जानिए कुमारस्वामी के फर्ज़ी खबरनुमा विज्ञापन की कहानी, वृंदावन के बाबा की जुबानी

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– स्वामी बालेंदु –

कुछ सप्ताह पहले अखबार में एक बड़ा विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। इसने मेरा ध्यान भी खींचा क्योंकि इसका संबंध इसी विषय से था। मैंने आपको दिखाने के लिए इसे सेव कर लिया। यह पूरे पेज का विज्ञापन था, जो पहले और आखिरी पेज पर प्रकाशित हुआ था। यह हिंदी में ही था। मैं इसके कुछ महत्वपूर्ण हिस्से आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूं।

यह एक आयोजन का निमंत्रण था, जो दो पृष्ठों में था। इसके मध्य में एक व्यक्ति, ‘ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी’ का चित्र था। विज्ञापन इस पंक्ति से शुरू होता है, ‘ 31 करोड़ लोगों को अपने दु:खों और तकलीफ से मुक्ति मिली। ’ और विज्ञापन में इसके समर्थन में कई लोगों के बयान और चित्र दिए गए थे।

इसमें एक लडक़ी बताती है, ‘‘पढ़ाई-लिखाई में मुझे शानदार नतीजे मिले’’ जबकि एक अन्य विद्यार्थी ने लिखा, ‘‘अंतत: मुझे अपने पसंदीदा संस्थान में दाखिला मिल गया।’’ ‘‘मुझे कैंसर से छुटकारा मिल गया। मेरे पिता बेहद बीमार थे और अब वह स्वस्थ हो गए हैं।’’ ये सभी बीमारियों की उस लंबी सूची में से लिए गए उदाहरण हैं जिनका स्वामी ने कथित तौर पर इलाज किया: प्रोस्टेट कैंसर, महिलाओं के रक्तस्राव की समस्याओं, मुंहासे, अवसाद, मधुमेह, पैरों में सूजन, डॉक्टरों द्वारा लाइलाज करार दिए गए कैंसर और ऐसी कई बीमारियों का तथाकथित इलाज। फेहरिस्त यहीं नहीं रुकती और दावा तो यहां तक किया गया है कि ब्रेन ट्यूमर को एक मंत्र के जरिये ठीक कर दिया गया, पीडि़त महिला की मृत्यु होने से ठीक पहले और एक अंधे व्यक्ति की दृष्टि लौट आई, जबकि उससे पहले चार बार की गई सर्जरी बेनतीजा रही थी। कुमार स्वामी का दावा है कि उन्होंने इन सभी का इलाज अपने मंत्रों और आशीर्वाद से कर दिया।

पेपर के एक ओर भारतीय लोगों के बयान हैं कि कैसे कुमार स्वामी ने उनकी मदद की तो दूसरी ओर विदेश में बसे भारतीय मूल लोगों के। इन लोगों के साथ उन्होंने एक और छोटा लेख प्रकाशित किया, जिसमें विदेश में उनकी उपलब्धियों का बखान किया गया है। इसमें कहा गया है कि कुमार स्वामी को उनके कार्यों के लिए कनाडा और अमेरिका की सरकारों ने भी सम्मानित किया है। अमेरिकी सीनेट और जनरल एसेंबली ने कथित तौर पर उन्हें सम्मानित करते हुए एक सरकारी प्रमाण पत्र दिया जिस पर उस आयोजन के स्पीकर और अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामा के हस्ताक्षर थे। बताया गया है कि ओबामा के प्रतिनिधि ने ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी को न्यू जर्सी में यह सर्टिफिकेट दिया। इस सर्टिफिकेट की बहुत छोटी तस्वीर उन्होंने छापी है। बताया गया है कि इस सर्टिफिकेट में लिखा है कि कुमार स्वामी विश्व के सर्वाधिक सम्मानित संत और दुनिया के सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक संगठन के लीडर हैं। अरबों लोग एकजुट हुए, पीड़ा और दु:ख से उन्हें छुटकारा मिला, उनके बीच भाईचारे का संबंध बना और उन्होंने जीवन में सफलता प्राप्त की।

इस क्लिपिंग में कहा गया है कि विश्व में कुमार स्वामी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते कनाडा की संसद ने उन्हें अपने सांसदों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों से मिलने के लिए आमंत्रित किया। कनाडा सरकार के आर्थिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ने कनाडा सरकार की ओर से उन्हें सम्मान पत्र दिया, जो अमेरिका से मिले ऐसे ही सर्टिफिकेट जैसा था। उन्होंने कुमार स्वामी के लिए एक विशेष समारोह का आयोजन किया और कहा कि दुनिया भर में लोगों का मार्गदर्शन करने और उन्हें प्रबुद्ध करने में उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित करते हुए कनाडा सरकार गर्व का अनुभव कर रही है।

अब मैं इंटरनेट पर खंगाल रहा हूं कि अमेरिका और कनाडा की सरकारों और संसदों की ओर से दिए गए उन सभी आधिकारिक सम्मानों के बारे में कोई तो जानकारी मिले, लेकिन मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। आपको नहीं लगता कि इनका कहीं और भी तो जिक्र होना ही चाहिए था? मुझे पता है कि इस डायरी के तमाम पाठक अमेरिका और कनाडा में भी रहते हैं। अगर आपको अपनी एसेंबली में हुए ऐसे किसी आयोजन की जानकारी मिले या आपको पता चले कि कुमार स्वामी ने आपकी सीनेट में लेक्चर दिया था, तो कृपया मुझे भी सूचित करें। मेरा मानना है कि कनाडा और अमेरिका की जनरल एसेंबली और संसदों के पास कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण काम हैं, बजाय इसके कि वे ऐसे भारतीय उपदेशक का सम्मान करते फिरें, जिसके बारे में उसके देश के ही अधिकांश लोगों ने न तो कभी कुछ सुना हो और न ही उसके बारे में कुछ जानते हों।

अखबार में विभिन्न भारतीय राजनेताओं के चित्र प्रकाशित हैं, जो ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी से आशीर्वाद लेते हैं। यहां 1980 के दशक में यहां प्रसारित होने वाले टीवी सीरियलों के कलाकारों के चित्र भी दिए गए हैं। इन सभी लोगों ने 15 साल पहले कभी न कभी धार्मिक फिल्मों में काम किया है और जाहिर है जिन आयोजनों में उन्हें बुलाया जाता रहा होगा, वे जाते रहे होंगे। मुझे पता है कि बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री हेमा मालिनी, जो अब 62 वर्ष की हैं, जब किसी कार्यक्रम में आमंत्रित की जाती हैं, तो कलाकारों का एक बड़ा दल उनके साथ होता है और उन्हें तथा अन्य कलाकारों को बुलाने में लाखों रुपये का खर्च आता है।

यहां तो लोग इन सभी कलाकारों को जानते हैं और वे कुमार स्वामी को भी जानते हैं, भले ही आपने उनके बारे में कभी न सुना हो। धर्म-अध्यात्म से जुड़े भारतीय टीवी चैनलों पर वह दिखते रहे हैं। उनकी फीस चुकाकर वे वहां अपने विज्ञापन प्रसारित कराते हैं। अध्यात्म का पैकेज बेचने का यह उनका और इन टीवी चैनलों का तरीका है।

आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस विज्ञापन का उद्देश्य क्या है। वे लोगों को कुमार स्वामी से मिलने के लिए और इस मौके पर एक मंदिर के लिए दान देने के लिए बुलाते हैं, जिसे वह बनवाना चाहते हैं। 108 एकड़ भूमि पर वह राधा कृष्ण स्वर्ण मंदिर बनवाना चाहते हैं, सोने से बना एक विशाल मंदिर, जिसके निर्माण पर 5 लाख करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

बहरहाल, उनका कहना है कि वे यह मंदिर बनवाने वाले हैं और इसके लिए वे एक भारी-भरकम रकम खर्च होने का अनुमान भी प्रस्तुत कर रहे हैं। कौन जाने यह मंदिर बनवाने के लिए उन्हें यह रकम एक साथ मिलेगी या नहीं? हालांकि, यह विज्ञापन सीधे तौर पर विशेष रूप से गरीबों को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें यह भी नहीं पता है कि इस आंकड़े में कितने शून्य लगते हैं। यह विज्ञापन उन लोगों से मुखातिब है, जिनके पास ज्यादा कुछ नहीं है और जो ज्यादा नहीं जानते, लेकिन जिनके मन में आकांक्षाएं हैं। हो सकता है कि वे बीमार हों और अस्पताल जाने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे न हों, लेकिन वे वहां जाते हैं, प्रार्थना करते हैं और कुछ बेहतर होने की आस में दान देते हैं। दूसरे लोग पढ़ते हैं कि यह व्यक्ति कितना प्रसिद्ध है, यहां तक कि ओबामा भी उसका सम्मान करते हैं। तो  ऐसे लोग उनको देखना, उनसे मिलना और उनका आशीर्वाद लेना चाहते हैं। फिर वे जाते हैं और दान देते हैं।

