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चप्‍पलों की बरसात बनाम पत्रकारिता... - मीडिया दरबार

चप्‍पलों की बरसात बनाम पत्रकारिता…

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देशबंधु, रायपुर समेत दो पत्रकार की कथित पिटाई से हंगामा.. सतीश प्रधान नॉर्थ ईस्‍ट स्‍टेट्समैन और अनिल त्रिपाठी देशबंधु के हैं… मान्‍यताप्राप्‍त संवाददाताओं की विश्‍वसनीयता घेरे में….

-कुमार सौवीर||

लखनऊ: दो पत्रकारों की पिटाई को लेकर लखनऊ की पत्रकारिता एक बार फिर विवादों से छा गयी है। खबर है कि गुरूवार को एक महिला ने इन पत्रकारों पर हमला बोल दिया। आरोप है कि यह महिला इन पत्रकारों की कथित छेड़खानी से तंग थी। जबकि सूत्र बताते हैं कि इस मामले को पत्रकारों की आपसी जंग के चलते खूब रंग भरा दिया गया है। खबर है कि इस मामले को भड़काने में पत्रकारिता के कई दिग्‍गज सरपरस्‍तों का हाथ है। बहरहाल, सत्‍ता के गलियारों पर चटखारा लगाने वाली इस घटना पर एक पत्रकार से तो अब संपर्क नहीं हो पाया है, लेकिन एक अन्‍य पत्रकार का आरोप है कि ऐसे फर्जी अपमानजनक खबर को फैलाने वाले ईमेल को पुलिस के हवाले किया जाएगा, ताकि भविष्‍य में ऐसी हरकतों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

पत्रकारिता की रंगारंगी दुनिया के मशहूर लखनऊ में एक शर्मनाक घटना आज एक फिर सामने आई है। शुरूआत हुई एक ईमेल से। यह ईमेल शालिनी डॉट कॉलेज एट जीमेल डॉट से आया और सभी पत्रकारों के कम्‍प्‍यूटर तक पहुंचा। कुछ ही समय बाद ही लाइव टुडे नामक एक कथित समाचार संस्‍थान की रिपोर्टर अर्चना यादव की ओर से अम्‍बीअर्चना डॉट यादव एट जीमेल डॉट कॉम से फिर मेल आ गया। इस मेल के मुताबिक एक पुराने इलेक्ट्रानिक न्यूज़ चैनेल में काम करने वाली युवती अर्चना यादव  को अनिल त्रिपाठी और  सतीश प्रधान नाम के  पत्रकार अपने एक साथी के साथ पिछले कई दिनों से परेशान कर रहे थे। बताते चलें कि रायपुर छत्‍तीसगढ़ से प्रकाशित दैनिक देशबंधु अखबार के रिपोर्टर के अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान नॉर्थ ईस्‍ट स्‍टेट्समैन नामक संस्‍थान में विशेष संवाददाता हैं। अनिल त्रिपाठी लखनऊ से युग जागरण नामक एक खबर का संचालन भी करते हैं।

मेल के अनुसार युवती इन दोनों को पहले तो नज़रंदाज़ करती रही लेकिन फिर जब उस की बर्दाश्त की सारी सीमा १६ जुलाई को खत्‍म हो गयी तो इस युवती ने दोनों पत्रकारों को सबक सिखा दिया। घटना के अनुसार इन् दोनों पत्रकारों युग जागरण के सम्पादक और मान्यता प्राप्त पत्रकार अनिल त्रिपाठी ने विधान भवन लिफ्ट से बाहर आते समय उस युवती के कंधे पर हाथ रखकर अश्लील हरकत करने लगा तो उस युवती ने इसका विरोध किया तो उसने हाथ हटा लिया और लिफ्ट से चला गया। अनिल त्रिपाठी की इस हरकत से युवती को आघात लगा और  उस युवती ने एक ऐसा क़दम उठाया जिस को कोई युवती आसानी से नहीं उठा सकती थी।

रोज़ रोज़ की छीटाकशी से परेशान युवती कल  शाम अकेले जब अपने आवास पर जा रही थी तो इन् दोनों ने फिर इस युवती को रोका और छीटाकशी की तो उसने खुद  विकास दीप भवन पहुँच कर न सिर्फ अनिल त्रिपाठी और  सतीश प्रधान की जूतों  से पिटाई कर दी बल्कि उस के साथी को भी बुरी तरह धुना। जिस जगह पर ये पूरी घटना हुई वो भीड़भाड़ वाला स्थान था जिस की वजह से मौके पार भारी भीड़ जमा हो गई। लोग इस घटना को देखते रहे लेकिन कोई भी युवती के गुस्से का शिकार होने को तैयार नहीं था, ये पूरी घटना हुसैनगंज थाना क्षेत्र में हुई लेकिन करीब बीस मिनट तक चले हंगामे का अंत तब हुवा जब सतीश प्रधान ने इलेक्ट्रानिक मीडिया की महिला पत्रकार से माफी माँगी। परन्तु आज सुबह से ही इस मसले पर बातचीत शुरू हुयी और सामने आया की सतीश प्रधान और अनिल त्रिपाठी ने उस युवती के पीछे कुछ लोगों को लगा दिया। उधर अर्चना को डर है कि उनको किसी भी तरह का जान माल का नुकसान हो सकता है। अर्चना के अनुसार अगर ऐसा हुआ तो अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान ही जिम्मेद्दार होंगे।

