मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पत्रकारों के साथ पुलिस का अभद्र रवैया

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मुंबई :स्माल स्केल इंडस्ट्री असोसिएसन  के तरफ से नवी मुंबई के वाशी स्थित विष्णु दास भावे नाट्यगृह में आयोजित कार्यक्रम के लिए सभी अखबारों के कार्यालय और  पत्रकारों को निमंत्रण पत्रिका दिया गया था. इस पत्रिका में कार्यक्रम का समय २ बजे दिया गया था जिस के अनुसार दोपहर २ बजे पत्रकार विष्णुदास भावे नाट्यगृह के गेट पर पहुचे लेकिन वहा मौजूद पुलिस जवानो ने प्रवेश  करने से रोक दिया गया बताया गया कि अंदर सुरक्षा के इंतजाम का काम शुरु है इस के लिए थोड़े समय रुक जाये उस के अनुसार ३ बजे वापस गेट पर जाने पर वहाँ मौजूद   स्माल स्केल इंडस्ट्री असोसिएसन के सदस्य और पुलिस जवान ने पत्रकारों से उन का  पहचान पत्र पूछा गया उस के अनुसार पहचान पत्र तो दिखाया गया जिस के बाद कुछ पत्रकार गेट में प्रवेश किए और कुछ बाहर ही थे तभी  गेट पर मौजुद एक अधिकारी ने गेट के अंदर प्रवेश कर चुके पत्रकारों को वापस बुलाकर उन का पहचान पत्र मांगा और कहा कि आप लोग अपने आप खुद का अखबार निकाल लेते है  और आ जाते है हमने ये सब अख़बार आज तक नही देखा है और अंदर जाने देने से इंकार कर दिया.

उस अधिकारी को बताया गया की निमंत्रण पत्रिका भेजे जाने पर ही आए है. इस के बाद उस पुलिस अधिकारी ने बताया की आप लोग प्रेस काउन्सिल का पहचान पत्र लाओ तो प्रवेश दिया जायेगा | हमें ऊपर से आदेश आया है कि जिसके पास प्रेस काउन्सिल का पहचान पत्र होगा उसे ही प्रवेश दिया जाये| इस दौरान वहा मराठी दैनिक गावकरीके अनंत कुमार गवई , नवभारत के फोटो ग्राफर असफाक अली नियाजी और हमारा महानगर के नागमणि पाण्डेय मौजूद थे तभी सभी लोगो ने इस का विरोध किया इस बीच हमारा महानगर के नागमणि पाण्डेय ने उस पुलिस अधिकारी  को बताया कि असोसिएसन के तरफ से निमंत्रण पत्रिका भेजे जाने पर आए हैं और जो निमंत्रण पत्रिका भेजा गया है उस में कही नही लिखा है कि प्रेस काउन्सिल का पहचान पत्र या अनुमति पत्र लाना पड़ेगा.

इस के बाद कई पत्रकार इस कार्यक्रम का विरोध कर वहा से चले गए तो कई पत्रकारों ने  वहा उस अधिकारी का विरोध कर अंदर प्रवेश किया.  जिस के बाद पत्रकारों ने इस का विरोध भी किया | उस के बाद मुख्यमंत्री आने के बाद से कुछ पत्रकार जबरदस्ती अंदर प्रवेश कर गए.  पत्रकारो ने नाराजगी जताते हुए इस प्रकरण का जबर्दस्त विरोध प्रकट किया है |

(मुंबई से एक पत्रकार)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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