नेता ‘‘निर्लज बयानवीर’’ या ‘‘जनता बेशर्म’’?

देश की सत्तारूढ़ पार्टी कांग्रेस के हरियाणा के नेता श्री धरमवीर गोयत का आया यह बयान कि ‘‘अधिकतर रेप आपसी सहमति से होते हैं’’ उनका मानना है कि‘‘ रेप के 90 फीसदी मामले आपसी सहमति से किए जाने वाले सेक्स के चलते सामने आते हैं, और यह कहने में मुझे […]

क्या अरविंद केजरीवाल ‘‘आम’’ आदमी है?

‘‘मैं आम आदमी हूं’’ के जयघोष एवं ‘टोपी’ के साथ अरविंद केजरीवाल ने नई पार्टी बनाने की घोषणा बिना ‘‘विश्वास’’ (कुमार) के कर दी. जब घोषणा के समय ही विश्वसनीय साथी रहे का विश्वास अरविंद अर्जित नहीं कर पाये जो शायद ‘‘आम’’ आदमी अरविंद केजरीवाल की नजर में नहीं थे […]

ओंकारेश्वर बांध पर जल समाधी आंदोलन की ऐतिहासिक सफलता….

विगत 17 दिन से चला आ रहा मात्र ओंकारेश्वर बांध पर घोघल गांव के मात्र 51 ग्राम निवासियों की जल समाधी हर तरह से एक ऐतिहासिक छाप छोड़ गया। इंदिरा सागर डेम को 260 मीटर के ऊपर पानी भरने से डूब क्षेत्र में आये 29 गांव हैं जहां के खेत, […]

माननीय जस्टिस कापड़िया का कथन बिल्कुल सही, भले ही देरी से!

उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एच.एम. कापड़िया का यह कथन कि ‘‘जजों को देश नहीं चलाना चाहिए न ही उन्हे नीति बनानी चाहिए’’ बल्कि वे मात्र फैसला दे, भारत की न्यायपालिका के इतिहास में एक मील का पत्थर अवश्य सिद्ध होगा। पिछले कुछ समय से माननीय उच्चतम न्यायालय के […]

भ्रष्टाचार जनलोकपाल कानून से नहीं, दोहरे चरित्र को समाप्त करने से होगा!

अन्ना का ‘जनलोकपाल बिल’ को कानून बनाने के लिए चल रहेआंदोलन के दौरान ही जनता के बीच यह साफ हो चुका था कि मात्र जनलोकपाल कानून बनने से भ्रष्टाचार की समस्या का न तो निवारण होगा और न ही उस पर प्रभावी अंकुश लग पायेगा। समस्या कानून की न होने […]

अन्ना के आंदोलन का बहीखाताः क्या पाया! क्या खोया!

-राजीव खंडेलवाल|| जनता के सामने राजनैतिक विकल्प प्रस्तुत करने के इरादे के साथ अन्ना द्वारा सांय 5 बजे से अनशन समाप्ति की घोषणा पर मीडिया में यह सुर्खिया कि एक बड़े जन आंदोलन की मौत/ हत्या, हो गई छायी रही। वास्तव में उक्त आंदोलन के समाप्त होने के प्रभाव एवं […]

आखिर न्यूज चैनल्स कब देश के प्रति कुछ जिम्मेदारी समझेंगे?

देश के सात राज्य ‘नार्थन ग्रिड’ के फेल हो जाने के कारण बिजली गुल हो जाने से अंधेरे में डूब गये, सरकार भी ‘अंधेरे’ में हैं। देश का मीडिया इन दोनो अंधेरे से जनता को उजाले में लाने का कुछ कार्य कर सकता था। वह भी राष्ट्र के प्रति अपने […]

15 संसद सदस्यों 49 विधायको के अयोग्य मत लोकतंत्र पर कलंक!

-राजीव खंडेलवाल|| अभी हाल ही में सम्पन्न हुए 13 वे राष्ट्रपति चुनाव में प्रणव मुखर्जी आशा के अनुरूप ही नहीं बल्कि उससे भी अधिक वोट प्राप्त कर जीतने में सफल हुए। उनके प्रतिद्वद्वी पी.ए. संगमा जो अपनी जीत हेतु किसी चमत्कार की उम्मीद रख रहे थे, वह नहीं हो पाया। […]

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