एक हस्ताक्षर के बदले एक लाख चालीस हज़ार रुपये कमाती थी रोजाना..

admin 3
Page Visited: 11
0 0
Read Time:2 Minute, 55 Second
गिरफ्तारी के बाद मुंह छुपाती स्वर्ण लता

कनार्टक की एक महिला शिक्षा अधिकारी स्‍वर्ण लता हर रोज सिर्फ एक हस्ताक्षर से एक लाख चालीस हज़ार रुपये कमाती थी. यह राज फाश लोकायुक्‍त के छापे के बाद हुआ है. प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन विभाग की डिप्‍टी सेक्रेटरी स्‍वर्ण लता भंडारी को लोकायुक्‍त पुलिस ने अपने साइन का गलत दुरुपयोग करते हुए रंगे हाथों पकड़ा.

शिक्षा संस्‍थानों के अपनी स्‍कूलों के लिए ग्रांट लिए आने वाली फाईलों के लिए  ‘तुम भुगतान करो, मैं साइन करुंगी’ की नीति के तहत स्‍वर्ण लता हर दिन 1.4 लाख रुपये अपनी तिजोरी में भरती थी. जब तक कोई शिक्षा संस्थान इस रकम का भुगतान नहीं करता, वह  हस्ताक्षर  नहीं करती थी. लोकायुक्‍त में शिकायत आने के बाद जब इस महिला अधिकारी के यहां छापा मारा गया तो सच्‍चाई सामने आ गई.

लोकायुक्‍त मुख्‍यालय से कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित इस कारनामे को अंजाम दिया जा रहा था. पुलिस ने बड़ी संख्‍या में लिफाफे, नकद, नोटबुक और फाइल नंबर वाली चिट बरामद की. इन सभी पर पेड और अनपेड का मार्क बना हुआ था.

स्‍वर्णलता की सच्‍चाई दुनिया के सामने बेलगाम के कुछ लोगो की वजह से आ पाई. बेलगाम के कुछ शिक्षा संस्‍थानों ने अपनी स्‍कूलों के लिए ग्रांट पाने के लिए इस महिला अधिकारी के विभाग में संपर्क किया था. जहां इनसे भी रिश्‍वत मांगी गई. कई दिनों तक धक्‍के खाने के बाद उन्‍हें इस बात का अहसास हो गया कि बिना रिश्‍वत के यहां काम नहीं चलने वाला इसके बाद इन लोगों ने लोकायुक्‍त में शिकायत दर्ज करवा दी.

लोकायुक्‍त ने सबसे पहले स्‍वर्णलता के ऑफिस फिर घर पर छापा मारा. यहां उन्‍हें 600 ग्राम सोना, 6.27 लाख कैश मिला. इसके अलावा पति के बैंक लॉकर में 47 लाख रुपये बरामद किए गए. पुलिस ने स्‍वर्णलता को अरेस्‍ट कर कोर्ट में पेश किया. जहां से उसे नौ जुलाई तक ज्‍यूडिशियल कस्‍टडी में भेज दिया गया.

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

3 thoughts on “एक हस्ताक्षर के बदले एक लाख चालीस हज़ार रुपये कमाती थी रोजाना..

  1. नाम स्वर्णलता है तो स्वर्ण की ललक तो रहेगी। स्वर्ण लता मध्यप्रदेश के टीनू जोशी दंपत्ति से कम भ्रष्ट है। वो रूपयों के बिस्तर पर सोते थे। ये उप सचिव है और जोशी दंपति मुख्य सचिव। महिलायें भी भ्रष्टाचार करने में आगे है,इस खबर से देश की जनता को अब समझना होगा कि महिलायें अबला नहीं,नेताओं से कम बला नहीं है। उंची कुर्सी पर जो है,एक परसेंट को छोड़ कर, सभी भ्रष्ट है। उन्हें लगता है टूजी घोटाला,कोयला घोटाला,ताबूत घोटाला,हाउसिंग घोटाला आदि घोटाले में नेता करोड़ो कमाते हैं तो लाख कमाने का उनका अधिकार तो बनता ही है। और इसे अपना हक मानते हुए सभी भ्रष्टार में लीन हैं। अकेली स्वर्ण लता हीं नहीं,देश में बहुत सारी स्वर्ण लता है। ये पकड़ गई,कुछ अभी पर्दे में है।.

    नाम स्वर्णलता है तो स्वर्ण की ललक तो रहेगी। स्वर्ण लता मध्यप्रदेश के टीनू जोशी दंपत्ति से कम भ्रष्ट है। वो रूपयों के बिस्तर पर सोते थे। ये उप सचिव है और जोशी दंपति मुख्य सचिव। महिलायें भी भ्रष्टाचार करने में आगे है,इस खबर से देश की जनता को अब समझना होगा कि महिलायें अबला नहीं,नेताओं से कम बला नहीं है। उंची कुर्सी पर जो है,एक परसेंट को छोड़ कर, सभी भ्रष्ट है। उन्हें लगता है टूजी घोटाला,कोयला घोटाला,ताबूत घोटाला,हाउसिंग घोटाला आदि घोटाले में नेता करोड़ो कमाते हैं तो लाख कमाने का उनका अधिकार तो बनता ही है। और इसे अपना हक मानते हुए सभी भ्रष्टार में लीन हैं। अकेली स्वर्ण लता हीं नहीं,देश में बहुत सारी स्वर्ण लता है। ये पकड़ गई,कुछ अभी पर्दे में है।.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

शर्मसार हो रही है पत्रकारिता कुछ पत्रकारों के कारण...

–कुमार सौवीर|| आइये, आज हम आपको दिखाते हैं पत्रकारिता की किताब के ऐसे गन्‍धाते-स्‍याह-काले पन्‍ने, जिनके चलते पूरी पत्रकारिता को […]
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram