कोविड पश्चात दुनिया और बहुजन कार्यकर्ताओं की ज़िम्मेदारी

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-प्रमोद रंजन।।कहा जा रहा है कि अगर नए कोरोना वायरस के संक्रमण को कड़े लॉकडाउन के सहारे रोका नहीं गया होता तो मानव-आबादी का एक बड़ा हिस्सा इसकी भेंट चढ़ जाता। लेकिन क्या सच उतना एकांगी है, जितना बताया जा रहा है? लॉकडाउन के कारण दुनिया भर में लाखों लोग […]

बिना विरोध के कैसा लोकतंत्र

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विपक्ष के भारी विरोध और सहयोगी दल की नाराजगी के बावजूद केंद्र सरकार कृषि विधेयकों को संसद में पारित करवाने में सफल हो गई। कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 इन तीनों को […]

बेकाबू कोरोना के बीच छत्तीसगढ़ एक बार फिर लॉकडाऊन की ओर बढ़ा..

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यह यह कहीं नासमझी भरा न हो… -सुनील कुमारछत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में रोजाना सैकड़ों कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं, और राजधानी रायपुर तो हर दिन पांच सौ से अधिक का आंकड़ा पेश कर रही है। ऐसे में अब तक रायपुर और उससे लगे हुए औद्योगिक जिले दुर्ग में लॉकडाऊन […]

किसी भी किस्म की भीड़ की नौबत तुरंत टाले सरकार…

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-सुनील कुमार केन्द्र सरकार के निर्देश पर देश भर में जगह-जगह विश्वविद्यालय अपने इम्तिहान की तैयारी कर रहे हैं। उसका एक नमूना कल छत्तीसगढ़ में देखने मिला जब यहां कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को उत्तरपुस्तिकाएं लेने के लिए बुलाया गया, और वहां पर उनकी ऐसी भीड़ टूट पड़ी, उनकी ऐसी भयानक […]

परेशाँ देश सारा है, भक्तों अब तो जग जाओ..

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-विष्णु नागर।। भक्तो आँखें खोलने का समय आ गया है। दैनिक भास्कर कोई क्रांतिकारी,मोदीविरोधी अखबार नहीं है। उसने हिम्मत करके इस सरकार की जबर्दस्त पोल खोली है। जनता से, प्रेस से, संसद से छुपाकर ऐसा पीम केयर्स फंड बनाया गया है,जिसमें कितना पैसा आया,कितना ,किस तरह सचमुच खर्च हुआ,यह एक […]

दाखिला-परीक्षाओं के तनाव में आत्महत्याएं, और दूसरी संभावनाएं..

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-सुनील कुमार।।हिन्दुस्तान में मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा एनईईटी (नीट) के ठीक एक दिन पहले तमिलनाडू में तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली। इनका इम्तिहान अभी होना ही था, उसके पहले आत्महत्या से कुछ अलग-अलग सवाल उठते हैं। एक तो राष्ट्रीय स्तर […]

अपने परिवार के बाकी लोगों को जिंदा रहने दें..

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-सुनील कुमार||लॉकडाऊन का दौर खत्म होने के बाद अब करीब पूरे ही देश में जिंदगी को वापिस शुरू करने की हड़बड़ी शुरू हो गई है ताकि जिंदा रहा जा सके। देश-प्रदेश की सरकारें ऐसी हों जो लोगों की तकरीबन तमाम जरूरतों को पूरा कर सके, तब तो आम जनता बाराती […]

कोरोना-टीका जब आए, तब आए, लेकिन लगाने की योजना बन जाए…

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-सुनील कुमार|| पिछले कुछ महीनों से दुनिया में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण चल रहा था, और एक ब्रिटिश वालंटियर के बीमार पडऩे से यह रोक दिया गया है। इस वैक्सीन का परीक्षण हिन्दुस्तान के भी कई अस्पतालों में चल रहा था। इस बारे […]

आरोग्य सेतु ऐप से किसे फायदा मिला

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आत्ममुग्धता, चापलूसी और झूठ की कोई हद नहीं हो सकती, यह मौजूदा केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं के बयानों से साबित होता है। दुनिया देख रही है कि कैसे जनवरी से चेतावनी मिलने के बावजूद सरकार ने कोरोना को लेकर लापरवाही बरती, जिसका नतीजा आज ये है कि अमेरिका के […]

कोरोना: ये कहाँ आ गए हम.?

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फ्रांस ने द्वितीय विश्वयुद्ध केबाद बनी, और बंद पड़ीयोजना-संस्था फिर जिंदा की और हमने.? -सुनील कुमार।।फ्रांस की सरकार ने अपने देश के इतिहास से पौन सदी पहले का एक पन्ना निकाला है, और कोरोना-महामारी से देश पर पड़े फर्क, अर्थव्यवस्था की बर्बादी से उबरने की तैयारी शुरू की है। जब […]

ज़िंदा रहने के लिए क्या आवश्यक है? साँस , पानी, भोजन या डर ?

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-राजेन्द्र राज।।साँस-हम नाक और मुँह ढक लें तो क्या हम अपने शरीर को पर्याप्त ऑक्सिजन लेने दे रहे हैं? हवा में तैर रहे विषाणु व कीटाणु से बचाव करने के उपाय में क्या हमने ऑक्सिजन को लेने पर रोक लगा दी है? क्या हम अपने फेफड़ों से निकली साँस को […]

सरकार, कारोबार, और समाज को अपने तरीके बदलने होंगे ताकि…

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-सुनील कुमार।।रेलगाडिय़ों और रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाले या बीड़ी-सिगरेट पीने वाले अब जुर्माना देकर बरी हो सकेंगे। अब तक उन्हें जेल की कैद सुनाने का कानून लागू है इसे बदलने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय ने केन्द्र सरकार को भेजा है। जिन लोगों ने हिन्दुस्तानी ट्रेनों में सफर किया […]

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