हाईकोर्ट परिसर में सरेआम फायरिंग कर भंवरी हत्याकांड के आरोपी को ले भागे

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एएनएम भंवरी हत्या मामले के मुख्य आरोपी विशनाराम की गैंग के एक दर्जन बदमाशों ने गुरुवार सुबह हाईकोर्ट परिसर में सरेआम फायरिंग की और एक आरोपी कैलाश जाखड़ को पुलिस हिरासत से छुड़ा ले गए। विशनाराम और कैलाश को ओसियां से संबंधित एक पुराने मुकदमे में अदालत में पेश किया गया था।

गैंग ने दोनों को छुड़ाने की कोशिश की थी, मगर विशनाराम भाग नहीं पाया। बदमाशों ने इन आरोपियों को भगाने के लिए पहले कार्बाइन से हवा में गोलियां चलाईं, फिर कैलाश को पकड़ने की कोशिश में जुटे पुलिसकर्मियों पर फायर किए। जवाब में पुलिस ने भी एके-47 से पांच राउंड गोलियां चलाईं और बदमाशों के एक साथी हनुमानराम निवासी भेड़ भाखरी को पकड़ लिया।

बदमाशों की दो जीपें और दो अन्य संदिग्ध कारें जब्त की गई हैं। वारदात के बाद रेंज आईजी, पुलिस कमिश्नर, दोनों डीसीपी और पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे संभाग में नाकाबंदी करवाई है। पकड़े गए बदमाश ने अपने साथियों के नाम बताए हैं। पुलिस छापामारी कर रही है।

जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह समिति ऐसी घटनाओं से निपटने के उपाय भी सुझाएगी और ३क् दिन में रिपोर्ट देगी। डीजी (जेल) ओमेंद्र भारद्वाज और एडीजी क्राइम कपिल गर्ग को जोधपुर के लिए रवाना कर दिया है। एसीएस (गृह) की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में पुलिस महानिदेशक और जेल महानिदेशक को सदस्य और एडीजीपी (क्राइम) को सदस्य सचिव बनाया गया है।

इन बिंदुओं पर देगी रिपोर्ट

– कैदियों को जेल से कोर्ट लाने और ले जाने की व्यवस्था। – कोर्ट की सुरक्षा के इंतजाम। – कोर्ट परिसर में लोगों की हलचल और वाहनों के आवागमन पर नजर रखने के लिए क्लोज सर्किट टीवी लगाना। – कोर्ट परिसर में रहने के दौरान कैदियों के लिए व्यवस्थाएं। – वैकल्पिक व्यवस्थाओं के रूप में विचाराधीन कैदियों से जुड़े साक्ष्य-गवाहों की रिकॉर्डिग, जेल और कोर्ट के बीच वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था या जेल परिसर में ही कोर्ट। – जेल के अंदर और बाहर घूमने वाले कैदियों जांच के लिए एक्सरे और स्कैनिंग मशीनें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मशीनें लगाए जाने के बारे में।

सुरक्षा पर सवालः जेल में बनी फरार होने की प्लानिंग!

आरोपियों को भगाने की साजिश को आपस में बातचीत के बिना अंजाम नहीं दिया जा सकता था। आरोपियों व बदमाशों के बीच बातचीत से ही पूरी प्लानिंग हुई। इसी के तहत चाबियां लगाकर कारें खड़ी की गई थीं। जेल सूत्रों के मुताबिक पिछले तीन-चार दिन से आरोपियों की जेल से मोबाइल फोन पर बातें होती थीं। इसके अलावा पेशी के दौरान भी कुछ लोग उनसे कोर्ट में मिलते थे। जेल में मोबाइल से बात होना और पेशी के दौरान बातचीत कराना सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो रहा है।

असर क्या : अब आरोपियों की जमानत मुश्किल

लूणी विधायक मलखानसिंह, उनके भाई परसराम विश्नोई व अन्य ने जमानत मांगी थी। हालांकि निचली अदालतों से यह अर्जी खारिज हो चुकी है। अब हाईकोर्ट में अर्जी विचाराधीन है। इनकी जमानत में मुश्किल हो सकती है। सीबीआई कोर्ट में कह चुकी है कि आरोपियों को जमानत मिली तो वे गवाहों को धमका सकते हैं। मलखानसिंह ने तो सीबीआई इंस्पेक्टर विशाल को भी धमकाया था। अब सीबीआई की इस दलील को और बल मिलेगा।

भागने के लिए आसपास खड़ी की थीं आठ कारें-जीपें

सुबह आठ बजे से ही बदमाशों ने सात-आठ कारें-जीपें कोर्ट परिसर के बाहर तथा पावटा व शिप हाउस रोड की ओर खड़ी कर दी। कोर्ट के बाहर दो कारों में चाबी लगाकर रखी, ताकि विशनाराम व कैलाश उसमें बैठकर भाग सकें। पेशी के बाद दोनों कारों की ओर ही भागे। विशनाराम गिर गया और पकड़ा गया। कैलाश कार में बैठ गया। तभी पुलिस ने कार की चाबी निकाल ली। बदमाशों ने कार्बाइन से हवा में सात-आठ फायर किए। जब कांस्टेबल प्रकाशचंद ने भी एके-47 से गोलियां चलाई तो बदमाशों ने पुलिस पर सीधे फायर कर दिया और कैलाश को लेकर भागने लगे। पुलिस ने भी मुकाबला किया, मगर उनकी गोलियां आरोपियों की बोलेरो को लगीं।

पुलिस की एके-47 छीनने की भी कोशिश

दोनों आरोपियों को एक एएसआई व चार कांस्टेबल लेकर आए थे। एएसआई तुलसाराम के पास सर्विस रिवॉल्वर और कांस्टेबल प्रकाशचंद के पास एके-47 थी। बदमाशों ने सबसे पहले एएसआई को धक्का देकर गिराया। चारों सिपाहियों ने विशनाराम व कैलाश को पकड़ने का प्रयास किया तो बदमाशों ने विशनाराम को छुड़ाने के लिए कांस्टेबल ओमप्रकाश को काट खाया, मगर उसने विशनाराम को नहीं छोड़ा। इतने में प्रकाशचंद ने कैलाश को पकड़ा तो बदमाशों ने उसे पीटा और एके-47 छीनने की कोशिश की।

सीबीआई भंवरी मामले की सुनवाई जेल में ही कराने की मांग कर सकती है। विशनाराम का गैंग पुलिस पर पहले भी फायरिंग कर चुका है। तब सीबीआई ने कोर्ट से आरोपियों को हथकड़ी लगाने की मांग की थी, मगर वह मंजूर नहीं हुई। अब पुलिस हथकड़ी लगाने की मांग कर सकती है।

कब क्या हुआ

सुबह 9.30 बजे कैलाश व विशनाराम को बख्तरबंद गाड़ी से कोर्ट लाया गया। 10.00 बजे दोनों को डीजे कोर्ट में पेश किया। 10.30 बजे आरोपियों को बाहर लाया गया। 10.32 बजे कोर्ट के बाहर फायरिंग। 10.45 बजे बदमाश कैलाश को लेकर फरार।

(भास्कर)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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