विल स्मिथ ही नहीं, टॉमी ली जोंस भी हैं ‘मेन इन ब्लैक’ में खतरों के खिलाड़ी

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दो बार ऑस्कर व चार बार एकेडेमी अवार्ड के लिए नामांकित हुए अमेरिकन अभिनेता व निर्देशक टॉमी ली जोंस को लोग फिल्म “मेन इन ब्लैक” के “एजेंट के” के रूप में जानते हैं. टॉमी जोंस इस फिल्म की दोनों सीरीज में भी थे और अब वो “मेन इन ब्लैक 3” में भी हैं. इस फिल्म में हमेशा की तरह उनका किरदार गंभीर किस्म का है. अभिनेता विल स्मिथ और उनकी जोड़ी परदे पर खूब जमती है जहाँ एक ओर वो गंभीर दिखाई देते हैं वहीँ दूसरी ओर विल दर्शकों को हँसाते हैं.

जिस तरह हम विल स्मिथ के बिना फिल्म “मेन इन ब्लैक” की कल्पना नही कर सकते उसी तरह टॉमी जोंस के बिना भी यह फिल्म अधूरी ही है. “मेन इन ब्लैक” यानि टॉमी ली जोंस और विल स्मिथ की जोड़ी.  टॉमी ली जोंस ने किसी भी अभिनय स्कूल से अभिनय की ट्रेनिंग नही ली. टॉमी ने अपने अभिनय कैरियर की शुरूआत सन 1970 में फिल्म “लव स्टोरी ” से की जो खासी हिट रही.

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नही देखा. एक के एक बाद एक उनकी फ़िल्में आती गयी. उन्होंने लाइफ स्टडी, एलिजा होरोस्कॉप आदि अनेको टी वी सीरीज में भी काम किया. सन 1989 में आई फिल्म “लोन सम डव” के लिए टॉमी का एम्मी अवार्ड के लिए नामांकन हुआ. टॉमी ने “जे एफ़ के”, द फ्युज़िटीव और “मेन इन ब्लैक” आदि फिल्मों में उच्च अभिनय किया और दर्शकों के बीच लोकप्रिय हुए और उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए ऑस्कर व गोल्डन ग्लोब अवार्ड भी मिले. फिल्म “नो कंट्री फॉर ओल्ड मैन” और “वैली ऑफ एलाह” इन दोनों ही फिल्मों में काम करके टॉमी ने अभिनय की उचाईयों को छूआ. टॉमी की आने वाली फ़िल्में हैं होप स्प्रिंग्स, लिंकोलं और एम्परर.

सोनी पिक्चर्स की फिल्म “मेन इन ब्लैक 3’ में टॉमी का साथ देगें होलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता विल स्मिथ और अकेडमी अवार्ड से नामांकित अभिनेता जोश ब्रोलिन. 10 साल बाद आ रही सोनी पिक्चर्स की इस फिल्म ‘मेन इन ब्लैक 3’ के निर्देशक हैं बैरी सोंनेनफेल्ड और निर्माता हैं वाल्टर ऍफ़ पार्क्स एंड लौरी मैकडोनाल्ड. फिल्म के लेखक हैं इटेन कोहेन, एडिटर हैं डोन ज़िमेरमन. वैसे तो फिल्म में संगीत दिया है डैनी एल्फमैन ने लेकिन लोकप्रिय पॉप सिंगर पिटबुल ने भी एक गाना विशेष रूप से गाया है “बैक इन टाइम”. (प्रेस-विज्ञप्ति)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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