मुकेश भारतीय की गिरफ्तारी में झारखण्ड के मीडिया की कारस्तानी

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-मुकेश भारतीय||

मुकेश भारतीय

छोटे मियां तो छोटे मियां, बड़े मियां भी सुभान अल्ला। जी हां, यहां बात हो रही है रांची से प्रकाशित दैनिक जागरण की। राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक यानि मेरी एक षडयंत्र के तहत हुई त्वरित पुलिसिया गिरफ्तारी की झोंक में यह अखबार भी अपना असली चरित्र दिखाने से बाज नहीं आया।

आश्चर्य की बात तो यह है कि इस अखबार के वरिष्ठ संवाददाता ने अपने समाचार में जिस तरह की सूचनायें दी है, वादी की लिखित शिकायत या गोंदा थाना में दर्ज प्राथमिकी में उसका कहीं भी रत्ती भर जिक्र नहीं है।

दैनिक जागरण के रांची संस्करण में दिनांकः 2जून,2012 के अंक ( पृष्ठ संख्या-3 ) पर “ पवन बजाज से 15 लाख रंगदारी मांगने वाला धराया ” शीर्षक से प्रकाशित समाचार में उल्लेख है कि राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक यानि मेरी  गिरफ्तारी फोन ट्रेस कर की गई है। जबकि एक अखबार के मालिक-व्यवसायी पवन बजाज की लिखित शिकायत या गोंदा थाना में दर्ज प्राथमिकी में स्पष्ट है कि एक खबर ( जो कि काफी पहले ही प्रकाशित हो चुकी थी ) प्रकाशित न करने की एवज में 15 लाख की रंगदारी मांगी गई है। यह रंगदारी उनके पायोनियर अखबार के दफ्तर में कई बार आकर मांगी गई है।

रही बात पवन बजाज जैसे प्रभावशाली व्यवसायी को मुझ जैसे किसी पत्रकार द्वारा हत्या के मामले में फंसा देने की धमकी की, तो यह तो दैनिक जागरण के संवाददाता ही स्पष्ट कर सकते हैं कि एक पत्रकार किसी को हत्या के मामले में कैसे फंसा सकता है ?

बहरहाल, दैनिक जागरण के ऐसे सुरमा संवादाताओं पर आगे कुछ टिप्पणी करने से पहले आप खुद आंकलन करें कि उनकी क्या मानसिकता रही होगी और मेरी  एक षडयंत्र के तहत हुई त्वरित पुलिसिया गिरफ्तारी में इनकी क्या भूमिका रही होगी ?

पवन बजाज की लिखित शिकायत

तुझे मान गये भाई। तू है असली झारखंडी मीडिया का एक ऐसा बड़ा वर्ग, जिसके चश्में के गर्द साफ करने की कला राजनामा डॉट कॉम  में नहीं है। तू  कुछ भी छाप-दिखा सकते हो। आखिर वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तेरी जागीर जो ठहरी। भला तू भाई लोग थर्ड मीडिया को ये आजादी क्यों दोगे ! ऐसी भी बात नहीं है कि तू सब राजनामा डॉट कॉम या उसके संचालक-संपादक मुकेश भारतीय को नहीं जानते हो। सब जानते हो। लेकिन,सवाल है कि तुम लोग एक बड़े समाचार पत्र को छोड़ मेरा साथ क्यों दोगे। वह भी व्यूरोकेट्स और कॉरपोरेटस् मीडिया की विस्तर पर  गहरी नींद में सोई राजनीतिक सत्ता के दौर में। तू सब  भले ही बड़े तीसमार खां संपादक-पत्रकार हो लेकिन, क्या यह कहना गलत है कि तू भाई  लोग किसी को आयना भी नहीं दिखा सकते और नहीं किसी को दिखाने ही दे सकते हो। फिर क्या करुं। आदत से मजबूर हूं। चलो कम से कम ये आयने तो देख लो ताकि पता चल सके कि कौन कहां खड़ा है…………. मामला कुछ…सच्चाई कुछ…छापा-दिखाया कुछ…यह तेरी कैसी पत्रकारिता?

