अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान द्वारा मुझ पर दबाव बनाने क़ी कोशिश- अर्चना यादव

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एक अकेली लड़की के पीछे पड़े दो हवस के भूखे शातिर पत्रकारों की दाल नहीं गली क्योंकि इस लड़की ने इन दोनों की रोज रोज की छेड़खानी से तंग आकर इनकी चप्पलों से मरम्मत कर दी और साथ ही इनके खिलाफ पुलिस में मुकद्दमा ही नहीं करवाया बल्कि इनके खिलाफ मीडिया में भी चली गई. इनमें से एक पत्रकार अनिल त्रिपाठी तो अपनी फेसबुक वाल पर सेक्स की दुकान ही लगाये बैठे थे. जब हमने उनकी फेसबुक वाल का स्क्रीन शॉट लेकर मीडिया दरबार पर लगा दिया तो इन साहब ने घंटों खर्च कर अपनी फेसबुक वाल से यौन सामग्री को हटा कर साफ सुथरा बनाया. मामला पुलिस में दर्ज होने के बाद भी इन लोगों ने पीड़ित युवती अर्चना यादव से बजाय माफ़ी मांगने के उल्टा उसे दबा धमका कर मामला रफा दफा करना चाहा मगर उन्हें सफलता नहीं मिली और अब इन दोनों शातिर पत्रकारों ने अर्चना यादव को डराने की गरज से अपनी एक वकील के जरिये कानूनी नोटिस थमा दिया. अर्चना यादव के अनुसार इन नोटिस में लगाये गए आरोप तथ्यहीन हैं…..

 

अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान द्वारा विगत कई दिनों से उनके द्वारा की गयी छेड़खानी का विरोध एवं दर्ज मुकदमा वापस लेने हेतु अनेक प्रकार से मेरे ऊपर मानसिक दवाब बनाया जा रहा था. जब मेरे द्वारा मुकदमा वापस नहीं लिया गया तो आज दिनांक 30 जुलाई 2012 को मेरे निवास पर किसी रेहान मुबस्सिर advocate से मुझे नोटिस भिजवाया जिसमें किन्ही आसिफ राजा जाफिरी , विजय शर्मा , सचिदानंद गुप्ता उर्फ़ सच्चे व् हिसामुल सिद्दीकी पर ये आरोप लगाया है उन्होंने मुझे एक मोटी रकम दी है .

मै आप सब को यह बताना चाहती हूँ कि मैं इनमें से किसी व्यक्ति को न जानती हूँ न ही मेरी कभी मुलाक़ात हुयी . मैं आप सब के माध्यम से यह जानना चाहती हूँ क्या कोई लड़की किसी के कहने या पैसे के लालच में, जिसके सामने उसका पूरा भविष्य पड़ा हो वो इस तरह का आरोप लगा सकती है ???

सतीश प्रधान और अनिल त्रिपाठी द्वारा जो विगत कई माह से मेरा मानसिक शोषण किया जा रहा था एवं छीटाकशी से बात बढ़ कर अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान द्वारा मुझे हाथ लगा कर जिस तरह का व्यवहार किया गया जिसका साक्ष्य समस्त विकास दीप में कार्यरत लोगों से लिया जा सकता है . अतः ऐसे में सतीश प्रधान और अनिल त्रिपाठी द्वारा किन्ही आसिफ राजा जाफिरी , विजय शर्मा , सचिदानंद गुप्ता उर्फ़ सच्चे व हिसामुल सिद्दीकी पर क्यों आरोप लगाया जा रहा है ? और अपना कौन सा व्यक्तिगत लाभ देखा जा रहा है ???

अतः आप सभी से मेरा विनम्र निवेदन है कि मेरा किन्ही आसिफ राजा जाफिरी , विजय शर्मा , सचिदानंद गुप्ता उर्फ़ सच्चे व हिसामुल सिद्दीकी से कोई वास्ता नहीं है और यदि अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान से इनकी कोई रंजिश है तो अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान ने मेरे साथ अश्लीलता का व्यवहार क्यों किया और मेरे आवाज़ उठाने पर आसिफ राजा जाफिरी , विजय शर्मा , सचिदानंद गुप्ता
उर्फ़ सच्चे व हिसामुल सिद्दीकी पर क्यों ऊँगली उठा रहे है ????

सतीश प्रधान और अनिल त्रिपाठी ने मेरे ऊपर आरोप लगाया है कि मैंने ७०० पत्रकारों को इ-मेल भेजा अतः मुझ पर धारा 500/501/211/120B IPC में कार्यवाही की जायेगी . मैं स्वयं पत्रकार हूँ और मेरे द्वारा अपने ही पत्रकार परिवार के लोगो को इ-मेल भेजा गया और जिस सतीश प्रधान द्वारा मुझ पर इ-मेल भेजने पर कार्यवाही करने कि बात कही है उसी सतीश प्रधानं ने कुछ दिन पूर्व ही ऐसे अनेक इ-मेल भेजे है जिसमें पत्रकारों की आय कि जांच इत्यादी मेल भेजे है .

(अर्चना यादव)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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3 thoughts on “अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान द्वारा मुझ पर दबाव बनाने क़ी कोशिश- अर्चना यादव

  1. मिस अर्चना यादव अप कोअ डरने की जरुरत नहिय है सत्य की जिअत होतीय है . असत्य का नास होता है . हम सब अप के साथ है एंड मिडिया अब के साथ है असमान कोअ कीचड़ गन्दा नहिय कर सकता जय हिंद जय भारत

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