महिला पत्रकार अर्चना यादव के साथ हुई घटना संदेह के घेरों में….

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-कुमार सौवीर||

लखनऊ: महिला पत्रकार अर्चना यादव के साथ हुई घटना अब संदेहों में है। कारण यह कि इस मामले में अर्चना यादव ने बेहद संदेहास्‍पद तरीके से अपना बयान तोड़-मरोड़कर पेश किया। अपने पहले के पूर्ववर्ती ईमेल पर दर्ज सूचना के बजाय अर्चना ने पुलिस को जो तथ्‍य पेश किये हैं, वे अधिकांशत: बदले हुए हैं। वैसे इस प्रकरण पर नार्थईस्‍ट स्‍टेट्समैंट अखबार के विशेष संवाददाता सतीश प्रधान ने ईमेल भेजते हुए अर्चना पर जवाब-तलब किया है। अपने मेल में अर्चना से पूछा है कि आखिर किन आधारों पर अर्चना यादव ने उन पर यह आरोप लगाया है। उधर इस प्रकरण पर लखनऊ पुलिस ने अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं की है।

गौरतलब है कि लाइव टूडे नामक किसी समाचार संस्‍थान की पत्रकार अर्चना यादव ने 18 जुलाई-12 को भेजे अपने एक मेल में कहा था कि अर्चना यादव  को अनिल त्रिपाठी और  सतीश प्रधान नाम के  पत्रकार अपने एक साथी के साथ पिछले कई दिनों से परेशान कर रहे थे। रायपुर छत्‍तीसगढ़ से प्रकाशित दैनिक देशबंधु अखबार के रिपोर्टर  अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान नॉर्थ ईस्‍ट स्‍टेट्समैन नामक संस्‍थान में विशेष संवाददाता हैं। अनिल त्रिपाठी लखनऊ से युग जागरण नामक एक खबर का संचालन भी करते हैं।

मेल के अनुसार युवती इन दोनों को पहले तो नज़रंदाज़ करती रही लेकिन फिर जब उस की बर्दाश्त की सारी सीमा 16 जुलाई को खत्‍म हो गयी। घटना के अनुसार इन् दोनों पत्रकारों ने विधान भवन लिफ्ट से बाहर आते समय युग जागरण के सम्पादक और मान्यता प्राप्त पत्रकार अनिल त्रिरपाठी  उस युवती के कंधे पर हाथ रखकर अश्लील हरकत करने लगा तो उस युवती ने इसका विरोध किया तो उसने हाथ हटा लिया तो वह लिफ्ट से चला गया।

अर्चना यादव के मुताबिक रोज़-रोज़ की ऐसी छींटाकशी से परेशान युवती कल  शाम अकेले जब अपने आवास पर जा रही थी तो इन् दोनों ने फिर इस युवती को रोका और छींटाकशी की। अर्चना के अनुसार उसने विकासदीप भवन में अनिल त्रिपाठी और  सतीश प्रधान की जूतों  से पिटाई कर बुरी तरह धुना। जिस जगह पर ये पूरी घटना हुई वो भीड़भाड़ वाला स्थान था जिस की वजह से मौके पार भारी भीड़ जमा हो गई।

लेकिन हैरतअंगेज तरीके से अर्चना यादव ने 20 जुलाई की शाम एक ईमेल एक सूचना प्रसारित की। इस ईमेल पर अटैच्‍ड फाइल में अर्चना यादव ने लखनऊ के आईजी को शिकायती पत्र में सतीश प्रधान और अनिल त्रिपाठी के साथ सचिवालय पर उस हादसे का तो ब्यौरा दिया है, लेकिन विकासदीप भवन पर 18 जुलाईृ-12 की घटना में सतीश प्रधान का नाम हटा दिया है। अर्चना के पत्र के अनुसार अर्चना ने इन पत्रकारों पर आरोप लगाया है कि अनिल त्रिपाठी ने अभद्रता और हाथापाई की थी। जबकि अपने पुराने मेल में अर्चना ने यह हमला इन पत्रकारों पर करने की बात मानी थी। इतना ही नहीं, आईजी को लिखे पत्र में अर्चना ने घटना का समय शाम आठ बताया है, जबकि पहले पूर्ववर्ती मेल पर अर्चना का कहना था कि यह घटना उसके घर वापसी के समय हुआ। इस मेल की सूचना पर इन पत्रकारों पर हमला करने की बात कही थी, जबकि आईजी को भेजे शिकायती पत्र में अर्चना यादव ने आरोप लगाया है कि इस घटना के दौरान इन पत्रकारों ने उस पर उठवा लेने और जान से मरवा देने की बात कही है।

सवाल तो यह है कि एक ही घटना पर अर्चना ने परस्‍पर विरोधी बयान आखिर क्‍यों जारी किये। वैसे इस घटना पर पत्रकारों के परस्‍पर विरोधी गुटों में सरगर्मी शुरू हो गयी है। दूसरी और अर्चना ने एक बातचीत में बताया है कि वह पिछले पांच-सात बरसों से पत्रकारिता में सक्रिय है। लेकिन हैरत की बात है कि अर्चना ने अपनी उम्र महज 21 वर्ष बतायी है। अर्चना का कहना है कि मौजूदा लाइव टूडे के पहले वह कौमी ऐलान नामक एक कथित दैनिक समाचारपत्र में काम कर चुकी है।

 

कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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