जो नारियों की रक्षा भी नहीं कर पाती, ऐसी महिला नेता किस काम की?

admin 3
0 0
Read Time:4 Minute, 15 Second

– विजय पाटनी 

इस देश के सर्वोच्च पद  पर एक महिला है , इस देश के कर्णधार को कठपुतली की तरह भी एक महिला ही चला रही है, विपक्ष का मोर्चा भी महिला ने संभाल रखा है, कुछ प्रदेशों की मुख्यमंत्री भी महिला ही हैं, मानवाधिकार आयोग में महिला है और इंडिया को करप्शन मुक्त बनाने में भी महिलाएं आगे हैं।
लेकिन ये महिला मंत्री, नेता किस काम के लिए है  जब इनके होते हुए देश में सम्पूर्ण नारी जाति ही सुरक्षित नहीं है? आप कभी भी, किसी भी समय न्यूज़ चला कर देख लीजिए, या कोई भी अख़बार उठा कर देख लीजिए, देश में महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्यचार, बलात्कार की ख़बरें आपको मिल जाएंगी, और ताज्जुब की बात है कि जिस प्रदेश की मुख्यमंत्री महिला है, उस प्रदेश में रोजाना महिलाओं की इज्जत को तार- तार किया जा रहा है,  फिर चाहे वो  राजधानी दिल्ली हो या फिर उत्तरप्रदेश।

विजय पाटनी
विजय पाटनी

यह तो तय है कि, राजनीति में उच्च पद पे आसीन होने के बाद , ये नेता लोग खास हो जाते है , और इन्हें आम जनता के दुःख दर्द की कोई परवाह नहीं रहती, लेकिन नारी तो जन्म से ही सेवा भावी होती है, उसमे दर्द महसूस करने की शक्ति , पुरुषों से कही अधिक होती है , फिर क्यों हमारे देश की उच्च पदों पे आसीन महिलाएं,  महिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचारों  के प्रति उदासीन है ?
यदि महिलओं के राज में भी वो ही सब होना है तो महिलाओं को आरक्षण दे कर फायदा क्या है? क्या महिलाओं को बसों में ट्रेनो में संसद में और विधानसभाओं में आरक्षण देना ही काफी है?
पूरा देश काले धन के लिए लड़ रहा है , भ्रष्टाचार  के खिलाफ आवाज उठा  रहा है, लेकिन रोज हो रहे बलात्कार, महिलाओं के साथ  बदसलूकी की घटनाओं के खिलाफ कोई अपनी आवाज क्यूँ  नहीं बुलंद कर रहा है?
क्यों कोई महिला नेता बलात्कारी को कड़ी से कड़ी सजा देने का कानून नहीं लाती ?
सर्वोच्च पदों पे महिलाओं के आसीन होते हुए भी इस देश की महिला,  अपराधियों के लिए सॉफ्ट टार्गेट क्यों है ?
क्या इस देश की राजनीति सिर्फ राज करने के लिए रह गयी है ? मेरी  उच्च पदों पर बैठी सभी महिलाओं से , इस लेख के माध्यम  से गुजारिश है कि कृपया कर के महिलाओं के साथ बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों पे अपना ध्यान केन्द्रित करें।

आप किस पार्टी की हैं, आप की  पार्टी किस विचारधारा की है, आप के पार्टी के मेनिफेस्टो में  ये मुद्दा  है या नहीं  इन सब को अलग रख के,  नारीत्व की रक्षा के खातिर सब एक जुट हो कर के कुछ कड़े कानून बनाएं और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएं, आप को संसद विधान सभा में सम्पूर्ण नारी जाती का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुन के भेजा  गया है , तो कृपया कर  के अपने स्वार्थ को छोड़ के महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य करें।

यही समय है जागने का ,  आप यदि अब  भी सोते रहे तो वो समय दूर नहीं है जब इस देश में महिला होना अभिशाप बन जाएगा।

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

3 thoughts on “जो नारियों की रक्षा भी नहीं कर पाती, ऐसी महिला नेता किस काम की?

  1. आप से निवेदन है की इस पेज को लाइक करें.
    http://facebook.com/AISWC

    दोस्तों ,
    सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं…..
    मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए……
    भरोसे की आंधी चलाये रखना।.
    मिलेगी मंजिल भ्रष्टाचार मिटाने की,
    अपने दिलो मे राष्ट्र-प्रेम समाय रखना।.

    ''असतो मा सद्गमय! मृत्योर्मा अमृतमगमय! तमसो मा ज्योतिर्गमय!''.

  2. बिल्कुल सही बात कही है मगर आज इन पद लोलुपों से और उम्मीद क्या की जाये अगर जनता का सोच लें तो इनसे पद छिने ही नही ये बात समझ नही आती इन्हे बस अपनी जेबे भरनी ही आती है फिर चाहे कोई भी नेता बने स्त्री हो या पुरुष

  3. आज नारी ही नारी की सबसे बड़ी दुश्मन है , वो जमाना गया जब नारी पूजनीय होती थी , आज तो कनिमोरी जैसी नारी घोटाले में संलग्न है, जाने क्या होगा इस देश का…..????

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

क्या सरकारी विज्ञापनों के मोह मे अंधे हो चुके हैं बिहार के अखबार...?

दिल दहला देने वाली ये तस्वीर बेशक किसी भी अखबार के पहले पन्ने पर जगह पाने के काबिल हो सकती है, लेकिन बिहार के तमाम हिंदी अखबारों में इसे अंदर के पन्नों में भी जगह नहीं मिली। 3जून को बिहार के फोरबिसगंज में हुई पुलिस फायरिंग के दौरान पुलिस की ज्यादती की […]
Facebook
%d bloggers like this: