अंबेडकर पार्क में मायावती का सर धड़ से अलग…

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कुमार सौवीर||
लखनऊ में मायावती के स्वप्नों के संसार अम्बेडकर पार्क में तमाशा खड़ा हो गया है। मनबढ़ शैतानों ने मायावती की सफेद संगमरमरी मूरत का सिर और हाथ उखाड़ डाला। बाद में मौके पर पहुंचे प्रशासन-पुलिसवालों ने आननफानन में सिरविहीन मूर्ति को प्रशासन ने ठीक उसी रंग का कफन मुहैया करा दिया, जो उनका मनपसंद यानी नीला है। अम्बेडकर पार्क से जुड़ी सड़कों को बंद कर दिया गया है और मौके पर कड़ी सुरक्षा बंदोबस्त हैं। फिलहाल बसपाइयों में जबर्दस्त रोष है और कई शहरों में प्रदर्शन की खबर आ रही है। प्रशासन का दावा है कि किसी हालात से निपटने के लिए प्रशासन और पुलिस ने कमर कस ली है। लेकिन इस घटना ने प्रशासन और पुलिस की तो किरकिरी करा ही दी है। लेकिन कठघरे में पुलिस, प्रशासन के साथ ही पत्रकार बिरादरी भी आ गयी है।
बसपा सरकार को ढहाने के बाद नयी बनी समाजवादी पार्टी सरकार के ठीक बाद मेरठ के कथित प्रदेश नवनिर्माण सेना नामक एक संगठन के मुखिया अमित जानी ने 15 मार्च को ही ऐलान कर दिया था कि अगर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार प्रदेश भर में स्थापित मायावती की मूर्तियों को हटाने का फैसला नहीं करती है, तो इन मूर्तियों को उनका संगठन खुद ढहा देगा। आज गुरूवार को अमित जानी ने अपने साथियों के साथ प्रेसक्लब में बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके ऐलान किया कि प्रदेश सरकार इन मूर्तियों को 12 घंटों के भीतर ध्वस्त  कर दे। अमित ने धमकी दी थी कि यह मियाद खत्म  होने पर उनका संगठन खुद ही इन मूर्तियों को हटा देगा। बताते हैं कि इस प्रेस क्रांफेंस में कथित पत्रकारों ने इस बयान का खुलेआम मजाक उड़ाया था कि ऐसी धमकियां केवल मीडिया में अपना नाम छपाने के  लिए ही होती हैं। खबरनवीस बताते है कि इस पर अमित जानी ने तैश में कहा था कि हम तो अभी ही यह काम कर सकते हैं। पत्रकारों ने जब उसे फिर घेरा तो अमित ने अपने साथियों को तैयार करते हुए कहा कि रूकिये, हम यह काम फौरन इसी वक्त खत्म किये देते हैं।
लेकिन हैरत की बात है कि न तो इन पत्रकारों को इस धमकी कोई नोटिस ली, और ना ही स्थानीय और प्रदेश स्तर पर बने सरकारी इंटेलीजेंस विभाग ने। लेकिन बताते हैं कि इसके बाद तीन मोटरसायकिल पर बैठ कर अमित जानी और उसके साथी सीधे परिवर्तन स्थल के सटे अम्बेडकर पार्क पर पहुंचे और सीधे मायावती की मूर्ति पर हथौड़ों से मायावती की मूर्ति  का अंग-भंग कर दिया। घटना के समय हमेशा की तरह विशेष स्मारक सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में मौजूद थे। लेकिन इन युवकों ने पांच मिनट के भीतर ही मूर्ति को तोड़ दे दिया। इतना ही नहीं, घटनास्थल पर यूपी नवनिर्माण सेना नाम के एक अनजान संगठन द्वारा छपाये गये पर्चे भी मिले हैं, जिसमें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मायावती की सभी मूर्तियों को हटाने की मांग की गयी है। मूर्ति को तोड़ने के बाद उपद्रवियों ने लाल टोपियां पहनी थीं।
जैसा कि होना ही था, बसपा आक्रोश में है। बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने मायावती की मूर्ति पर हमले की निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि यह करतूत समाजवादी पार्टी की साजिश के चलते हुई है और अगर आज ही मूर्ति को ठीक नहीं किया गया, तो इसका गंभीर परिणाम होगा। कई शहरों में विवाद खड़ा हो गया है और देर शाम विधानसभा के सामने बसपा के बड़े नेताओं ने भारी तादात में बसपाइयों के साथ प्रदर्शन किया है। हालांकि समाजवादी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस ने इस घटना की निंदा की है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बयान में सुश्री मायावती की मूर्ति तोड़ने की निन्दा करते हुए कहा है कि ऐसी करतूतों से प्रदेश में सौहार्दपूर्ण माहौल बिगड़ेगा। उन्हों ने इस कांड को सुनियोजित प्रयास बताया है। अखिलेश यादव ने आदेश दिया है कि इस कांड में शामिल अभियुक्तों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के साथ ही साथ टूटी मूर्तियों को तुरन्त ठीक कराया जाए।

 कुमार सौवीर

लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
[email protected]
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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6 thoughts on “अंबेडकर पार्क में मायावती का सर धड़ से अलग…

  1. bahan mayawati ji murti ko tod kar samajwadi party ne yah bataya ki we U.P ko apani jagir samajate hai. jabki mayawati ji waha ki ex c.m. thi, waha ki janata ab pachatap kar rahi hogi ki gunde logo ko U.P. ki bagdor di hai. SP ke logo ko chahiy ki 5 sal tak janata ke liye kam kare na ki kisi mahila ka apaman kare. SP badale ki poltics kar rahi hai.

  2. ak dalit ladies ke bajah se ex.cm mayabati ji ka apman sabhi ko achha laga raha hog lekin jab sabhi amni ma bahan ki murti ya photo ko jab kisi aany ke pairo se kuchlte nahi dekh sakte . kyu?

  3. Mayawati n jo itna paisa moortiyo aadi pr brbaad kiya tha ager kisi public work m kiya jata to kitna accha hota.. Usko jail honi chiye or uski saari proprty govt. K khaate m jani chiye…

  4. जो हुआ , गलत है,
    अखिलेश को तुरंत ही कोई बड़ा कदम उठाना होगा, अन्यथा सपा प्रदेश में ठीक से शासन संभल भी नहीं पायेगी , कि उन्हें बदनाम करने कि साजिश पूरी हो जाएगी , और समाजवादी पार्टी के माथे पे कलंक का टीका लग जायेगा.

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