दिलीप पडगांवकर के आईएसआई रिश्तों की हो जांच-तजिंदर पाल सिंह बग्गा

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जम्मू-कश्मीर के ऊपर सरकार द्वारा पूर्व पत्रकार दिलीप पडगांवकर के नेतृत्व में बनाई गई कमेटी द्वारा रिपोर्ट को, जो गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई है, भगत सिंह क्रांति सेना इस विभाजनकारी, विनाशकारी, दुर्भाग्यपूर्ण,घिनौनी और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए खतरनाक रिपोर्ट को तुरंत,तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग करता है.

कमेटी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में चाहे वो धारा 370 को विशेष अधिकार के साथ स्थायी किये जाने का मुद्दा हो,या 1952 के बाद के जम्मू कश्मीर के सभी केंद्रीय कानूनों की समीक्षा करने की बात, चाहे वो अलगाववादियों से वार्ता की बात,या अफ्स्पा पर विचार करने की मांग हो चाहे संसद द्वारा बनाये गये कानूनों को राज्य पर ना लागू किये जाने की बात, हमारा मानना है कि ये सभी ऐसी बातें हैं जो अलगाववादियों, राष्ट्रद्रोहियो और भारत का विभाजन चाहने वालो को होसला बढ़ाएंगे. भगत सिंह क्रांति सेना का मानना है कि धारा 370 कश्मीर समस्या हल करने में सबसे बड़ा रोड़ा है , और इसे जितनी जल्द हो हटाया जाना चाहिए.

इसके अलावा कमेटी द्वारा पेश की गयी रिपोर्ट में पाक अधिकृत कश्मीर की जगह पाक प्रशासित कश्मीर लिखना एक नये विवाद को जन्म देना है. भगत सिंह क्रांतिसेना इसका कड़ा विरोध करती है. पूरी रिपोर्ट में अलगावादियों से वार्ता,सेना पर पत्थर फेकने वाले आतंकवादियो को केस माफ़ करने और राहत देने की सिफारिश तो बड़े जोर-शोर से की गई है, लेकिन कही भी पांच लाख कश्मीरी पंडित परिवारों के पुर्नवास के लिए कोई ठोस नीति का जिक्र नही किया गया है.

हमारा मानना है कि कश्मीर पर बनी कोई भी रिपोर्ट बिना कश्मीर पंडितो के पुर्नवास के उपाय के बिना कोई मायने नहीं रखती. हम इस रिपोर्ट को तुरंत रद्द करने की मांग करते है. जिस तरह पहले भी दिलीप पंडगावकर का नाम आईएसआई प्रायोजित गुलाम नबी फाई से जुड़ता रहा है ,इस रिपोर्ट के पीछे किनका हाथ है , भगत सिंह क्रांति सेना इसकी जांच की मांग करता है.अंत में भगत सिंह क्रांति सेना चेतावनी देता है की भविष्य में अगर पंडगावकर द्वारा बनाई गयी रिपोर्ट को अगर लागू किये जाने की कोशिश की गयी तो देश भर में इसका कड़ा विरोध किया जायेगा और इस विरोध की आग से दिलीप पंडगावकर,रिपोर्ट तैयार करने वाले बाकी सदस्य,और अन्य दोषी भी अछूते नही रह पाएंगे. (प्रेस विज्ञप्ति)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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3 thoughts on “दिलीप पडगांवकर के आईएसआई रिश्तों की हो जांच-तजिंदर पाल सिंह बग्गा

  1. Jouranlist fraternity ko badnam karke rakh diya hai in dalalon ne. Kuchh aur so called bade naam bhi aye the khabron mein kuchh samay pahale. but what happened nothing. They should really be punished.

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