आईपीएल के फाइनल में आने वाली टीमें फिक्स थीं या पूरा तमाशा ही फिक्स था?

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टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर कंपनी वोडाफोन ने अपने ग्राहकों को चेन्नई सुपरकिंग्स के आईपीएल फाइनल के लिए क्वालीफाई करने से पहले ही संदेश भेज दिया था कि टीम फाइनल में पहुंच गई है। कंपनी ने ग्राहकों को पिछले शुक्रवार यानि 25 मई की सुबह को ही एसएमएस भेजते हुए घोषणा कर दी थी कि “आईपीएल फाइनल्स! इस रविवार को देखिए कोलकाता नाइट राइडर्स बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स का मुकाबला।” यह एसएमएस आईपीएल क्वालीफायर से घंटों पहले भेजा गया, जिसमें चेन्नई ने दिल्ली को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। आईपीएल के फाइनल पर न सिर्फ वोडाफोन के एसएमएस से सवाल उठ रहे हैं, बल्कि चार दिन पहले फेसबुक के एक पेज पर भी फाइनल की टीमें बता दी गईं थीं।

अब वोडाफोन आईपीएल प्रचार मैसेज में गफलत की बात स्वीकार कर रहा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वोडाफोन ने आईपीएल प्रचार योजना में इस गलती की पहचान शुक्रवार देर रात कर ली थी। “गलती हमारी तरफ से यह थी कि हमने सोचा कि केकेआर और सीएसके फाइनल में खेल रहे हैं।” वोडाफोन के प्रवक्ता ने कहा कि बाद में इस गलती में सुधार कर लिया गया था। कंपनी ने साथ ही कहा कि यह घटना केवल हैदराबाद में हुई थी और किसी अन्य शहर से इसका कोई लेना-देना नहीं है।

आईपीएल और कोलकाता नाइट राइडर्स की वेबसाइट पर भी गड़बड़ी का शक है। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक फेसबुक पर किसी ने नाइट राइडर्स की अधिकारिक वेबसाइट के पेज को पोस्ट किया, जिसमें ये कहा गया था कि चार दिन बाद कोलकाता और चेन्नई का मुकाबला होने वाला है। गौर करने वाली बात ये है कि स्क्रीन के पेज में जो वक्त दिखाया गया था वो चार दिन सात घंटे 41 मिनट पहले का था और तब तक एलिमिनेटर और दूसरा क्वालीफायर भी नहीं हुए थे। ऐसा ही एक पोस्ट 23 मई को आईपीएल की आधिकारिक वेबसाइट पर था, जिसमें कहा गया था कि अगले मैच में दो दिन 10 घंटे बाकी हैं और ये मुकाबला दिल्ली और चेन्नई में होगा। सवाल ये उठता है कि पहले ये कैसे बता दिया गया कि मुकाबला दिल्ली और चेन्नई में होगा, जबकि चेन्नई और मुंबई का मुकाबला हुआ भी नहीं था।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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3 thoughts on “आईपीएल के फाइनल में आने वाली टीमें फिक्स थीं या पूरा तमाशा ही फिक्स था?

  1. लोचा है भाई सब लोचा है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! …………

    क्या बताये इस आई पी एल के बारे में …

    सब जनता को उल्लू बनाने का धंधा है

  2. अब आप ही देखिये क्या कहेंगे इन सबको……. मामला बड़ा गंभीर है ! ये मैच फिक्स नहीं हो रहे है ये हम सब खेल प्रेमियों , भारतीयों की जेबों पर डाका डाला जा रहा है …….
    आम आदमी खेल देखने में विश्वाश रखता है , जबकि सट्टा लगाने वाले फिक्सिंग पर ?? तभी तो इतनी भरी भरी रकम दे कर खिलाडियों को खरीदा जाता हैं !
    इन बड़े फिक्स होने वाले खेलो के चलते … भारत के दुसरे खेल लगभग खतम हो चुके हैं ?? अगर दुसरे खेल ज़िंदा रखने है और खेल प्रेमियों को जीतना है तो ?? ये फिक्सिंग बनद करनी पड़ेगी ?? और हमे नहीं लगता ऐसा होने वाला है……..
    अगर ऐसा ही चलता रहा तो दुसरे खिलाडियों और खेल प्रेमियों को सड़क पर उतरना पडेगा ??? ये चोर बाजारी , भ्रष्टाचारी आई पी अल को बांध करवाने के लिए………
    आपकी क्या राय है ???????????

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