यौन उत्पीडन के मामलों में होगी उम्रकैद की सजा

admin 1
Page Visited: 88
0 0
Read Time:3 Minute, 28 Second

केन्द्र सरकार ने आपराधिक कानून संशोधन विधेयक, 2012 को संसद में पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत ‘बलात्कार’ शब्द के स्थान पर ‘यौन उत्पीड़न’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि यौन उत्पीड़न अपराध में लिंग भेद से बचा जा सके और इस अपराध का दायरा भी बढ़ाया जा सके.

प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की अध्यक्षता में गुरुवार देर शाम हुई बैठक में इसे मंजूरी दी गई. प्रस्ताव के अनुसार यौन उत्पीड़न के लिए न्यूनतम सात वर्ष की सजा होगी, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है. साथ ही जुर्माने का भी प्रावधन होगा.

यौन उत्पीड़न के अधिक संगीन मामले यानी अपने अधिकार क्षेत्र में किसी पुलिस अधिकारी या लोक सेवक या प्रबंधक या अपने पद का फायदा उठाने वाले किसी भी व्यक्ति के इसमें शामिल होने पर उसे कठोर सजा दी जाएगी, जो दस वर्ष से कम नहीं होगी और जिसे आजीवन कारावास में तब्दील किया जा सकता है. इसके अलावा जुर्माने की भी व्यवस्था होगी.

यौन उत्पीड़न मामले में सहमति की आयु 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गई है, लेकिन किसी पुरुष द्वारा 16 वर्ष की आयु की अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध स्थापित करने को यौन उत्पीड़न नहीं माना जाएगा. एसिड से हमला करने के लिए सजा बढ़ाने का प्रावधान भी किया गया है.

गौरतलब है कि भारत के कानून आयोग ने ‘बलात्कार कानूनों की समीक्षा’ के बारे में अपनी 172वीं रिपोर्ट में तथा राष्ट्रीय महिला आयोग ने यौन उत्पीड़न जैसे अपराध के लिए कठोर सजा देने की सिफारिश की थी.

केन्द्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने इस विषय पर कानून आयोग की सिफारिशें, राष्ट्रीय महिला आयोग और विभिन्न जगहों से मिले सुझावों पर गौर करते हुए आपराधिक कानून संशोधन विधेयक, 2011 के मसौदे के साथ अपनी रिपोर्ट दी थी और सरकार से कानून बनाने की सिफारिश की थी.
इसके मसौदे पर महिला और बाल विकास मंत्रालय तथा कानून और न्याय मंत्रालय के साथ विचार विमर्श किया गया और आपराधिक कानून संशोधन विधेयक, 2012 का मसौदा तैयार किया गया.

विधेयक की प्रमुख बातों के अनुसार भारतीय दंड संहिता की वर्तमान धाराओं 375, 376, 376-ए, 376-बी, 376-सी और 376-डी के स्थान पर अनुच्छेद 375, 376, 376-ए और 376-बी जगह लेंगे.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “यौन उत्पीडन के मामलों में होगी उम्रकैद की सजा

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

गूगल और इंटरपोल मिलकर पकड़ेगें अपराधी...

गूगल और इंटरपोल मिल कर अब इंटरनेट पर यौन शोषण, ड्रग्स तस्करों और बच्चों की गुलामी को बढ़ावा देने वाले […]
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram