मैं तो खुद ही अर्नोल्ड का प्रशंसक हूँ – कॉलिन फेरल

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३१ मई १९७६ में जन्में अभिनेता कॉलिन फेरल ने टाइगर लैंड, मिआमी वाइस, माइनोरिटी रिपोर्ट, फोन बूथ, द रिक्रूट, एलेग्जेंडर आदि अनेकों फिल्मों में अभिनय किया है. उन्हें कई पुरुस्कारों के लिए नामांकित तो किया ही गया इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए सन २००८ में गोल्डन ग्लोब अवार्ड भी मिला था. इन दिनों कॉलिन फिर चर्चा में हैं क्योंकि उनकी फिल्म “टोटल रीकॉल ” ३ अगस्त को पूरे विश्व में एक साथ रिलीज होने वाली है. इस फिल्म से पहले अनेकों फिल्मों में अभिनय कर चुके कॉलिन ने इस फिल्म में अभिनय जरुर किया है लेकिन उनके मन में इस फिल्म को लेकर अनगिनत सवाल भी उठे होंगे क्योंकि यही फिल्म सन १९९० में भी बनी थी जिसमें अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर  मुख्य भूमिका में थे.

लेखक फिलिप के डिक की लघु कहानी “वी कैन रिमेम्बर इट फॉर यू होलसेल’’ पर आधारित सोनी पिक्चर्स की इस फिल्म के निर्माता हैं टोबी जफे और निर्देशक हैं लेन वाइसमेन और इनके साथ दो नायिकाए हैं फिल्म में केट बेक्किंसले और जेसिका बियल. कॉलिन देखने में  बहुत ही सीधे सादे से हैं उन पर डगलस कुएद की भूमिका में बिलकुल फिट रहेगी क्योंकि कुएद इस फिल्म में एक आम फैक्ट्री कर्मचारी है. १९९० में बनी फिल्म “टोटल रीकॉल ” में अभिनेता अर्नोल्ड थे जिनकी छवि बिलकुल ही अलग है दर्शकों में. वो एक मसल्स मैन के रूप में लोकप्रिय हैं अपने चाहने वालों में, जबकि कॉलिन की छवि बिलकुल ही जुदा है. तो कहीं कॉलिन के ऊपर किसी भी प्रकार का कोई दबाव तो नही था इस बात को लेकर ? इसके जवाब  में कॉलिन कहते हैं, “नही – नही, ऐसा कुछ भी नही था यह फिल्म पिछली फिल्म से बिलकुल ही अलग है, इसमें सब कुछ अलग तरीके से फिल्माया है निर्देशक ने. और शायद इसीलिए मैंने इस फिल्म में काम किया.  मैं तो खुद ही अर्नोल्ड का प्रशंसक हूँ. मैंने उनकी अनेकों फ़िल्में देखी हैं टोटल रीकॉल, रेड हीट, कमाण्डो, टर्मिनेटर आदि सभी एक्शन फ़िल्में हैं मुझे उनका स्टाइल भी बहुत ही पसंद है.”

इस फिल्म में कॉलिन के साथ दो नायिकाएं हैं तो किसके साथ उन्हें काम करने में मज़ा आया के जवाब में ? कॉलिन ने मुस्कुराते हुए कहा कि, “दोनों के साथ, दोनों ही अपनी — अपनी जगह अच्छी थी. जेसिका का चरित्र जैसा फिल्म में है वैसी ही वो सच में भी है. जिस तरह के एक्शन उसने फिल्म में किये हैं वास्तविक जिंदगी में भी उसे इस तरह करना पसंद है जेसिका बड़ी रफ टफ है और केट के साथ भी बहुत ही मज़ा आया काम करने में. एक तो उसका पति लेन ही इस फिल्म का निर्देशक है तो थोडा सा अजीब भी लगा किसिंग सीन करते समय लेकिन क्या करे फिल्म तो करनी ही थी.”

फिल्म “टोटल रीकॉल ” की शूटिंग को याद करते हुए कॉलिन बताते हैं, “ किसिंग सीन करना तो थोडा मुश्किल था लेकिन एक्शन सीन करना मजेदार था केट के साथ. एक बार केट की गर्दन में मुझे मारना था लेकिन वास्तव में उसे जोर से लग गयी. इस सीन के बाद मुझे उसे माफ़ी मांगनी पड़ी.”

१९९० की  फिल्म “टोटल रीकॉल ” और २०१२ में रिलीज होने वाली फिल्म “टोटल रीकॉल” दोनों में क्या अंतर होगा पूछने पर ? कॉलिन कहते हैं,  दोनों ही फ़िल्में अच्छी हैं दोनों के ही दर्शक भी अलग ही होंगे, तकनीक भी बहुत अलग होगी. अर्नोल्ड के प्रशंसकों को यह फिल्म भी पसंद आएगी यह मैं कह सकता हूँ. हमारी फिल्म पिछली बार की तुलना में ज्यादा संजीदा होगी यह बात तो बिलकुल ही सच है.लेकिन मेरी इस बात   का यह मतलब नही है कि पिछली फिल्म अच्छी नही थी. ”

निर्देशक लेन के बारे में बात करते हुए कॉलिन कहते हैं, “ लेन के काम के बारे में मैं  क्या कहूँ उन्होंने पहले भी  कई साइंस फिक्शन फ़िल्में बना चुके हैं. यह फिल्म भी उन्होंने बहुत ही गज़ब की बनाई है.” जब कॉलिन को पता चला कि फिल्म “टोटल रीकॉल ” फिर से बन रही है तो उन्हें कुछ संशय हुआ और उन्होने  सोचा कि क्या यह फिल्म पिछली फिल्म की तुलना में बेहतर बनेगी और जब उन्होंने इसकी स्क्रिप्ट पढ़ी तो सच में लाजवाब लगी.

अभिनेता कॉलिन वैसे भी आज कल सभी फिल्म निर्माता – निर्देशकों की मांग बने हुए हैं. इस फिल्म  “टोटल रीकॉल” के बाद तो उनके फिर क्या कहने ? उनकी कई फ़िल्में आ रही हैं जिनमें “सेवन साइकोपथस” और “डेड मैन डाउन” मुख्य हैं.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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