लागत से हज़ार गुना से ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं भारतीय दवा कम्पनियाँ.

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मानों या न मानों पर यह सच है कि ग्लेक्सोस्मिथलाइन, रैनबैक्सी ग्लोबल, एलेमबिक और डॉ. रेड्डी लैब्स तथा इन जैसी कई दवा कम्पनियाँ लूट-खसोट का धंधा कर रहीं हैं. इन कम्पनियों द्वारा कई दवाइयों पर ग्यारह सौ फीसदी से ज्यादा मुनाफा कमाया जा रहा है जिसे लूट-खसोट कि संज्ञा न दी जाये तो और क्या कहा जाये.
कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के एक अध्ययन में हुए एक खुलासे के अनुसार यह भांडा फोड़ हुआ है.

मंत्रालय की लागत लेखा शाखा ने अपने अध्ययन में पाया है कि ग्लेक्सोस्मिथलाइन की कालपोल फाईजर की कोरेक्स कफ सीरप, रैनबैक्सी ग्लोबल की रिवाइटल, डॉ. रेड्डी लैब्स की ओमेज, एलेमबिक की एजिथराल और अन्य कंपनियों की दवाओं को उनके लागत मूल्य से 1123 फीसदी अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है.

कारपोरेट मामलों के मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने दवा कंपनियों की इस लूट खसोट को रोकने के लिए रसायन एवं ऊवर्रक मंत्री एम के अलागिरी और स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी अजाद को पत्र लिखे हैं. उन्होंने इस अध्ययन की प्रतियां इन मंत्रियों को भी भेजी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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7 thoughts on “लागत से हज़ार गुना से ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं भारतीय दवा कम्पनियाँ.

  1. humare desh ka kanoon main itni kamiyan hai, is baat par bhi humare desh ke kanoon banane wale ko hum salam karte hi, barbaad to unhin logon ne kiya hai judicial ko, kanoon main ammannet ki sakhat zaroorat hai , is baare main desh ka koi neta nhin sochta…

  2. दवा कंपनी हजारगुना कमाती है और लाखगुना डॉक्टरों को चढ़ाती है,फिर प्रिस्क्रिप्सन निकलती है,विदेशटूर,३०% कमीशन,कोन्फेरेंस,हवाईजहाज का सफर खर्चा,गिफ्ट,बेटी के शादी में गिफ्ट,कार खरीद के देना,उनको और भी तरीके से संतुष्ट करना परता है,फार्मा मार्केटिंग बहुत ही कर्रप्ट है,गिव एंड टेक का धंधा है,एथिक्स नाम की चीज नहीं है,दूसरा भगवान अब दूसरे टाइप का भगवान हो गया है.

  3. JUST ONE SMALL PRESCRIPTION FROM DOCTOR FOR4-5 DAYS MEDICINES NOW A DAYS COST OVER 200/ & in olden days doters giving his own medicines from his battled stock were charging 8-10 rupees as common daisies wirer under control by aspirin etc , now forth generations antibiotics are in prescription by doctors ARE THESE REALLY COST SO HIGH COMPARED TO OLD MEDICINES?????

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