/* */

विवादास्पद गुरुदेव की वसीयत भी विवादों में: ड्राइवर को मिली खरबों की विरासत

admin 6
Page Visited: 187
0 0
Read Time:5 Minute, 58 Second

कभी खुद को नेताजी सुभाषचंद्र बोस बताने वाले तुलसीदास जी महराज उर्फ़ बाबा जयगुरुदेव का खुद का जीवन जितना विवादों भरा रहा उतना ही विवाद उनकी वसीयत को लेकर छिड़ा हुआ है। बुधवार को बाबा के उत्तराधिकारी का ऐलान करने के साथ ही आश्रम में मानों महाभारत शुरु हो गया है। ट्रस्ट के एक गुट ने अदालत में जमा चिट्ठी का हवाला देते हुए ऐलान कर दिया था कि बाबा को मुखाग्नि देने वाले ड्राइवर पंकज यादव उनकी विरासत संभालेंगे। जैसे ही यह फैसला सुनाया गया नामदान देने वाले (गुरुमंत्र देनेवाले) उत्तराधिकारी उमेश तिवारी का गुट बेहद नाराज हो गया। खुद तिवारी मथुरा से भूमिगत हो कर राजस्थान में प्रकट हुए हैं। ग़ौरतलब है कि पंकज यादव को लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति वाले ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है।

दरअसल, बुधवार को बाबा जयगुरुदेव की तेरहवीं का भंडारा हुआ था। दोपहर तक तो सबकुछ ठीक-ठाक नजर आ रहा था, लेकिन शाम होते होते माहौल बदल गया और तनाव दिखने लगा। बाबा के एक प्रमुख भक्त फूल सिंह ने सबके सामने एक चिट्ठी पढ़कर सुनाई। उन्होंने बताया कि यह चिट्ठी बाबा ने लिखी थी। चिट्ठी के मुताबिक 20 जुलाई 2010 को बाबा ने इटावा की सिविल अदालत में लिखित में दिया था कि उनके बाद पंकज को वारिस बनाया जाए।

इससे पहले मंदिर के ही एक ट्रस्टी के.बी. चौधरी ने कहा था कि साल 2007 में बाबा जयगुरुदेव ने उन्नाव के सत्संग में उमाकांत तिवारी को नामदान देने के लिए वारिस बनाया था। नामदान का मतलब है, जो गुरुमंत्र देगा। इसके बाद उमाकांत तिवारी के पक्ष में माहौल बनने लगा, परंतु देर शाम संस्था से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने पंकज को वारिस घोषित कर दिया। तिवारी गुट का कहना है कि फूलसिंह जिस चिट्ठी के जरिए पंकज को उत्तराधिकारी बता रहे हैं, वह इस तरह घोषणा के लिए नहीं है। इस गुट का कहना है कि कोर्ट में विचाराधीन मामले में बाबा ने यह जिक्र किया था।

दोपहर में उमाकांत तिवारी ने मंच से नामदान का दायित्व निभाने में ये कहते हुए असमर्थता जाहिर की थी कि वह अभी इस लायक नहीं हैं। वह अभी ध्यान लगाएंगे और खुद को इस लायक बनाएंगे। इसके बाद वह कहीं चले गए। आश्रम में कोई यह बताने को तैयार नहीं हैं कि उमाकांत तिवारी कहां हैं? बाद में बाबा की वेवसाइट www.jaigurudevworld.org पर अवतरित होते हुए उन्होंने घोषणा की कि वे सकुशल राजस्थान में हैं। हालांकि उन्होंने बाबा के भक्तों से संयम बनाए रखने का अनुरोध किया है, लेकिन साथ ही वेबसाइट पर दो यूट्यूब वीडियो के लिंक भी दिए हैं जिनमें बाबा जी का वो प्रवचन है जिसमें उमाकांत तिवारी को नामदान देने की घोषणा की गई है।

उधर यह विवाद अभी थमता नज़र नहीं आ रहा है। संस्था की आधिकारिक रिलीज में कहा गया था कि जल्द ही मैनेजमेंट कमिटी की बैठक बुलाई जाएगी, उसी में वारिस का फैसला लिया जाएगा। आनन-फानन में पंकज के नाम का ऐलान क्यों किया गया, इस सवाल पर ट्रस्टियों ने चुप्पी साध ली है। सूत्रों के मुताबिक, बाबा जयगुरुदेव के वारिस का ऐलान तो कर दिया गया है लेकिन इस मामले में कई पेंच हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि मैनेजमेंट कमिटी का यह सामूहिक फैसला नहीं है।

ग़ौरतलब है कि बाबा तुलसीदास जी महाराज उर्फ़ जय गुरुदेव का अपना जीवन भी विवादों से घिरा रहा था। अलीगढ़ के पंडित घूरेलाल शर्मा को उन्होंने अपना गुरु बना लिया था जिनके 1950 में निधन के बाद उनकी वापसी का प्रचार करते करते वे खुद ही जय गुरुदेव कहे जाने लगे। 10 जुलाई, 1952 को बनारस में पहला प्रवचन दिया था। 23 जनवरी 1975 को बाबा ने एक बार खुद को नेताजी सुभाषचंद्र बोस घोषित करने की कोशिश की, लेकिन तब भी विवादों में घिर गए थे।

29 जून 1975 के आपातकाल के दौरान वे जेल गए, आगरा सेंट्रल, बरेली सेंटल जेल, बेंगलूर की जेल के बाद उन्हें नई दिल्ली के तिहाड़ जेल ले जाया गया। वहां से वह 23 मार्च 77 को रिहा हुए। 1980 और 90 के दशक में दूरदर्शी पार्टी बनाकर उन्‍होंने संसद का चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं हुई।

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

6 thoughts on “विवादास्पद गुरुदेव की वसीयत भी विवादों में: ड्राइवर को मिली खरबों की विरासत

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

बंद को सफल बनाने की कोशिश में जुटी थी बीजेपी, लेकिन अडवाणी डाल रहे थे पानी

बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने आज सार्वजनिक तौर पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी को लेकर अपनी नाराजगी ज़ाहिर कर दी। […]
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram