मशहूर ब्लॉगर और पत्रकार यशवंत सिंह को अखिलेश सरकार ने भेजा जेल…

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खबर है कि साक्षी जोशी द्वारा दर्ज करवाए गए झूठे मामले में भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह की जमानत की अर्जी गौतमबुद्ध नगर के सुरजपुर कोर्ट के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी श्री ए बी सिंह ने खारिज कर दी और यशवंत सिंह को डासना जेल भेज दिया गया । वस्तुत: यह मुकदमा टीवी एवं प्रिंट मीडिया क्षेत्र में अधिकार जमाये कारपोरेट घरानो और नई मीडिया यानी वेब मीडिया के बीच टकराव का नतीजा है । हालिया समय मे वेब मीडिया ने पुरी दुनिया में अपनी निष्पक्षता और बेबाकी के कारण एक अलग पहचान कायम की है । मीडिया के सभी रुपों में मात्र वेब न्यूज पोर्टल हीं हैं जो एक दुसरे की खामियों को भी उजागर करते हैं । किसी भी चैनल पर दुसरे चैनल की खामिया तो दूर रही , नाम तक नही दिखाया जाता । वही हाल अखबारों का है। अखबार प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन आफ़ बुक एक्ट 1867 की धाराओं का रोज उल्लंघन करते हैं लेकिन उनके उपर कोई कार्रवाई नही होती है ठीक उसी प्रकार टीवी चैनल ड्रग एंड मैजिक रिमेडी ( ओबजेकशनेबल एडवर्जटाईजमेंट ) एक्ट 1954 की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करते हुये भ्रामक तथा चमत्कार दिखाने वाले अंधविश्वास को बढावा देने वाले विज्ञापन प्रकाशित करते हैं, परन्तु उनके उपर कोई कार्रवाई नही होती है ।

हालिया समय में वेब मीडिया ने अपनी निष्पक्षता और तथ्यपूर्ण खबरो के लिये प्रिंट मीडिया तथा टीवी चैनलो से इतर अपना स्थान बनाया है वही टीवी चैनलों की विश्वसनियता मे भी गिरावट आई है । टीवी चैनल तथा अखबार सिंडिकेट की तरह काम करते हैं । कोई भी टीवी चैनल या अखबार दुसरे टीवी चैनल या अखबार की गलती को नही प्रकाशित करता जबकि वेब मीडिया अपनी आलोचना को भी अपने पोर्टल पर प्रकाशित करते हैं । दुनिया के अंदर आ रहे बदलाव मे भी वेब पोर्ट्लों का सबसे बडा योगदान रहा है । चाहे मिस्त्र का सता परिवर्तन हो या अन्ना के आंदोलन पर सार्थक बहस की शुरुआत. निर्मल बाबा के विज्ञापन जब इन टी वी चैनल्स पर धड़ले से दिखाए जा रहे थे और देश की जनता से इन टी वी चैनल वालों की मिलीभगत के कारण सरे आम अरबों रुपये की ठगी हो रही थी तो निर्मलजीत नरूला  की असलियत वेब मीडिया (मीडिया दरबार) ही सामने लाया था । अमेरिका का अक्यूपाई वाल स्ट्रीट आंदोलन वेब मीडिया की ताकत का सबसे बडा उदाहरण है । जहां टीवी चैनलो ने तथा अखबारो ने इस आंदोलन को कोई अहमियत नही दी , वहीं वेब मीडिया ने इसे पुरी दुनिया मे फ़ैलाने का काम किया । वेब मीडिया ने न्यूज चैनलों के पाखंड तथा अखबारो की कायरता एवं चटुकारिता को भी उजागर करने का कार्य किया है और यही कारण है कि आज यह टीवी तथा अखबारो का सबसे बडा दुश्मन है । वैसे भी एक सर्वे में यह बताया गया है कि आनेवाले 2040 तक अखबारों का कोई अस्तित्व नही रहेगा । वेब मीडिया ने टीवी तथा प्रिंट मीडिया के पाखंड तथा गलत कार्यो को प्रकाशित करने का कार्य किया है । इंडिया टीवी पर आने वाले अंधविश्वास को बढावा देने वाले विज्ञापनों की आलोचना हमेशा भडास पर आई है उसी का परिणाम है की बदले की भावना से प्रेरित होकर यशवंत सिंह के उपर यह झुठा मुकदमा किया गया है । वेब मीडिया ने भी इसे धर्म युद्ध के रुप मे लडने का निश्चय किया है । इस धर्म युद्ध में एक तरफ़ सत्य पर कायम वेब मीडिया है तो दुसरी तरफ़ अधर्म की लडाई लडने वाली कौरव सेना के रुप में शोषणकारी टीवी चैनल हैं । हम इस युद्ध को अंजाम तक पहुंचायेंगे । टीवी चैनलो को अपने उस दो नंबर के भुगतान का हिसाब न्यायालय में देना होगा जो वह केबल वालो को चुकाते हैं उनका चैनल दिखाने के लिये । यह काला धन टीवी चैनल वाले चुकाते है और इसके बारे मे टीवी चैनल के हीं नामी गिरामी पत्रकार पूण्य प्रसून वाजपेयी ने भी खुब लिखा है । हम उसका लिंक यहां दे रहे हैं

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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16 thoughts on “मशहूर ब्लॉगर और पत्रकार यशवंत सिंह को अखिलेश सरकार ने भेजा जेल…

  1. आदमी जो एक अरसे तक गुनाहगारों में था..
    कल वही शालीनता ओढ़े अहलकारों में था,
    आसमाँ को धमकियां जिसकी लगी थीं बा-असर..
    वो अँधेरा दर-हकीकत भूख के मारों में था,
    जो हकीकत का करीने से सफाया कर गया..
    इस नए माहौल में वो ही अदाकारों में था,
    तय मैं नहीं कर सका गिरती हुई छत देख कर..
    फर्श की थी साजिशें, या नुक्स दीवारों में था..!!
    (सतपाल ख्याल)

  2. पत्रकारों के खिलाफ झूठे मामले बनाकर उन्हें जेल भेजा जा रहा है मतलब, आजादी का शंखनाद हो चुका है.

  3. ANGREJON KE JAMANE MAIN POLICE KE KHILAF KRANTIKARI PATRAKARON NE HI AANDOLAN KIYE THE AUR KAI -KAI BAR JAIL GAYE THE ISLYE JAIL KO SABHI PARAKAR APNA BADA GHAR SAMJHEN.LEKIN POLICE KE ATYACHARON KA KARARA JABAB DENE KA SANKALP LEN.

  4. हम एकजूट होकर लडे तो शीशे के मकान मे रहने वाले टीवी चैनलों को जेल जाना पडेगा.

  5. दरअसल न्यू मीडिया एक बड़ी ताकत बन कर उभरा है और उसने प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के वर्चस्व को न केवल तोडा है बल्कि मीडिया के अन्दर होने वाली उन खुराफातों और शोषण को भी जनता के सामने उघाड़ दिया है जिनसे आम आदमी अभी तक वाकिफ नहीं था, इसलिए वेब मीडिया के लोग स्थापित मीडिया की आँखों में खटकने लगे हैं.
    इस अन्याय के खिलाफ वेब मीडिया के लोगों को एकजुट होकर खडा होने का वक़्त है. हो सकता है यशवंत से हम लोगों का मन मुटाव भी हो, उनकी बहुत सी हरकतों से हम सहमत न भी हों और बहुत सी कमियां भी उनमें हों, लेकिन ये वक़्त अपने व्यक्तिगत मतभेदों को किनारे रखकर एक साथ खड़े होने का है.

  6. धन्यवाद । अगर हम एकजूट होकर लडे तो शीशे के मकान मे रहने वाले टीवी चैनलों को जेल जाना पडेगा ।

    1. Bharat main sabse jyada kanoon ka Durupyog police wale karte hain.Police walon ke liye jababdehi ka kanoon ban na chahiye aur Doshi Police walon ko Double sajaa milani chahiye

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