क्या प्रणब दा भारत के आमजन के राष्ट्रपति बन पाएंगे?

admin 2
0 0
Read Time:3 Minute, 54 Second

-आर एम मित्तल||

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो गया है। प्रणव दा की जीत की ख़ुशी नही और संगमा जी की हार का दुःख भी नही. क्योंकि इस गरिमामय पद का भी राजनीतिकरण कर दिया गया है। आज देश का आम नागरिक भ्रष्टाचार, अव्यवस्था, बेरोजगारी, भूखमरी, गरीबी, आर्थिक मंदी, आतंकवाद, बढती जनसंख्या और प्राकृतिक आपदाएं सूखा और बाढ से पीड़ित है और आक्रोश की भावना व्याप्त है।
क्या ऐसे में देश के प्रथम नागरिक और देश के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति राजनीती से ऊपर उठकर आम आदमी के लिए कुछ कर पाएंगे?
या फिर एक रबड़ स्टम्प बन कर रह जायेंगे।
आज देश चाहता है की महामहिम राजनितिक समीकरण छोड़ देश हित में जल्द ऐसा कुछ करें की आम आदमी को राहत की साँस मिले।  राष्ट्रपति देश के सर्वोचत्म पदाधिकारी है और यह पद देश के विकास का मार्गदर्शक  स्रोत होना चाहिए न की किसी प्रान्त या पार्टी का प्रतीक।
आज देश आजादी के बाद सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है ।
देश बुरी तरह से भ्रष्टाचार, आतंकवाद, महंगाई, नक्सलवाद जैसी गम्भीर समस्याओं से जूझ रहा है।  देश की जनता में आक्रोश और गुस्सा व्याप्त है और वे आन्दोलन की राह पर चलने को तैयार है।  सरकार पूरी तरह से विफल हो रही है।  प्रांतवाद, नक्सलवाद, महंगाई,भूखमरी, सूखे और बाढ, घोटालों से देश की अंदरूनी हालत बिगडती जा रही है। सेना और सरकार में अविश्वास की बात हो रही है। देश का मीडिया बेलगाम हो रहा है।
देश में दलगत राजनीति का बोलबाला है। पड़ोसी देश- हमारे देश को हर तरह से कमजोर करना चाह रहे है।  देश की आर्थिक स्थिति पर सुनयोजित तरीके से हमला किया जा रहा है। अमेरिका $ महंगा कर देश को महंगे हथियार, पट्रोल, दवाई खरीदने पर मजबूर कर रहा है।
देश पर कर्जा एक बार फिर से बढने लगा है। राष्ट्रपति जी को अपने विशेषाधिकारों का प्रयोग  कर देश की बिगडती हालत के सुधार के लिए तुरन्त प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
ऐसे में देश को राष्ट्रपति प्रतीक के रूप में नहीं बल्कि सशक्त राष्ट्रपति चाहिए जो विदेश में  भारत की छवि बदल सके और सरकार को अंदरूनी हालत सही करने के लिए मार्गदर्शन कर सके।
भारत का संविधान जनगणमन की निष्ठा पर आधारित है इसलिए देश का सर्वोच्च पदाधिकारी  किसी प्रान्त या पार्टी से न होकर जनप्रिय होना चाहिए। आने वाला समय बतायेगा की देश का राष्ट्रपति प्रथम राष्ट्रपति महामहिम राजेंद्र प्रसाद या फिर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, और अब्दुल कलाम जिन्होंने राष्ट्रपति पद की गरिमा और अपनी अच्छी छवि को बनाये रखा जैसा योग्य होगा या नही।
आर एम मित्तल,
मोहाली (पंजाब)
मोबाइल:- ९८१५६०८५१४

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

2 thoughts on “क्या प्रणब दा भारत के आमजन के राष्ट्रपति बन पाएंगे?

  1. प्रणब ने अपने फिनांस मंत्री रहने पैर सिर्फ भास्ताचारियों का साथ दिया और भ्र्स्ताचारियों ने उन्हें प्रेसिडेंट पद पैर बैठे का सहयोग दिया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

अब राजस्थान शर्मिंदा..अवैध संबंधों के शक में महिला को निर्वस्त्र किया....

राजस्थान के उदयपुर जिले के सराड़ा क्षेत्र के कोलर गांव में रविवार को जातीय पंचायत का तालिबानी रवैया देखने को मिला है जहाँ संबंधों के शक में एक महिला और पुरुष को चार घंटे तक पेड़ से बांधकर रखा गया। दोनों के बाल काट दिए गए और महिला को सरेआम […]
Facebook
%d bloggers like this: