हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति पद के लिए दूसरी बार उम्मीदवार

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-पलाश विश्वास||

यूपीए ने हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति पद के लिए दूसरी बार उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है. जाहिर है कि वामपंथियों को पटाने के लिए कांग्रेस पहले से ही हामिद अंसारी के नाम पर मुहर लगा चुकी थी, यूपीए की बैठक के बाद उनके नाम का महज औपचारिक एलान किया गया. अंसारी ने भी इस प्रस्ताव को कबूल कर लिया है. संप्रग को बाहर से समर्थन दे रहे सपा और बसपा ने भी अंसारी को समर्थन का एलान कर दिया है. वामदलों में पहले से ही उनके नाम पर सहमति है.प्रधानमंत्री निवास पर शनिवार शाम को हुई बैठक के बाद यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हामिद अंसारी के नाम का औपचारिक ऐलान किया. अंसारी को फिलहाल टीएमसी छोड़कर यूपीए के तमाम घटक दलों के समर्थन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और लेफ्ट के समर्थन का भरोसा भी हासिल है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को साफ कर दिया कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के उम्मीदवार वर्तमान उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी के लिए मैदान खाली नहीं छोड़ेगी. पार्टी ने हालांकि उम्मीदवार का नाम तय नहीं किया है. इसके लिए 16 जुलाई को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक बुलाई गई है. अंसारी यदि उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर लेते हैं तो लगातार दो बार इस शीर्ष संवैधानिक पद पर आसीन होने वाले वह दूसरे व्यक्ति बन जाएंगे. इससे पहले सर्वपल्ली डा. राधाकृष्णन ही लगातार दूसरी बार उपराष्ट्रपति बने थे.

इस बीच, प्रधानमंत्री ममता बनर्जी को मनाने में जुट गए हैं. वे फोन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने मुलायम सिंह यादव और मायावती को फोन कर उनसे बात की है. लेफ्ट उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार के मुद्दे पर सोमवार को बैठक में फैसला करेगा. दूसरी ओर, राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर माकपा एक बार फिर कांग्रेस के करीब आई है. माकपा की सर्वोच्च नीति निर्धारण कमेटी पोलित ब्यूरो ने भले ही संप्रग के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन करने का निर्णय लिया है, लेकिन इस मुद्दे पर सहयोगी उसके साथ नहीं हैं. भाकपा और आरएसपी ने राष्ट्रपति चुनाव में तटस्थ रहने का निर्णय किया है, जबकि फारवर्ड ब्लॉक प्रणब मुखर्जी का समर्थन कर रही है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश कारत ने कहा है कि राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में वाम दलों द्वारा अलग-अलग रुख अपनाए जाने के कारण वाम एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

राष्ट्रपति चुनाव की तरह ही उपराष्ट्रपति चुनाव में भी संप्रग के घटक दलों में एक राय नहीं देखी गई. राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी की उम्मीदवारी का विरोध करने वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस चुनाव में भी डा. अंसारी के नाम पर मुहर नहीं लगाई है. उसने अपनी ओर से दो नाम सुझाए जिसे खारिज कर दिया गया और अंसारी के नाम की घोषणा की गई.लेकिन चिदम्बरम ने दावा किया कि अंसारी को नामित किए जाने के फैसले को बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने स्वीकार किया और तृणमूल कांग्रेस सहित सभी दलों ने इसका स्वागत भी किया.चिदम्बरम ने कहा कि बैठक के दौरान कुछ और नाम भी सुझाए गए थे लेकिन अंसारी के नाम पर सर्वसम्मति बनी.चिदंबरम ने यह भी बताया कि एसपी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और बीएसपी प्रमुख मायावती ने अंसारी के नाम पर सहमति जताई है.लेकिन इसके साथ ही यूपीए का संकट शुरू हो गया है. कैबिनेट में एके एंटनी को ‘दूसरा नंबर’ का अनौपचारिक ओहदा मिलने से एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार नाराज हो गए हैं. यही वजह है कि एनसीपी की ओर से न तो वे न ही प्रफुल्ल पटेल शनिवार की बैठक में शामिल हुए. बताया जा रहा है कि पवार ने पटेल को मुंबई में ही रोक दिया.

वहीं, यूपीएम में शामिल तृणमूल कांग्रेस ने हामिद अंसारी के नाम पर असहमति जताते हुए अपनी तरफ से दो उम्मीदवारों के नाम बैठक में पेश किया. इनमें गोपाल कृष्ण गांधी और कृष्णा बोस शामिल हैं. गोपाल कृष्ण गांधी महात्मा गांधी के पौत्र और कृष्णा बोस सुभाष चंद्र बोस के भतीजे की पत्नी हैं. बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब केंद्रीय रेल मंत्री और तृणमूल के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय ने कहा कि अभी अंसारी को लेकर उनकी पार्टी का क्या रुख है, वह नहीं बता सकते हैं. रॉय ने कहा कि वे बैठक के बारे में अपनी नेता ममता बनर्जी को जानकारी देंगे. उसके बाद ही हामिद अंसारी को समर्थन देने या न देने पर फैसला लिया जाएगा. न्होंने कहा, हमने अपने नाम सुझाए. उन्होंने अपने नाम बताए. मैं पार्टी को इससे अवगत कराऊंगा. पार्टी ही अंतिम फैसला लेगी.रॉय ने बताया कि बैठक में कुछ और नाम भी सामने आए लेकिन वे टिक नहीं सके.

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में भी अंसारी का नाम प्रणब मुखर्जी के साथ चर्चा में आया था लेकिन तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने दोनों नामों को खारिज करते हुए अपनी ओर से पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अबदुल कलाम, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम सुझाया था. हालांकि कांग्रेस ने इन सभी तीनों नामों को खारिज कर दिया था.

बहरहाल, संप्रग द्वारा अपनी पसंद खारिज किए जाने के बाद तृणमूल ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. तृणमूल कांग्रेस 17 जुलाई को होने वाली अपनी बैठक में राष्ट्रपति चुनाव के साथ-साथ उपराष्ट्रपति चुनाव पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आधिकारिक आवास पर हुई संप्रग के सभी घटक दलों की बैठक में शनिवार को अंसारी की उम्मीदवारी की घोषणा की.

सोनिया ने कहा, अंसारी ने बड़ी गरिमा के साथ राज्यसभा के सभापति के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया. उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए दूसरी बार नामित कर संप्रग गौरवान्वित महसूस कर रहा है.

अंसारी की उम्मीदवारी की घोषणा के तत्काल बाद मनमोहन और सोनिया ने उन्हें फोन कर बधाई दी.

अपनी उम्मीदवारी घोषित किए जाने के बाद डा. हामिद अंसारी ने कहा कि उन्होंने विनम्रता के साथ अपनी उम्मीदवारी स्वीकार कर ली है. साथ ही उन्होंने उन सभी राजनीतिक दलों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने उन्हें समर्थन दिया.75 वर्षीय अंसारी ने अपने कैरियर की शुरूआत भारतीय विदेश सेवा के एक नौकरशाह के रूप में 1961 में शुरू की थी और अलीगढ़ मुस्लिम विविद्यालय के कुलपति के रूप में भी काम किया.

केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल के साथ मीडियाकर्मियों से बातचीत में अंसारी ने कहा कि वह खुद पर भरोसा जताने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बहुत धन्यवाद करते हैं.

अंसारी ने कहा, मैं इस सम्मान को बड़ी ही विनम्रता से स्वीकार करता हूं. मैं प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष तथा मेरा समर्थन करने और मुझ पर विश्वास जताने के लिए समर्थन करने वाले सभी राजनीतिक दलों का शुक्रिया अदा करता हूं.

अंसारी इससे पहले वर्ष 2007 में उपराष्ट्रपति पद के लिए चुने गए थे. उनका कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है.

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि अंसारी को सर्वसम्मति से संप्रग का उम्मीदवार बनाया गया है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस के नेता मुकुल रॉय ने कहा कि उनकी पार्टी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी और पूर्व सांसद कृष्णा बोस का नाम सुझाया है.

चिदम्बरम ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अंसारी के नाम पर सहमति बनाने के लिए संप्रग की बैठक के पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से भी बात की थी. इसके अलावा प्रधानमंत्री ने समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख मुलायम सिंह यादव और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती से भी बात की. दोनों नेताओं ने अंसारी को उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले का स्वागत किया.

मनमोहन सिंह ने मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात से भी इस सिलसिले में बात की थी.

इस बीच, भाजपा ने साफ कर दिया कि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में अंसारी के लिए मैदान खाली नहीं छोड़ेगी. पार्टी ने हालांकि उम्मीदवार का नाम तय नहीं किया है. इसके लिए 16 जुलाई को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक बुलाई गई है.

भाजपा कोर ग्रुप की बैठक के बाद महासचिव अनंत कुमार ने कहा, हमने उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ना तय किया है. उन्होंने हालांकि यह नहीं बताया कि पार्टी का उम्मीदवार कौन होगा. आगामी 16 जुलाई को राजग की बैठक बुलाई गई है, जिसमें उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा होगी.

कुमार ने कहा, हम इस मसले पर 16 जुलाई को राजग की बैठक में चर्चा करेंगे. हम अन्य राजनीतिक दलों से भी बात करेंगे.

उपराष्ट्रपति पद के लिए सात अगस्त को मतदान होना है. नामांकन करने की आखिरी तारीख 20 जुलाई है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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One thought on “हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति पद के लिए दूसरी बार उम्मीदवार

  1. desh ye jarur jananaa chahe ga ki aakhir ansaari ke pass ieys kaiya hai jo wah fier se up raaspati bana chahate hai shiway ies ke ki wo paanch waq ki namaj padte hai orr wo kewal iek musalman hai desh ke liye kaiya iesa kiya hai jo orr ne nahi kiya ho bas hinduyo ki ieysi ki taisi karte samay turant taiya rahenge hinduya ke hit ki wo kabhi bhi baat nahi karenge jab bhi musalman ki pahal ki jarurat hogi wa sab se aange aajaenge yahi karan hai ki wao raart pati bane jago hindu jango

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