क्या एनसीपी और कांग्रेस में सुलह हो गई है?

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यूपीए की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी एनसीपी की नाराजगी के चलते यूपीए पर छाया संकट टलता दिख रहा है. एनसीपी ने ‘यू-टर्न’ लेते हुए शुक्रवार को साफ कर दिया कि उनकी पार्टी यूपीए का अहम हिस्सा है. एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने सोनिया से शरद पवार की मुलाकात के बाद हुई पार्टी की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित किया. इस दौरान प्रफुल्ल पटेल ने पवार की मांगें माने जाने और सरकार में नंबर 2 की कुर्सी न मिलने पर नाराज होने से जुड़ी खबरों पर कहा, ‘शरद पवार की तरफ से प्रधानमंत्री को लिखी गई चिट्ठी पर बेजवह के कयास लगाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कैबिनेट में नंबर दो की कुर्सी के मुद्दे को जरुरत से ज्यादा उछाला जा रहा है. कुछ कांग्रेसी नेता ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं. चिट्ठी मिलने के बाद प्रधानमंत्री ने पवार से बात की थी. ‘

 

लेकिन एनसीपी को लेकर यूपीए का संकट पूरी तरह से खत्म नहीं लग रहा है. प्रफुल्ल पटेल ने यह भी कहा कि सोमवार को उनकी पार्टी की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति को लेकर फैसला किया जाएगा.

मीडिया में पवार को नंबर 2 कुर्सी न दिए जाने पर पटेल ने कहा, ‘पवार बहुत ही वरिष्ठ नेता हैं. वे ऐसी बातों से ऊपर हैं. हमारे पास कभी भी बहुत ज़्यादा संख्या (सांसदों की) नहीं रही. लेकिन शरद पवार का राजनीतिक कद इनता बड़ा है कि वे अपने आप ही सरकार के बड़े नेता हैं.’

पटेल के मुताबिक, ‘बीते 8 सालों से एनसीपी यूपीए का अहम घटक दल रहा है. यूपीए सरकार के स्तंभ के तौर पर एनसीपी ने काम किया है. कांग्रेस और एनसीपी की तरफ से कुछ राजनीतिक मुद्दे समय-समय पर उठते रहे हैं. यूपीए अपने अंतिम दो वर्षों में प्रवेश कर चुकी है. राजनैतिक दल के तौर पर एनसीपी और गठबंधन के तौर पर यूपीए को आम चुनावों के लिए कमर कस लेनी चाहिए. सरकार को ज़्यादा निर्णायक, मुद्दों को लेकर कमिटमेंट दिखाना होगा. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यूपीए चुनौतियों का सामना करेगी. गठबंधन और सरकार के कामकाज को लेकर पवार के मन में कुछ बातें थीं, जिन पर चर्चा की गई.’

इससे पहले खबर आई थी कि सहयोगी पार्टी एनसीपी कांग्रेस से नाराज है. खबर आई थी कि एनसीपी सुप्रीमो और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और उनकी ही पार्टी के एक अन्य केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सरकार से नाराज़गी दिखाते हुए गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री के पास अपना इस्तीफा भेज दिया. यह भी कहा जा रहा था कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गईं तो सरकार के साथ कांग्रेस का गठबंधन भी तोड़ सकते हैं. बताया जाता है कि शरद पवार ने प्रधानमंत्री के पास दो चिट्ठियां भेजी थीं. एक में उन्होंने अपना इस्तीफा भेजा था, जबकि दूसरे में उन्होंने यूपीए में गठबंधन धर्म का पालन नहीं किए जाने की बात कही है. लेकिन एनसीपी ने इस्तीफे की बात से इनकार किया है.

शुक्रवार की सुबह पवार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मिले. वहां उन्होंने अपनी बात रखी. पवार और सोनिया की मुलाकात के बाद मीडिया में सूत्रों के मुताबिक खबर आई थी कि पवार की कुछ मांगों को मानने के लिए कांग्रेस तैयार है. सूत्रों का कहना था कि पवार कैबिनेट में प्रणब मुखर्जी की जगह ‘नंबर 2’ न बनाए जाने से नाराज हैं.

यूपीए सरकार में प्रणब की जगह एके एंटनी को ‘नंबर 2’ की जगह दी गई है. 12 जुलाई की बैठक में एंटनी मनमोहन सिंह की बगल में बैठाए गए थे. कैबिनेट की बैठकों में पवार पहले प्रणब के बगल में बैठते थे. 3 जुलाई (जब प्रणब की कुर्सी खाली हो चुकी थी) को पवार को प्रधानमंत्री के बगल में कुर्सी दी गई, लेकिन 12 जुलाई को यह कुर्सी एंटनी को मिल गई. हालांकि एनसीपी इससे इनकार कर रही है.

 

भले ही एनसीपी औपचारिक तौर पर इनकार कर रही हो, लेकिन सुशील कुमार शिंदे को लोकसभा में नेता सदन बनाए जाने की बात से भी पवार नाराज बताए जाते रहे हैं. खबरों के मुताबिक एनसीपी को यह भी लगता है कि सरकार कई फैसलों में उनकी रजामंदी नहीं लेती है और न ही तवज्जो देती है.

 

पवार और पटेल गुरुवार की कैबिनेट की बैठक में भी नहीं गए थे. एनसीपी के प्रवक्ता डीपी त्रिपाठी ने गुरुवार को कहा था, ‘हम बैठक में शामिल नहीं हुए. कारण पूछने पर उन्होंने कोई टिप्पणी न करने की बात कही थी. टेलीकॉम पर बने अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के अध्यक्ष पद से भी पवार बीती 2 जुलाई को इस्तीफा दे चुके हैं. इस्तीफे से कुछ दिनों पहले ही वे ईजीओएम के अध्यक्ष बने थे.

(भास्कर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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