गाली सुनने और FRAUD कहलाने के बदले 21 लाख की ‘दक्षिणा’ चाहिए निर्मल बाबा को

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पहले से ही विवादों में घिरे और अदालतों के चक्कर में पड़े निर्मल बाबा ने अपने खिलाफ हो रहे नकारात्मक प्रचार को रोकने के लिए भी अदालत की ही शरण ली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ कथित तौर पर ‘आपत्तिजनक’ लेख लिखने वाले वेबसाइट भड़ास4मीडिया.कॉम के मालिक यशवंत सिंह को नोटिस जारी कर तलब किया है। अदालत ने निर्मल बाबा को भी उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर और शिकायतों की प्रतियां पेश करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने प्रतिवादी और निर्मल बाबा को 30 मई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

निर्मल जीत सिंह नरुला उर्फ़ निर्मल बाबा ने इस बार भी अदालत में उन्हीं घिसे-पिटे तर्कों का सहारा लिया है जिनके सहारे उन्होंने अमेरिकी वेबसाइट हबपेजेस के खिलाफ़ एकतरफा मुकद्दमे में स्टे हासिल किया था। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगातार दुष्प्रचार किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता निर्मल बाबा ने इस मामले में जस्टिस कैलाश गंभीर की बेंच के सामने अर्जी दाखिल कर कहा है कि वादी का 30 टीवी चैनलों में प्रोग्राम आता है। उनके फेसबुक पर 3 लाख 70 हजार फॉलोअर्स हैं। दिलचस्प बात ये है कि इन विज्ञापनों को प्रोग्राम बताकर और फेसबुक पर फर्ज़ी कैम्पेन चलाने की कहानी सुनाकर बाबा खुद को प्रतिष्ठित बता रहे हैं। निर्मलजीत नरुला के वकील के मुताबिक उनके मुवक्किल के खिलाफ न्यूज पोर्टल में दी गई सामग्री से उनकी मानहानि हुई है और उन पर बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि न्यूज पोर्टल में दी गई ऐसी तमाम सामग्री हटाए जाने का निर्देश दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि काफी अरसे से भड़ास मीडिया में करीब 80 आपत्तिजनक लेख लिखे गए हैं। इतना ही नहीं, लेख में ऐसी सामग्री प्रकाशित है, जो मानहानि की श्रेणी में आती है। उन्होंने अदालत से मुवक्किल को 21 लाख रुपये बतौर मानहानि मुआवजे की मांग की है। ग़ौरतलब है कि भड़ास4मीडिया.कॉम ने भी ‘FRAUD NIRMAL BABA’ शीर्षक से एक सीरीज़ चला रखी है जिसमें इस ढोंगी बाबा की पोल खोलने वाले कई लेखकों और पोर्टल के संपादक यशवंत सिंह के कई आलेख प्रकाशित हैं।

उधर यशवंत सिंह ने मीडिया दरबार को बताया कि अभी उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है और उन्हें भी यह बात मीडिया से ही पता चली है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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