पर्यटन उद्योग शह दे रहा है बाल वेश्यावृति बाज़ार को…

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भारत में बच्चों का सिर्फ यौन शोषण ही नहीं हो रहा बल्कि उनसे वेश्या वृति भी करवायी जाती है. जिसके चलते भारत में बाल वेश्यावृति के बाज़ार भी तेज़ी से पनप रहे हैं. यहीं नहीं पर्यटन की दृष्टि से बाल वेश्यावृति भारत में अहम स्थान बना चुकी है. जिसका विदेशों में भारी-भरकम प्रचार किया जाता है ताकि  पश्चिमी देशों के सेक्स मनोविकृत पर्यटक यहाँ आयें और बाल वेश्या रमण करने के साथ ही पर्यटन उद्योग की झोली में विदेशी मुद्रा डाल जाएँ. बात सिर्फ यौन शोषण तक ही नहीं रूकती, इन लाचार बच्चों की पोर्न फ़िल्में भी बना कर ले जाते हैं ये पश्चिमी देशों के सेक्स मनोविकृत पर्यटक.

हरियाणा के ‘अपना घर’ कांड से पूरा देश थर्रा गया है। यहां लड़कियों की सुरक्षा के नाम पर जो घिनौना खेल खेला जा रहा था, उससे लोग सन्न हैं। बताया जा रहा है कि यहां की लड़कियों की पॉर्न फिल्में बनाई जाती थीं। इसके लिए उन्हें पिकनिक के बहाने चंडीगढ़ ले जाकर होटलों में ठहराया जाता था। होटलों के स्वीमिंग पूल में न्यूड होकर नहाने को मजबूर किया जाता था। उनके साथ अश्लील हरकतें करते हुए वीडियो फिल्में बनाई गईं। जबरन उनके कपड़े उतरवाए गए।

भारत में बाल वेश्याओं की निश्चित संख्या कितनी है, इसका कोई आकलन नहीं है। लेकिन यूनिसेफ का मानना है कि इनकी संख्या 70 हजार से एक लाख तक हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि दूसरे दक्षिण एशियाई देशों, खासकर बांग्लादेश और नेपाल से बच्चियों को भारतीय वेश्यालयों में लाने के साथ ही उन्हें पश्चिमी एवं अन्य अमीर देशों में भेजा जाता है।

भारत सरकार द्वारा कुछ साल पहले दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरू के वेश्यालयों में करवाए गए एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि उनमें मौजूद एक लाख से भी ज्यादा वेश्याओं में लगभग एक तिहाई 20 वर्ष से कम उम्र की हैं और 40 फीसदी ऐसी हैं जो इस धंधे में 13 से 15 वर्ष की उम्र के बीच लाई गईं थीं।

भारत में नेपाली वेश्याओं की संख्या लगभग एक लाख है। इनमें 20 फीसदी 14 वर्ष से कम उम्र की हैं। मुंबई में 12-13 साल की नेपाली बाल वेश्याएं काफी संख्या में मौजूद हैं। बच्चों का यौन शोषण पूरी दुनिया में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसे बाल श्रम और बंधुआ श्रम का सबसे घिनौना रूप माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने सेक्स उद्योग में बच्चों के शोषण पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का मानना है कि जिन देशों में बाल वेश्यावृ्त्ति के अड्डे हैं, उनका प्रचार बाहरी देशों में कर पर्यटकों को आकर्षित किया जाता है। यही कारण है कि यहां पश्चिमी देशों के सेक्स मनोविकृत पर्यटक काफी संख्या में आते हैं।

इस संगठन का मानना है कि बाल यौन शोषण इतना ज्यादा बढ़ता चला जा रहा है कि इस पर नियंत्रण रखना सिर्फ उसी देश की जिम्मेवारी नहीं है जहां बच्चों का शोषण हो रहा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय जिम्मेवारी है कि इस पर रोक लगाने के हर संभव प्रयास किए जाएं।

(मनोज के झा)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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10 thoughts on “पर्यटन उद्योग शह दे रहा है बाल वेश्यावृति बाज़ार को…

  1. hamre des hum ladkiyo ko navratre mai devi.
    k rup mai ek ma ke rup mai pojte hai or ose ke saat kuch log es parkar ka galat kaam karte hai bagwan enko sadbodhe pardan kare.

  2. कितना घिनोना है…. यह सब….. शब्द ही नहीं है….

  3. Now it is seen that young girls & handsome boys are used , business , for entertainments & main reason being money that they fetch by doing little & less efforts to get hand some money thus the young generation is also have attractions . the unusual type of shows they promote on media & getm young girls in the trap by black mailing by use of mobile camera/cc cameras ,

  4. mam nmaskar mam ager hmare police cahe tokoi b krime na ho koi b glet kam n ho police koher gle mohele bjear k tkreben logo ke jan kare hote h leken je dekhte h kntrol nhe krte j hahe to kush b na ho keo k in kea muh bo pehle he bend ker k rekhte h j tab action lete h jeb bo in ko kush nethe dete

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