प्रो. निशीथ राय के घर पर यू पी पुलिस के तांडव से मीडिया जगत में क्षोभ व आक्रोश

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स्व. प्रो. रामकमल राय व डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट के चेयरमैन प्रो. निशीथ राय के इलाहाबाद स्थित पैतृक आवास में हुई पुलिसिया कार्रवाई से मीडिया जगत में काफी क्षोभ व आक्रोश है। मीडिया जगत ने इस घटना की कड़ी भर्त्‍सना की है। इस घटना को लेकर विभन्न पत्रकार संगठनों ने जगह-जगह धरना प्रदर्शन भी किया।

इस संबंध में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, इंडिया की बिहार इकाई की हुई आपातकालीन बैठक में हिन्दी दैनिक डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट के चेयरमैन के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर यूपी पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई की तीखी आलोचना की गई। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष आर के विभाकर और संगठन मंत्री प्रमोद दत्त ने यूपी सरकार की कार्रवाई की निन्दा करते हुए इसे मीडिया की स्वतंत्रता का हनन करार दिया। यूनियन ने महामहिम राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेज कर यूपी में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। यूनियन का मानना है कि पुलिसिया कार्रवाई से न केवल मीडिया को भयभीत किया गया है बल्कि मानवाधिकार का उल्लंघन भी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट को अविलम्ब इस घटना को संज्ञान में लेकर यूपी सरकार के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

वहीं ‘जनजागरण मीडिया मंच’ के महासचिव रिजवान चंचल ने डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट के चेयरमैन प्रोफेसर निशीथ राय व प्रख्यात साहित्यकार स्व. प्रो. रामकमल राय के इलाहाबाद स्थित आवास पर अकारण पुलिस द्वारा किए गए नग्न तांडव व अभद्रता की कटु आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकारें आती जाती रहती हैं किन्तु नियम व कानून को ताक पर रखकर तांडव करने वाले पुलिसकर्मियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि आने वाला कल कानून का उल्लंघन करने वालों पर दुखतर भी साबित हो सकता है। चंचल ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को जनता से मित्रवत व्यवहार करने की कौन कहे, वह तो अब पत्रकारों व साहित्यकारों पर ही हमलावर हो नंगा नाच करने पर आमादा है। ‘डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट’  के चेयरमैन और विख्यात साहित्यकार स्व. प्रो. रामकमल राय के आवास का ताला तोडक़र बीती रात पुलिस ने जो नग्न तांडव किया उससे पुलिस का वीभत्स चेहरा उजागर हो गया है। श्री चंचल ने कहा कि पत्रकार और साहित्यकार हमेशा अपनी लेखनी से समाज में व्याप्त विसंगतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहें हैं, किन्तु दुर्भाग्य है कि आज उप्र में सच बयानी एवं कलम के जरिए आमजनों के समक्ष वास्तविकता को बिना भेदभाव के प्रस्तुत कर पत्रकारिता के मूल धर्म का निर्वाहन करने वाले लोगों पर ही पुलिसिया कहर जारी है।

‘जनजागरण मीडिया मंच’  के महासचिव रिजवान चंचल ने सभी साथी पत्रकारों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि अब नियम व कानून की धज्जियां उड़ाने वालों के खिलाफ कलम की धार को और पैना करने की जरूरत है क्योंकि औद्योगिक और सामाजिक विकास के साथ ही समाज में जनसामान्य की समस्याओं को उजागर करने में पत्रकारिता की भूमिका का हमेशा विशेष महत्व रहा है। आज उसी पर लगाम लगाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में एकजुटता आवश्यक है। लोकतंत्र में ऐसे आचरण की जगह नहीं होनी चाहिए। साहित्यकार व पत्रकार हरिपाल सिंह ने उक्त घटना की निंदा करते हुए कहा कि लगातार हो रही इस तरह की घटनाओं से साफ है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अब सरकार पुलिस की लाठी से कुचलवा रही है। नियम-कानूनों का हवाला देकर, खुद नियमों की धज्जियां उड़ाने में माहिर पुलिस ने आधी रात को स्व. प्रो. राय की बीमार वृद्धा पत्नी के साथ भी बदसलूकी की। बिना सर्च वारंट और महिला पुलिस के आवास का ताला तोड़ अन्दर घुसकर पुलिस ने घंटों मनमानी की। इसके पहले भी ‘डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट’  के चेयरमैन प्रो. निशीथ राय की अनुपस्थिति में उनके लखनऊ राजभवन स्थित आवास से पुलिस ने पूरा सामान बाहर फेंक दिया था और अब इलाहाबाद स्थित उनके पैतृक आवास को निशाना बनाया गया। जाहिर है कि सरकार अपने खिलाफ कुछ भी सुनना नहीं चाहती। सरकार की इस प्रवृत्ति की सभी को निंदा करनी चाहिए।