इस खबर पर सतीश प्रधान का कहना है कि यह साजिश है। प्रधान के अनुसार सतीश और अनिल ने लगातार ही पत्रकारिता के कलंक के तौर पर पहचाने गये कथित पत्रकारों की काली-करतूत का भंडाफोड़ किया है। प्रेस परिषद की पिछली बैठक में भी हम लोगों ने ऐसे दलालों की करतूतों का खुलासा किया था। इन्‍हीं बातों के चलते ऐसे पत्रकारों की नजर हम लोगों पर पड़ी थी और वे हर मुमकिन वक्‍त पर हम पर हमला करने की साजिशें बना रहे थे। ताजा यह दुष्‍प्रचार इसी साजिश का अंग है। हालांकि सतीश प्रधान ने खुले तौर पर किसी षडयंत्रकारी का नाम नहीं लिया है, लेकिन समझा जाता है कि इस पूरे मामले में उप्र मान्‍यताप्राप्‍त संवाददाता समिति के मौजूदा अध्‍यक्ष हिसाम सिद्दीकी और उनकी टोली है। हालांकि इस प्रकरण पर अनिल त्रिपाठी से तो काफी प्रयासों के बावजूद सम्‍पर्क नहीं की जा सका, लेकिन सतीश प्रधान ने मेल भेजकर बताया कि ऐसी करतूतों के खिलाफ वे कड़ी कार्रवाई करेंगे। सतीश का मेल इस तरह है:-
I received a message in the E-mail ID of North India Statesman, well in an incident has been quoted and many objectionable things have been mentioned, where as it is very surprising that no such incident had occurred with me. The above message has also been sent to many other E-mail ID’s. You are aware that such message which has been expressed without any imputation of truth, in good faith or in the interest of public good, if circulated is an offence & punishable under 499, 500 & 501 of IPC and Cyber law also.

I request you to keep yourself  from any conspiracy or attempt to defame me. Several people to whom you have forwarded this message have expressed their surprise & have discussed with me regarding the falls incident, which you have quoted. Your message has defamed me and lowered my estimation in front of my friends, relatives & journalist fraternity.

I would request you to kindly issue a corrigendum to my email address & to all the email addresses you have forwarded the above wrong story, failing which I will be compelled to take recourse to legal remedies for which you will be responsible.

I would also request you to kindly mention your name, designation, address & the name of Electronic News Channel for which you are working.

 

कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520

About Post Author

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “चप्‍पलों की बरसात बनाम पत्रकारिता…

  1. आज हालत यह है कि सरकार के साथ-साथ मीडिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं. लोगों में यह धारणा बनती जा रही है कि मीडिया भी दलाल बन गया है. यह धारणा कुछ हद तक ग़लत भी नहीं है. जब देश के बड़े-बड़े संपादकों और पत्रकारों के काले कारनामों का खुलासा होता है तो अ़खबारों में छपी खबरों पर विश्वास करने वालों को सदमा पहुंचता है. बड़े पत्रकार बड़े दलाल बन गए हैं तो छोटे पत्रकार भी पीछे नहीं हैं. पैसे लेकर झूठी खबरें छापने का प्रचलन बढ़ चला है. छोटे-छोटे शहरों में पत्रकार और संवाददाता अवैध वसूली का काम करने लगे हैं. धमकी देने और ब्लैकमेल करने से लेकर अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने का काम भी पत्रकारों का नया शौक़ बन गया है. चुनाव के दौरान टीवी चैनलों और अ़खबारों का जो चरित्र उभर कर सामने आता है, वह वेश्यावृत्ति से कम नहीं है. पत्रकारिता में दलाली की नींव कहां से पड़ी, यह इन दस्तावेज़ों से पता चलता है. आज भी ऐसे पत्रकार मौजूद हैं, जो सरकार के काले कारनामों को छिपाने के लिए दलीलें देते हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को ही कठघरे में खड़ा करते हैं. यह चिंताजनक स्थिति है. जिस तरह

    नेताओं और अधिकारियों के भ्रष्टाचार से आज प्रजातंत्र खतरे में पड़ गया है, उसी तरह पत्रकारिता की विश्वसनीयता खत्म होने से प्रजातंत्र का बचना मुश्किल हो जाएगा. प्रजातंत्र को ज़िंदा रखने के लिए सामाजिक सरोकारों के साथ विश्वसनीय पत्रकारिता ही व़क्त की मांग है.

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