/* */

अधिकतर ने लगवाया RO और प्यासे रहे हैं रो

Page Visited: 27
0 0
Read Time:5 Minute, 31 Second

घरों में पानी साफ करने के लिए आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीन लगवाना फैशन की शक्ल अख्तियार कर चुका है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि राजधानी में आरओ के बेवजह इस्तेमाल से पानी की बर्बादी हो रही है। दिल्ली जल बोर्ड के पानी में आरओ के इस्तेमाल की जरूरत नहीं है। दरअसल, लोगों के बीच आरओ के इस्तेमाल के बारे में जानकारी की कमी है।

बेकार पानी खतरनाक
सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट में वॉटर पॉलिसी ऐंड एडवोकेसी के प्रोग्राम डायरेक्टर नित्या जैकब कहते हैं कि आरओ में 50 से 90 पर्सेंट तक पानी बर्बाद होकर निकलता है। पानी में जितना टीडीएस (पानी में घुले मिनरल) होगा, पानी उतना ही बर्बाद होकर निकलेगा। बेकार निकले पानी में फ्लोराइड और आर्सेनिक इतना ज्यादा होता है कि यह जहरीला भी हो सकता है। यह फिर से ग्राउंड वॉटर को दूषित करेगा। अक्सर लोग इस पानी को सब्जी धोने में इस्तेमाल कर लेते हैं, जो गलत है। इसे कार धोने जैसे काम में ही इस्तेमाल किया जा सकता है। पौधों पर भी इसे नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे पौधे सूख सकते हैं।

क्यों लगवाएं आरओ?

सिटिजन फ्रंट फॉर वॉटर डिमॉक्रेसी के कन्वीनर एस. ए. नकवी कहते हैं कि आरओ पानी में किसी तरह के प्रदूषण को कम नहीं करता, बल्कि यह सिर्फ टीडीएस कम करता है। दिल्ली जल बोर्ड के पानी में टीडीएस की मात्रा 100 टीडीएस एमजी/ लीटर है, जो वाजिब है। ऐसे में उसके पानी को साफ करने के लिए आरओ का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। याद रहे कि आरओ एक ग्लास पानी ट्रीट करता है तो एक ग्लास तक पानी बर्बाद भी करता है। अगर आप ग्राउंड वॉटर का पेयजल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं और पानी में ज्यादा खारापन है तो आरओ लगाना मजबूरी है।

नित्या जैकब ने बताया कि टीडीएस की मात्रा 2000 एमजी/ लीटर तक हो तो पानी भले ही खारा होगा, लेकिन सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं। दिल्ली में ज्यादातर जगहों पर ग्राउंड वॉटर में टीडीएस 2000 तक या इससे कम ही है। पानी उबालने से भी टीडीएस कम होता है। जिस एरिया के पानी में फ्लोराइड, आर्सेनिक और बैक्टीरियल प्रदूषण ज्यादा हैं, सिर्फ वहीं आरओ इस्तेमाल करना चाहिए।

क्या सचमुच आरओ चाहिए आपको?
टीडीएस पानी में घुले मिनरल हैं। इनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, सोडियम बाइकार्बोनेट्स, क्लोराइड्स और सल्फेट्स आते हैं। थोड़ी मात्रा में ऑर्गेनिक मैटर भी होते हैं। टीडीएस की मात्रा ज्यादा होने पर पानी में खारापन बढ़ता है।

टीडीएस कम करने का काम है आरओ का, यह कोई प्रदूषण दूर नहीं करता। ज्यादा टीडीएस होने पर आरओ लगवाया जा सकता है। लेकिन जहां पानी में टीडीएस सामान्य है, वहां आरओ टीडीएस बेहद कम कर सकता है। कम टीडीएस भी नुकसानदेह होगा।

आप जो पानी पी रहे हैं उसमें कितना टीडीएस है, इसकी जांच के लिए टीडीएस मीटर का इस्तेमाल करना होगा, जिसकी कीमत करीब 2000 रुपये है। पानी की जांच के लिए फिल्टर बेचने वाली कंपनी या दिल्ली जल बोर्ड की भी मदद ले सकते हैं।

टीडीएस

अधिकतम सीमा

1000 एमजी/ लीटर तक

(इससे ज्यादा टीडीएस पर आरओ ठीक)

कम से कम

80 एमजी/ लीटर तक

(इससे कम टीडीएस भी नुकसानदेह)

सबसे सही मात्रा

400-500 एमजी/ लीटर

(WHO के मुताबिक)

कितनी है बर्बादी
– 10 पर्सेंट लोग भी दिल्ली के आरओ इस्तेमाल करते हैं तो इससे 20 एमजीडी पानी बर्बाद होता है।

– 850 एमजीडी पानी की सप्लाई करता है बोर्ड दिल्ली में, जबकि डिमांड 1050 एमजीडी से ज्यादा है।

– 10 लाख लोगों की पानी की जरूरत पूरी हो सकती है, अगर बेवजह के आरओ न हों तो।

आरओ नहीं तो फिर क्या?
– पानी को उबाल कर भी टीडीएस कम होता है।

– क्लोरीन की एक टैब्लेट 20 लीटर पानी को साफ करती है।

– सेरामिक फिल्टर बैक्टीरियल प्रदूषण दूर कर सकता है।

– यूवी (अल्ट्रावॉयलेट) फिल्टर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

(पूनम पांडे – नभाटा)

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “अधिकतर ने लगवाया RO और प्यासे रहे हैं रो

  1. If TDS is high it surely contains many harmful contaminant.RO removes all bacteria and virus.The ground water in all cities is highly contaminated. Boiling converts Ca/Mg bicarbonates to carbonates which precipitate.These are the only chemicals which are of use to human body. .The waste water can be used for plants but would be disaster if car is washed.The article is written by ill informed amateur writer.The ceramic filters can not remove TDS and only suspended particulates are removed.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram