ही सही, दमदार वक़ालत की है, जो प्रेमचंद ने बखूबी की है। फिर भी, दलित-चेतना […]

गिरीश मालवीय सहित नौ हस्तियाँ कॉमरेड शिव वर्मा एवार्ड से सम्मानित…

Desk

कल 15 अगस्त को प्रथम पीपुल्स मिशन क्रांतिकारी शिव वर्मा पुरस्कार 2020 की घोषणा की गई । पुरस्कार निर्णायक समिति ने पत्रकारिता की विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार के लिए नामों का चुनाव किया। फोटोजर्नलिज्म श्रेणी में असम की  फोटोग्राफर : श्रीमती अंजुमन आरा बेगम को उनके ‘मां व बच्चे ने […]

टीवी चैनलों की बहस के बाद मौत से उपजे सवाल..

Desk

–सुनील कुमार||कांग्रेस पार्टी के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव त्यागी की कल मौत हो गई। वे एक समाचार चैनल की बहस पर थे, और वहां भाजपा के एक प्रवक्ता अपनी आदत के मुताबिक कांग्रेस प्रवक्ता पर जहरीले आरोप लगा रहे थे। जिससे कि हो सकता है वे विचलित भी हुए हों, […]

सीना ठोंक कर हिसाब माँगने वाले राहत साहब हम से जुदा हो गए..

Desk

-तौसीफ कुरैशी।। 1 जनवरी 1950 को इंदौर में जन्मे राहत क़ुरैशी इंदौरी ने लगभग 16 वर्षों से अधिक उर्दू साहित्य को इंदौर विश्व विद्यालय में पढ़ाया।उनके 6 से अधिक ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हुए।50 से अधिक फिल्मी गीत लिखे , म्यूज़िक एल्बम आयीं और फिल्मों में अभिनय भी किया। “तुझे क्या […]

Fb-Button
Facebook