इसी तरह झारखंड की राजधानी रांची से प्रकाशित दैनिक प्रभात खबर के संवाददाता ने मेरी गिरफ्तारी  को  लेकर  बिल्कुल  असत्य और वेबुनियाद खबर लिखी है। उसने सत्य का पक्ष लेना तो दूर वादी की शिकायत और थाना में दर्ज प्राथमिकी को भी समाचार का आधार नहीं बनाया, जो स्पष्ट प्रमाणित करता है कि इस सुनियोजित षडयंत्र में कहीं न कहीं शामिल रहा है।

इसका एक मात्र कारण है कि राजनामा डॉट कॉम दैनिक प्रभात खबर की पत्रकारिता को लेकर भी कई खबरें प्रसारित कर चुका है। और कहते हैं न कि शातिर खिलाड़ी कभी खुद सामने आकर लड़ाई नहीं लड़ता बल्कि दूसरे के कंधे पर बंदुक रख कर शिकार को मुआता है। लगता है कि वह भी पवन बजाज के साथ मिल कर यह संवाददाता भी कुछ ऐसी ही भूमिका का निर्वाह करता दिख रहा है।

दैनिक प्रभात खबर में “ रंगदारी के आरोपी को जेल ” शीर्षक से प्रकाशित खबर और एक अखबार के मालिक की थाना में लिखित शिकायत व प्राथमिकी की प्रति को गौर से पढ़ने पर पता चल सकता है कि समाचार लेखन का आधार या तो कल्पना मात्र है या फिर साजिश।

मेरा दावा है कि कभी भी मेरी साइट या मेरे द्वारा यह सूचना प्रसारित नहीं की गयी है कि पवन बजाज किसी प्रसिद्ध व्यवसायी की हत्या में शामिल रहे हैं। हां, एक खबर में यह जिक्र अवश्य है कि उन पर उस हत्या का आरोप लगा है। जिसकी जांच में आगे क्या हुआ, यह पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों की गर्त में है।

सबसे बड़ी बात कि दैनिक प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश जी और स्थानीय संपादक विजय जी बखूबी जानते हैं कि राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक मुकेश भारतीय तो दूर कोई भी आदमी एक बड़े ब्रांड के अंग्रेजी अखबार के दफ्तर में 15 लाख की रंगदारी मांगने नहीं जा सकता है ,  वह भी खबर छपने के बाद। अगर जा सकता है तो उस समय उस अखबार के दफ्तर में दर्जनों पत्रकार-गैर पत्रकार लोगों के बीच बैठ कर प्याज छिलने के बजाय पवन बजाज जैसे प्रभावशाली व्यवसायी ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी ?

रही बात पवन बजाज के एक प्रसिद्ध व्यवसायी की हत्या में आरोपी होने की तो दैनिक प्रभात खबर के साथ अनेक समाचार पत्रों में इस बाबत प्रमुखता से समाचार प्रकाशित हो चुके हैं।

दरअसल, दैनिक प्रभात खबर का लक्ष्य मीडिया, राजनीति, ब्यूरोक्रेटस, कॉरपोरेट्स को अपनी मुठ्ठी में रख कर अपनी मातृ कंपनी उषा मार्टिन ग्रुप का हित साधना है। यदि उषा मार्टिन कंपनी के अब तक के इतिहास और गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की जाये तो एक “ बड़ा खेला ” का यूं ही पर्दाफाश हो जायेगा।

 

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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One thought on “मुकेश भारतीय की गिरफ्तारी में झारखण्ड के मीडिया की कारस्तानी

  1. Legal war against the corrupt media magnets will continue.I request the Chief Minister of Bihar, Mr.Nitish Kumar to talk to the Jharkhand Chief Minister in this connection sothat Mr.Mukesh Bharatiya could get justice and the men in the corporate media, who allegedly managed the arrest of Mr.Bharatia, could be punished suitably by law enforcing agencies.
    By ShriKrishna Prasad

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