मायावती सरकार और उनकी पुलिस संभ्रांत लोगों को प्रताडि़त कर रही है। इलाहाबाद में पुलिस जिन अपराधियों की खोज में साहित्यकार स्व. प्रो. रामकमल राय और डीएनए के चेयरमैन प्रो.निशीथ राय के घर में घुसी वे सारे सरकार के प्रभावशाली मंत्रियों के यहां संरक्षण पाए हुए हैं। माया सरकार की पुलिस ने जो आचरण किया वह भर्त्‍सना योग्य है। पुलिस ने बिना सर्च वारंट और महिला पुलिस के श्री राय के घर में जाकर जो तांडव किया वह निंदनीय है। – शिवपाल सिंह यादव, नेता प्रतिपक्ष उत्तर प्रदेश

डीएनए के चेयरमैन प्रो.निशीथ राय के आवास पर सरकार के इशारे पर पुलिस जिस वहशियाना तरीके से पेश आई है उससे साफ है कि मायावती सरकार विपक्ष हो या मीडिया अपने विरोध में किसी से कुछ नहीं सुनना चाहती है। प्रदेश में यह ऐसी पहली सरकार है जिसमें सच लिखने और बोलने की सजा दी जा रही है। सरकार के  इशारे पर पत्रकारों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। – रामनरेश यादव, पूर्व मुख्यमंत्री यूपी

लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार स्व. प्रो. रामकमल राय और डीएनए के चेयरमैन प्रो.निशीथ राय के इलाहाबाद स्थित आवास पर हुई पुलिसिया कार्रवाई निंदनीय है। सरकार अपने खिलाफ कुछ सुनना नहीं चाहती। वह विपक्ष के साथ लोकतंत्र के प्रहरी मीडिया को भी कुचलना चाहती है। विरोधी दलों पर सरकार के इशारे पर पुलिस का दमनचक्र चल ही रहा है। यही आचरण वह मीडिया के लोगों के साथ कर रही है। उसके ऐसे कृत्य की की कड़ी भर्त्‍सना होनी चाहिए। – सूर्यप्रताप शाही, अध्यक्ष यूपी भाजपा

पुलिसिया कार्रवाई से साफ है कि मायावती सरकार का इकबाल खत्म हो चुका है। सरकार चलाचली की बेला है। डीएनए के चेयरमैन के आवास पर पुलिसया कार्रवाई से साफ हो गया है कि सरकार विपक्ष और मीडिया का दमन करके लोकतंत्रात्रिक अधिकारों का हनन कर रही है। – मो. आजम खां, राष्‍ट्रीय महासचिव सपा

यह प्रजा तंत्र पर सीधा हमला है। सरकार लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ मीडिया को कुचलना चाहती है। सरकार की खामियों को उजागर करने वाले निर्भीक डीएनए अखबार पर हमला करने और डराने की सरकारी कार्रवाई की जितनी भर्त्‍सना की जाए उतनी कम है। – पीएल पुनिया, अध्यक्ष राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

पुलिस का यह कृत्य उत्तर प्रदेश के सम्पूर्ण प्रशासनिक ढांचे के चरमरा जाने का संकेत है। यह खेद का विषय है कि प्रदेश का शासन पुलिस तंत्र को अपने राजनीतिज्ञ विरोधियों के दमन के लिए इस्तेमाल कर रहा है। स्वर्गीय प्रो. रामकमल राय, प्रयाग नगरी के उज्ज्‍वल साहित्यक इतिहास की वह कड़ी थे जिसमें बड़े गर्व से महादेवी वर्मा, फिराक गोरखपुरी और डॉ. हरिवंश राय बच्चन का नाम लिया जाता है। स्वर्गीय प्रो. रामकमल राय ने हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। प्रजातंत्र में साहित्यकार और पत्रकार को अपने विचारों की अभिव्यक्त की पूर्ण स्वतंत्रता होती है और विरोध का अधिकार ही प्रजातंत्र का आधार है। ऐसी स्थिति में प्रदेश सरकार को स्वर्गीय प्रो. रामकमल राय की विधवा से माफी मांगनी चाहिए। – एसएमए काजमी, पूर्व महा अधिवक्ता यूपी

देर रात की यह कार्रवाई एक निरीह महिला को दहशतजदा करने की कोशिश है। यह इलाहाबाद जिला प्रशासन की जघन्य हरकत है। एक निरीह विधवा के घर आधी रात को घुसकर ऐसा व्यवहार करना बर्बर और वहशी बात है। मुख्यमंत्री मायावती को खुद एक महिला होने के नाते ऐसा व्यवहार करने वालों को तत्काल सेवा से निलंबित कर उन्हें दंडित करना चाहिए। स्व. प्रो. रामकमल राय मेरे साथी और सहयोगी थे। हम दोनों डॉ. राममनोहर लोहिया के आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे थे। हिंदी साहित्य की प्रो. राय ने काफी सेवा की है। इलाहाबाद के हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया था। – के. विक्रम राव, वरिष्‍ठ पत्रकार

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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