हरियाणा में आजीवन उपलब्धि, राज्यस्तरीय और जिला स्तरीय पुरस्कारों की जल्द होगी घोषणा

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जयश्री राठौड़
चंडीगढ़, हरियाणा सरकार वर्ष २०१० और २०११ के लिए पत्रकारों को सम्मानित करेगी। हरियाणा मीडिया सैंटर में साप्ताहिक बैठक के बाद अतिरिक्त प्रधान सचिव केके खंडेलवाल और सूचना विभाग के महानिदेशक आनंद मोहन शरण ने यह जानकारी दी। राज्य और जिला स्तरीय पुरस्कारों के लिए कुल ८११ प्रविष्ठिïयां प्राप्त हुई हैं। वर्ष २०१० और २०११ के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों हेतु क्रमश: १०१ और १४३ प्रविष्ठिïयां प्राप्त हुई हैं। जिला स्तरीय पुरस्कारों के लिए वर्ष २०१० हेतु २०३ प्रविष्ठिïयां तथा वर्ष २०११ के लिए ३६४ प्रविष्ठिïयां प्राप्त हुई हैं।
जिन श्रेणियों के तहत पुरस्कार दिये जाने हैं, उनमें आजीवन उपलब्धि पुरस्कार, दो राज्य स्तरीय स्मरणीय पुरस्कार, १३ राज्य स्तरीय पुरस्कार तथा १४७ जिला स्तरीय पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कारों के विषयों में विकास, सामुदायिक सदभावना, खोजी पत्रकारिता, प्रदेश की राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों का विश्लेषण। लोकहित के मामलों और प्रदेश का विकास दर्शाते प्रभावी फोटोग्राफ् शामिल हैं।
आजीवन उपलब्धि पुरस्कार के लिए १,५१ लाख रुपये की नकद राशि एक प्रशस्ति पत्र और शॉल, दो स्मरणीय पुरस्कारों में प्रत्येक के लिए एक-एक लाख रुपये की नकद राशि के साथ एक प्रशस्ति पत्र और शॉल शामिल है।  १३ राज्य स्तरीय पुरस्कारों में प्रत्येक के लिए ५१-५१ हजार रुपये की राशि और एक प्रशस्ति पत्र और शॉल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, १४७ जिला स्तरीय पुरस्कारों, जो प्रत्येक जिले के लिए सात हैं, में प्रत्येक के लिए २१-२१ हजार रुपये की नकद राशि और एक प्रशस्ति पत्र और शॉल दिया जाता है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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