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Category: साहित्य

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मुक्‍ति‍बोध की बेमि‍साल पारदर्शी प्रेमकथा –

मुक्‍ति‍बोध की बेमि‍साल पारदर्शी प्रेमकथा –

-जगदीश्वर चतुर्वेदी॥ हि‍न्‍दी का लेखक अभी भी नि‍जी प्रेम के बारे में बताने से भागता है। लेकि‍न मुक्‍ति‍बोध पहले हि‍न्‍दी लेखक हैं जो अपने प्रेम का अपने ही शब्‍दों में बयान करते हैं। मुक्‍ति‍बोध का अपनी प्रेमि‍का जो बाद में पत्‍नी बनी, के साथ बड़ा ही गाढ़ा प्‍यार था, इस प्‍यार की हि‍न्‍दी में मि‍साल...

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प्रेमचंद के बहाने: सोशल मीडिया और इंटरनेट

इप्टा रायगढ़ और प्रगतिशील लेखक संघ रायगढ़ का संयुक्त आयोजन प्रेमचंद की कविताएं-कल एक अगस्त को मुंबई से उषा आठले ने ज़ूम मीटिंग के माध्यम से देश के अलग-अलग भागों में बैठे इप्टा और प्रगतिशील लेखक संघ के सदस्यों को जोड़ा और इसमें प्रेमचंद को एक बदले हुए समय में याद किया। यह सच है...

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हिन्दू हृदय सम्राट का मुकुट खतरे में है..

-विष्णु नागर॥ हिन्दू हृदय सम्राट को यूँ तो जूते से मुकुट तक सब पहनकर सोने का अभ्यास था मगर उस रात उनके गंजे सिर में खुजली बहुत चली।वह सिर खुजाते और मुकुट पहनते।फिर खुजाते और फिर पहनते। कोई सौ बार के बाद थक कर उन्होंने मुकुट सिरहाने रख दिया। तुरंत ही ईश्वर की कृपा से...

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1969 में इंदिरा गांधी ने किया था बैंको का राष्ट्रीयकरण..

-नामालूम॥ जो बैंक राष्ट्रीयकृत हुए थे उनमें से एक था Central bank of India. अब जिन बैंको के दरवाज़े से आम लोगों(तब बस अमीर और गरीब हुआ करते थे, मिडिल क्लास जैसा कुछ नहीं था) को हट गरीब कह कर भगा दिया जाता था, उन्हें भी बैंक के अंदर आने का अवसर मिला। इस अवसर...

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राजा तिरीचन्द और टेढ़ापुर की अर्थव्यवस्था..

-सुधीन्द्र मोहन शर्मा॥ तो एक थे राजा तिरीचंद, और एक उनका राज्य था टेढ़ापुरकुछ दिनों से टेढ़ापुर राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ती ही जा रही थी.तो एक बार तिरीचंद जी ने टेढ़ापुर के विद्वान अर्थशास्त्रियों की बैठक बुलाई. ना, ये जानने के लिए नही कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर कैसे लाया जाए , उसमें तो तिरीचंद...

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मातृ-पितृ दिवस नाम का पाखंड खत्म किया जाए..

-सुनील कुमार॥आज प्रेम का त्यौहार वेलेंटाइन डे है, और इसके लिए प्रेमी दिलों ने फूलों और तोहफों की तैयारी कर रखी है, दूसरी तरफ प्रेम से नफरत करने वालों ने प्रेमियों को मारने के लिए लाठियों को तेल पिला रखा है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में प्रशासन और पुलिस गुंडों को रोकने और जेल भेजने के...

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मुझे लात मारने से पहले तीन डॉट..

-पंकज के. चौधरी॥ बरसों पहले की बात है। मैं एक सरकारी स्कूल में पढ़ रहा था। एक बार मैंने ब्लैकबोर्ड पर लिख दिया यह टीचर साला है… अगले दिन क्लास टीचर आये। पूछ कि ये किसने लिखा है। मैंने कहा कि मैंने लिखा है। मेरे क्लास टीचर ने जूतों से, लात से घूसों से मुझे...

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रंगा सियार बन बैठा सम्राट ककुदुम ..

-राजीव मित्तल॥ एक समय की बात है. एक सियार किसी हादसे में घायल हो गया. कई दिन तक वह अपनी खोह में पड़ा रहा..जब ठीक हो कर बाहर आया तो काफी कमजोर हो चुका था. ऊपर से भूखा.. किसी मृत जानवर की तलाश में चलते चलते वो एक बस्ती में आ गया..जहां कुत्तों ने उसे...

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भाषा फ़ाँसी पर नहीं चढ़ती, चढ़ते हैं आप..

-अजित वडनेरकर॥ हिन्दी से खाने, कमाने और नाम हासिल करने वाले गाहे-ब-गाहे हिन्दी को बदनाम क्यों करते हैं ? मंगलेश डबराल को हिन्दी वाला होने पर शर्म आती थी। कृष्ण कल्पित जी ने कुछ दिन पहले अशोक वाजपेयी के प्रति दुर्वचनों का मुज़ाहिरा करते हुए हिन्दी को लुटी – पिटी भाषा कह डाला। ये कैसा...

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आपके आये या नहीं, रेपिस्टों के अच्छे दिन आ गए..

-विष्णु नागर।। लगता है कि उत्तर प्रदेश सरकार और भाजपा यह सिद्ध करने पर आमादा है कि 19 साल की हाथरस की दलित लड़की के साथ बलात्कार नहीं हुआ था और वे लड़के जिन पर ऐसा आरोप है,वे निर्दोष हैं या कम से कम बलात्कार के दोषी नहीं हैं।दोषियों की जाति के लोगों ने शुरू...

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एचआर तोताराम के चलते टाईम्स समूह का प्रस्ताव ठुकरा दिया..

-ओम थानवी।। 1984 की बात है। राजेंद्र माथुर नवभारत टाइम्स का संस्करण शुरू करने के इरादे से जयपुर आए। पहली, महज़ परिचय वाली, मुलाक़ात में कहा: “जानता हूँ आप इतवारी का काम देखते हैं। “फिर अगले ही वाक्य में, “और अच्छा देखते हैं”। कुछ रोज़ बाद में उन्होंने मुझे नवभारत टाइम्स में आने को कहा।...

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कोविड पश्चात दुनिया और बहुजन कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी

-प्रमोद रंजन।।कहा जा रहा है कि अगर नए कोरोना वायरस के संक्रमण को कड़े लॉकडाउन के सहारे रोका नहीं गया होता तो मानव-आबादी का एक बड़ा हिस्सा इसकी भेंट चढ़ जाता। लेकिन क्या सच उतना एकांगी है, जितना बताया जा रहा है? लॉकडाउन के कारण दुनिया भर में लाखों लोग मारे जा चुके हैं और...