Home देश अखिलेश यादव जी! क्या हुआ तेरा वादा?

अखिलेश यादव जी! क्या हुआ तेरा वादा?

प्रदेश में अपराधिक तत्वों के हौसले बुलंद,बाराबंकी में अवैध बालू खनन की कवरेज करने गए पत्रकारों पर खनन माफिया के गुर्गो का हमला,कैमरा छीना ……

-शमा अली||


अभी कुछ ही समय पहले की बात है जब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के वक़्त प्रदेश में रथ लेकर निकले अखिलेश यादव से बाराबंकी के सुबेहा इलाके में उस समय के जवलंत मुद्दे डी पी यादव को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या डी पी यादव को समाजवादी पार्टी में शामिल किया जायेगा जिसके जवाब में अखिलेश यादव का जवाब था कि किसी भी कीमत पर डी पी यादव को समाजवादी पार्टी में नहीं लिया जायेगा क्योंकि समाजवादी पार्टी में अपराधियों के लिये कोई जगह नहीं है ! चुनाव प्रचार के दौरान मायावती सरकार की कानून व्यवस्था पर हल्ला बोलने वाले अखिलेश यादव प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर हर अपराधी को कड़ी सजा देने की बात करते थे फिर चाहे वो समाजवादी पार्टी से ही क्यों ना जुड़ा हो !
नौजवान और साफ़ सुथरी छवि के अखिलेश यादव के इन वादों पर उत्तर प्रदेश की जनता ने भरोसा भी दिखाया और जब चुनाव परिणाम आया तो नतीजों ने हर किसी को चौका दिया समाजवादी पार्टी के इतने विधायक जीत कर आये जिसकी कल्पना शायद खुद नेता जी याने मुलायम सिंह यादव जी और अखिलेश यादव ने भी नहीं की होगी ! लेकिन आज उत्तर प्रदेश की वही जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है क्योंकि अपराधियों पर नकेल लगाने का वादा कर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने वाले अखिलेश यादव की सरकार में अपराधियों के हौसले बुलंद है प्रदेश मे जनता तो क्या जनता के दर्द को शासन प्रशासन तक पंहुचा कर उनकी लड़ाई लड़ने वाले मीडियाकर्मी तक सुरक्षित नहीं है जिसकी ताज़ा मिसाल है बाराबंकी जनपद के रामनगर इलाके में अवैध बालू खनन की सूचना पर कवरेज करने गए आधा दर्जन न्यूज़ चैनलों के पत्रकारों पर खनन माफिया के गुर्गो का हमला और उनका कैमरा छीनने की घटना ! वैसे तो पत्रकारिता के क्षेत्र में इस तरह की घटना कोई नई बात नहीं है क्योंकि देश भर में ऐसी कई घटनाये घटित हुई है जिसमे गैरकानूनी धंधो ,अपराधियों व माफियाओ के खिलाफ आवाज़ उठाने और उन्हें बेनकाब करने की कोशिश करने वाले निर्भीक पत्रकारों को इसकी कीमत चुकानी पड़ी है लेकिन बाराबंकी में बालू माफिया के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों के साथ जो घटना घटित हुई है वो इसलिये निन्दनिये है क्योंकि नौ जून दो हज़ार बारह की रात करीब साढ़े नौ बजे हुई इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पुलिस ने पत्रकारों की तहरीर पर बालू माफिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कागजी खानापूर्ती तो कर ली लेकिन पुलिस ने घटना के आरोपी एक दर्जन से ज्यादा लोगो में से किसी को भी गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई उल्टा जनपद में तैनात कुछ भ्रष्ट्र अधिकारी खनन माफिया के साथ मिलकर पीड़ित पत्रकारों के खिलाफ ही साजिश का ताना बाना बुनने में जुट गए जिसके परिणाम स्वरुप खनन माफिया और उसके गुर्गो के हौसले इतने बुलंद है की वो अब पीड़ित पत्रकारों के परिजनों को डराने धमकाने में जुट गए है !
इस पूरे प्रकरण में आश्चर्य की बात तो ये है खनन विभाग स्वयं उत्तर प्रदेश के ईमानदार और साफ़ सुथरी छवि के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी के पास है ऐसे में सवाल ये है की जब मुख्यमंत्री जी अपने खुद के ही विभाग में फैले भ्रष्ट्राचार और माफियावाद पर अंकुश लगाने में विफल साबित हो रहे है तो फिर बाकी विभागों पर उनका कितना बस चलता होगा इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है ! अगर राजधानी से सटे बाराबंकी जनपद में ही कानून व्यवस्था चौपट है तो प्रदेश की कानून व्यवस्था के सरकारी दावे कितने कोरे है इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है और सबसे अहम् सवाल तो ये है की अखिलेश सरकार में अगर आम जनता की आवाज़ उठाने और उनके हक़ की लड़ाई लड़ने वाला लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ ही सुरक्षित नहीं है तो प्रदेश की आम जनता कितनी सुरक्षित है इसका अंदाजा आप स्वयं ही लगा सकते है !

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