क्‍या वाकई लापता हैं डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल के मुखिया

admin
0 0
Read Time:7 Minute, 32 Second

गुरूवार शाम से लापता होने की चर्चाएं भड़कीं, न खाना, न पीना और अब तो सांस भी नहीं ले रहा हाथी…..

-कुमार सौवीर||

नोएडा: खबर है कि यह हाथी न कुछ खा-पी रहा है, न चल रहा है और न अपनी सूंड़ हिला रहा है। और तो और, यह तो अब सांस भी रोकने के व्‍यायाम पर जुट गया लगता है। अफवाहों का बाजार बेहद गरम है, लेकिन इस हाथी की इस हालत पर टिप्‍पणी पर कोई जिम्‍मेदार व्‍यक्ति बोलने पर भी तैयार नहीं है। तो, लब-ओ-लुआब यह कि डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल समूह के मुखिया फिलहाल लापता हैं। बीते गुरूवार की दोपहर से मुखिया का कोई अताप‍ता नहीं मिल पा रहा है। इस समाचार संस्‍थान के इस मुखिया के गायब हो जाने के चलते माहौल हंगामे की तरह हो गया है।

बताते हैं कि अपनी दिनचर्या के मुताबिक मुखिया जी गुरूवार को ठीक सुबह दस बजे ऑफिस पहुंचे थे। पिछले एक साल से संस्‍थान के हालात बिगड़ने के समय से लगातार और सघन बैठकों के दौर चल ही रहे थे, उस दिन भी यही हुआ। लेकिन अचानक ही दोपहर मुखिया जी के कार्यालय में सरकारी अधिकारियों का एक दल पहुंचा। करीब तीन घंटों तक पूछताछ का दौर चला। इसके बाद उन्‍हीं अफसरों में से एक के साथ मुखिया जी अपने छोटे बेटे के साथ अपनी सफेद मार्सिडीज से रवाना हुए, जबकि उनके बड़े बेटे उन अधिकारियों के उसी कार के पीछे पीछे रवाना हुए। इसके बाद से ही मुखिया लापता बताये जाते हैं। जबकि छोटे बेटे के बारे में सूचना मिली थी कि वे अस्‍पताल में भर्ती हो गये हैं, लेकिन अब तक इसकी पुष्टि भी नहीं की जा सकी है। जबकि मुखिया और उनके बड़े पुत्र अभी तक लापता बताये जाते हैं।

डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल समूह के उच्‍चपदस्‍थ सूत्रों का दावा है कि गुरूवार की दोपहर मुखिया से जो अफसरों का दल उनके दफ्तर पर पहुंचा था, वह सीबीआई की टोली थी। यह टोली पिछले साल के दौरान ईडी समेत कई सरकारी एजेंसियों के अफसरों की थी। आयकर और ईडी पहले से ही आयकर चोरी और अवैधानिक धन-निवेश के कतिपय अपराधों पर पीके तिवारी और डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल समूह के लोगों की संलिप्‍तता की जांच कर रहा था। पिछले दिनों इन जांच विभागों ने इस समूह में सात सौ करोड़ रूपयों की पता लगाया था। यह रकम करचोरी से जुड़ी है। बताते चलें कि इस समाचार संस्‍थान ने अपने शुरूआत में डेली-प्रॉब्‍लम्‍स नामक कई रीजनल चैनलों का संचालन किया था, लेकिन इसके कई चैनल पूरी तरह बंद पड़े हैं, जबकि बाकी चैनलों की हालत भी बुरी बतायी जाती है।

बहरहाल, सीबीआई के इन कथित अफसरों की टोली ने ऐसे दर्जनों मामलों में डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल परिवार और उसके प्रमुख संचालकों को सीधे तौर पर पहचाना है और गुरूवार की दोहपर हुई इस कार्रवाई इसी के तहत पकड़-धकड़ के तहत हुई है। भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि गुरूवार से ही डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल समूह में अफवाहों का बाजार भड़क गया है। लोगों के मुताबिक मुखिया इन दोनों लगातार कानूनी और आर्थिक आदि संकटों में घिरे जा रहे थे। वैसे भी भारत में वे ज्‍यादातर नोएडा और उसके बाद मुम्‍बई में समय से पहुंचते रहे हैं। ऐसे काढ़े वक्‍त में, जब समूह के कर्मचारियों को विगत अनेक महीनों वेतन भुगतान को लेकर भारी मारामारी का माहौल है, मुखिया का देश से बाहर जाने की आशंका ना होने की बतायी जाती है। फिर अब सवाल यह है कि आखिरकार इतने भारी दबावों के बावजूद मुखिया कहां लापता हो गये हैं।

इस प्रकरण पर चल रही अफवाहों को परवान तब चढने लगा जब समूह के टेक्निकल हेड, उनके सहायक व उनके सहयोगी के अलावा कलेक्‍शन के हेड की बातें और चर्चाएं छन कर बाहर निकलने लगीं। बताते हैं कि कलेक्‍शन के हेड को मुखिया के खासमखास लोगों को सूचना दी कि मुखिया सोमवार को ही अपने सारे दायित्‍वों अपनी पत्‍नी को सौंपने जा रहे हैं। यानी मुखिया डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल समूह से सम्‍बद्ध सभी बैकों में अथारिइज्‍ड सिग्‍नेचरी के तौर पर अपनी पत्‍नी को सौंप देंगे। हैरत की बात है कि पिछले करीब तीन महीनों से ज्‍यादातर कर्मचारियों की तनख्‍वाह नहीं जारी की जा सकी है। इतना ही नहीं, संस्‍थान के रिकरिंग के खाते के भारी-भरकम खर्चों का बकाया कई महीनों से अदा नहीं किया जा चुका है।

भरोसेमंद सूत्र के अनुसार कलेक्‍शन के हेड और टेक्निकल हेड के सहायक ने शुक्रवार को दिल्‍ली की एक अदालत में कई लोगों की जमानत कराने सम्‍बन्‍धी कागजात तैयार करने का निर्देश डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल समूह के वकीलों को दिया है। उम्‍मीद बतायी जाती है कि 23 जुलाई को ऐसे कागजात अदालत पेश किये जा सकते हैं। लेकिन इस कवायद के पीछे कारणों को लेकर भी अफवाहें खूब फैल रही हैं। इस प्रकरण पर बातचीत के लिए  डेली-प्रॉब्‍लम्‍स न्‍यूज चैनल समूह के जितने भी वरिष्‍ठ अधिकारियों से सम्‍पर्क किया, उन्‍होंने फोन ही नहीं उठाया। इसके चलते इस समूह के प्रबंधन का पक्ष नहीं लिया जा सका।

 

 

कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले....

भारत माँ के सच्चे सपूत, क्रांतिकारियों के मसीहा,सच्चे प्रणपालक, स्वतत्रंता को अपना पिता और जेल को अपना घर घोषित करने वाले, शहीद चन्द्रशेखर आजाद जी की 112 वीं जयंती है. आज ही के दिन एक और महान देशभक्त जिसने उद्घोष किया “स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” परम आदरणीय, गरमदल के […]
Facebook
%d bloggers like this: