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पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को निर्मल बाबा को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. अररिया कोर्ट ने निर्मल बाबा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद उन्होंने अपने गैर जमानती वारंट को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

निर्मल बाबा के वकील ने मंगलवार को दलील दी थी कि एफआईआर के बाद जब तक आरोपी को अपना पक्ष रखने का मौका न दिया जाए, तब तक गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं होना चाहिए. न्यायाधीश समरेन्द्र प्रताप सिंह ने निर्मल बाबा के अधिवक्ता विंध्याचल सिंह की ओर से पटना उच्च न्यायालय में सोमवार को दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था.

निर्मल बाबा के अधिवक्ता श्री सिंह ने न्यायालय को बताया कि अररिया कोर्ट से बाबा के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट से पहले उन्हे कोई नोटिस (सम्मन) और जमानती वारंट जारी नहीं किया गया है. उन्होंने इसी आलोक में न्यायालय से उनकी गिरफ्तारी वारंट निरस्त करने का आग्रह किया. गौरतलब है कि निर्मल बाबा के खिलाफ राकेश कुमार सिंह ने फारबिसगंज थाने में धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज कराया था और इसी मामले में अररिया के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सत्येन्द्र रजक ने उनकी गिरफ्तारी के लिए गैर जमानती वारंट जारी किया था. वारंट जारी होने के बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक शिवदीप लांडे ने पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में एक पुलिस दल का गठन किया था.

उधर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने टेलीविजन पर चले रहे निर्मल बाबा के कार्यक्रम को लेकर केन्द्र सरकार
से अपना पक्ष रखने को कहा है. निर्मल बाबा ऊर्फ निर्मलजीत सिंह नरूला के टेलीविजन पर चले रहे कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुये न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह और न्यायमूर्ति वी.के.दीक्षित की खंडपीठ ने केन्द्र सरकार से अपना जवाब आगामी 16 जुलाई तक देने को कहा है.

याचिका में निर्मल बाबा के कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया गया है. याचिका में कहा गया है कि निर्मल बाबा पर धोखाधडी का मामला देश की कई अदालतों में चल रहा है. चल रहे कार्यक्रम से लोगों में भ्रम फैल रहा है. याचिका के अनुसार यह केबल टीवी नेटवर्क कानून 1995 का उल्लंघन भी है.

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 thoughts on “निर्मल बाबा को मिली हाईकोर्ट की ‘किरपा’, बच गए फिलहाल गिरफ्तारी से”
  1. इस पाखंडी और धूर्त निर्मल बाबा नाम के ठग में सड़क पे जूता बजना चाहिए इस जैसे हरामी के चक्कर में अच्छे लोग बदनाम होते हैं……..लेकिन ये अकेला ही नहीं इसके भक्त भी का धूर्त नहीं हैं जो लालची भी है व लोभवश ही इससे जुड़े है……आज समाज में हर कोई ये सोच रहा है की कहीं से हराम का माल मिल जाये इसलिए वो इनके चक्कर में आता है………………

  2. Why should the dalal of shaktiyan should go to High court and not ask his shaktyan to take care of him.Will his deciplaes / advocate/ baba answer.As such high court is more powerful than the powers sold by baba.

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