संक्षेप में कहें तो, यह विज्ञापन दान बटोरने के लिए है। हो सकता है कि वे मंदिर कभी बनाए ही नहीं, लेकिन दान बटोरने का काम वे पूरे देश में कर सकते हैं और इस तरह वे अमीर होते चले जाएंगे! देखिए, वे गरीब लोगों को कैसे बुद्धू बना रहे हैं। गरीब लोग जो कुछ भी मामूली रकम दे सकते हैं, उससे ये लोग अपना धंधा चलाते हैं और वह भी यह कहते हुए कि वे मंदिर बनवाएंगे। अगर इस धन का उपयोग शिक्षा देने के लिए, विद्यालयों के निर्माण में और शिक्षकों को वेतन देने में किया जाए तो कितने बच्चे शिक्षित हो सकते हैं और अपनी जिंदगियां बदल सकते हैं?

(वृंदावन में श्री बिन्दु सेवा संस्थान चलाने वाले स्वामी बालेंदु  ने यह आलेख कुछ महीनों पहले अपनी वेबसाइट www.jaisiyaram.com पर छापा था। उनका मानना है कि धर्म की आड़ में दुकानदारी कर रहे ढोंगियों को बेनक़ाब करने की बेहद जरूरत है। श्री बालेंदु गरीब बच्चों के लिए एक शैक्षिक संस्थान चलाते हैं और उनका स्कूल भी धर्म के नाम पर मचाई जा रही लूट के खिलाफ प्रचार-प्रसार में जुटा है। हालांकि उनके संस्थान के विषय में तो मीडिया दरबार को अधिक जानकारी नहीं है, लेकिन इस आलेख में रखे गए विचार और तथ्य पूरी तरह परखे गए और खरे हैं।)

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9 thoughts on “जानिए कुमारस्वामी के फर्ज़ी खबरनुमा विज्ञापन की कहानी, वृंदावन के बाबा की जुबानी

  1. bhagwaan ko itne vishal mandir ki jroorat hai kya maine toh sunaa hai ke bhagwaan insaano mein baste hai toh ye mahatmaa garibon ki bhalaai karen bajaye mandiron mein paisa kharchne mein aise dhongi mahatmaaon ko goli maaro jo paani tak bech kar aam aadmi ki bhavna se khelte hain

  2. मीडिया दरबार लोगो को जागरूक कर रहा है एस सब के लिया धन्वाद
    रमेश चोप्रा मजीठिया
    प्रेस रिपोर्टर दैनिक जागरण & सेनिओर executive अदलखा Blood बैंक अमृतसर

  3. सर हमेश हिन्दुओं को बदनाम करने की आदत बंद करे. कभी आप जमा मस्जिद, गोल्डेन टेम्पले, अजमेर दरगाह, देओबंद मदरसा, चुर्च की लूट के बारे में भी लिखा करे.

    1. महोदय, मीडिया दरबार किसी को बदनाम करने के लिए काम नहीं करता. हमारे निशाने पर ऐसे ठग होते हैं जिनकी कोई जात या कोई धर्म नहीं होता. मीडिया दरबार पर पौल दिनाकरण के बारे में लिखा गया है और आप के पास किसी पारसी, मुस्लिम या किसी अन्य धर्म के ठग के बारे में कोई तथ्यात्मक सूचना है तो हमें लिख भेजें और फिर देखें.. और हाँ, यदि आप इन ठग बाबाओं के कोई ख़रीदे हुए गुर्गे हैं तो आप की किसी को कोई परवाह नहीं..

    2. कमाल कर दिया डॉक्टर साहब.. कुछ न कुछ लिखना था सो लिख दिया आपने…? अरे बाबा, हिंदुओं के देश में किस धर्म के नाम पर लूटेंगे ये ढोंगी? और किस मुस्लिम या इसाई बाबा की बात सुनते हैं लोग? पता नहीं आप हिंदू धर्म के समर्थक हैं या दुश्मन? आप धर्म का नहीं, इसकी बुराइयों का बचाव कर रहे हैं।

  4. मुझे इसी फेहरिस्त में और बाबाओ के नाम उजागर होने का इंतज़ार है जो ठगी कर रहे है भोले जन मानस के साथ…

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