-रामकिशोर पंवार-

ताप्तीचंल में बसे मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले की बद्किस्मती देखिए कि उसे जिले की पांच साल तक राज काज करने वाली लोकसभा सदस्य से लेकर सहायक आयुक्त एवं परियोजना अधिकारी अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की प्रमुख तक फर्जी प्रमाण पत्र धारक आदिवासी महिला मिली है जिसमें एक की जांच में सिद्ध हो चुका है कि वह फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रही है लेकिन मामला को न्यायालय के विचाराधीन बता कर अजाक मंत्री जी उसके पालनहार बने हुए हैं दूसरी आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि लोक सभा सदस्य के मामले में अब डी एन टेस्ट के बाद न्यायालय का निर्णय आना बाकी है।

दोनों ही मामलों में जांच में पाया गया है कि जाति प्रमाण पत्र धारक महिलाएं पिछड़ी एवं सामान्य वर्ग से आती है। इन सबसे हट कर बात करें तो सूरत और शक्ल से दोनो ही कहीं से कहीं तक आदिवासी समाज की नहीं लगती है। दोनो को न तो गोंडी भाषा का ज्ञान है और न वे बोलना, लिखना, पढ़ना जानती है। बैतूल जिले की पहली आदिवासी महिला सासंद श्रीमति ज्योति बेवा प्रेम धुर्वे पर जहां एक ओर पंवार समाज की बेटी होने का आरोप है वहीं दूसरी ओर अनुसूचित जाति कल्याण परियोजना की अधिकारी श्रीमति उषा सिंह सामन्य वर्ग क्षत्रिय राजपूत समाज की बेटी है। दोनो के दस्तावेजों की जांच के बाद प्रदेश स्तरीय छानबीन समिति से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी एवं पद पाने की बात स्वीकार करने के बाद दोनो को ही आदिवासी समाज के ही ताकतवर नेता , मंत्री , बचाने में लगे हुए है।

जहां एक ओर ज्योति बेवा प्रेम धुर्वे के चुनाव को निरस्त करने की न्यायालीन कार्रवाई चल रही है वहीं दूसरी ओर दूसरे मामले उषा अजय सिंह के मामले में कथित न्यायालीन हो जाने की बाते कह कर उसे जीवनदान दिया जा रहा है। सहायक आयुक्त एवं अजाक परियोजना अधिकारी के दो पदो पर पदस्थ श्रीमति उषा अजय सिंह मूल निवासी भोपाल बैतूल जिले में कार्यरत है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के दस्तावेजो के आधार पर आरक्षण का भरपूर लाभ उठाने का सिलसिला इन दिनो बैतूल जिले में बहुतायत में देखने को मिल रहा है। खास तौर पर जिले में शासकीय उच्च पदो पर आसिन अधिकारी स्वयं इसमें लिप्त नजर आ रहे है।

बैतूल जिले में परियोजना अधिकारी एवं सहायक आयुक्त के दो-दो पदो का प्रभार संभालने वाली महिला अधिकारी श्रीमति उषा अजय सिंह की वर्ष 2009 से फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने की जांच राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति द्वारा जांच की गई जिसमें इनके द्वारा कूटरचित तीन जाति प्रमाणपत्र को निरस्त किया गया। कार्यालय आयुक्त अनुसूचित जाति विकास भोपाल पत्र क्रमांक अनुसंधान/2009/7988 द्वारा जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने एवं गलत जातिप्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों एवं इनके विरूद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के आदेश भी जारी हुए थे। लेकिन प्रदेश के एक दबंग मंत्री का संरक्षण होने के कारण तीन जिलो के कलैक्टर इस काम को अंजाम नहीं दे पाए।

विदित रहे कि मप्र शासन के सामान्य प्रशान विभाग के राजपत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि छानबीन समिति द्वारा यह पाये जाने पर कि प्रमाण पत्र फर्जी एवं गलत हैतो ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त, कलैक्टर द्वारा संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। तथा उसके विरूद्ध अनुशासनात्मक एवं विभिन्न अधिनियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जावेगी। वहीं नियम में यह भी है कि प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की गई जांच में यह पाया जाता है कि जाति प्रमाण पत्र फर्जी हो तथा जिसके आधार पर लाभ या सुविधाएं ली गई है उसकी पूरी भरपाई करनी पड़ेगी तथा शासन द्वारा आज तक उस पर खर्च की क्षतिपूर्ति कर पद से पृथक कर उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जावेगी।

इसके बावजूद बैतूल परियोजना अधिकारी एवं प्रभारी सहायक आयुक्त की उच्चस्तरीय जांच में साबित हो गया है कि यह फर्जी जातिप्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रही है। लेकिन उन पर कार्रवाई का न होना प्रशासनिक कमजोरी को दर्शा रहा है। सूत्र बताते है कि उक्त महिला अधिकारी को प्रदेश के एक मंत्री का जबरदस्त संरक्षण मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व में जब भी किसी जिले में जाति प्रमाण पत्र का विवाद गहराया है वहां से महिला अधिकारी को सुरक्षित निकालकर नए जिले में पदस्थापना कर दी जाती है वहीं उक्त अधिकारी द्वारा जहां भी पदस्थापना हुई वहां दो पदो का लाभ लेने की बात भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

फिलहाल बैतूल जिले में पदस्थ विवादित अधिकारी पर जिला प्रशासन की भी नासमझी दिखाई दे रही है जिला प्रशासन द्वारा दोनो सुपर क्लास के पदो की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी को सौंपना आश्चर्य की बात नजर आ रही है पूर्व में भी अधिकारी अपनी राजनीति पहुंच की वजह से जिला प्रशासन पर दबाव बनाकर अपने दोनो पदो पर काम बिना किसी डर के आसानी से कर रही है। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने की बात मय प्रमाण साबित होने पर जिलास्तरीय कार्रवाई नहीं होने का खासा कारण भी सामने नजर आ रहा है सूत्रो की माने तो एक बड़े मंत्री का संरक्षण जिले की एक खास महिला अधिकारी के प्रकरण में कार्रवाई नहीं होने देने में कारगर साबित हो रहा है।

विदित रहे कि बैतूल में वर्तमान में पदस्थ महिला अधिकारी पूर्व में सिवनी जिले में पदस्थ थी वहां पर यह पूर्णत: साबित हो गया था कि वह फर्जी कूटरचित जाति प्रमाणपत्र के आधार पर उच्च पद को हथियाए बैठी है तब वहां के विभिन्न आरक्षित अनुसूचित जाति के संगठनो द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया। जिस पर बवाल होने यहां तक की भोपाल की छानबीन समिति द्वारा इनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर पड़ौसी जिले के पूर्व कलेक्टर को आदेश मिले थे कि उक्त आरोपी के खिलाफ 15 दिनो में दंडात्मक कार्रवाई करे। किंतु मप्र शासन के आदेश के बाद भी उक्त कलेक्टर द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और उक्त महिला अधिकारी को वहां से बचाकर बैतूल स्थानांतरित कर दिया गया है। वर्तमान में बैतूल में उच्च पद पर आसीन महिला अधिकारी पैसे की ताकत के बल पर बे खौफ होकर बैतूल में शासकीय सेवाएं दे रही है। वहीं आरक्षित वर्ग की नहीं होने के बावजूद भी आरक्षण का लाभ ले रही है।

शासकीय सेवा में प्रयुक्त जाति प्रमाण पत्र की जांच में तहसीलदार द्वारा यह बताया गया कि यह जाति प्रमाण पत्र उनके कार्यालय से जारी नहीं किया गया है। जिस पर पुस्तक क्रमांक, प्रमाणपत्र क्रमांक दोनो ही अंकित नहीं है। उक्त अधिकारी के स्कूल से निकाली गई जानकारी में वहां के प्राचार्य ने स्पष्ट लिख कर दिया है कि यह सामान्य जाति की श्रेणी में आते है एवं इन्हें हमारे विद्यालय से किसी प्रकार की छात्रवृत्ति भी प्रदान नहीं की गई। मौजूदा समय में मकड़ई रियासत के राज कुमार एवं प्रदेश सरकार के अजाक मंत्री कुंवर विजय शाह के अधिनस्थ अजाक विभाग में दो – दो पदो पर कुण्डली मार कर बैठी फर्जी आदिवासी महिला अधिकारी के मामले में अजाक मंत्री एवं राज्यमंत्री के बीच काफी मतभेद बैतूल जिले में देखने को मिले।

जहां एक ओर राज्यमंत्री श्री खटीक ने स्पष्ट शब्दो में कहा कि उनका विभाग फर्जी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेगा लेकिन कैबिनेट मंत्री अधिकारी का मामला न्यायालय में विचाराधीन होना बता कर उसके संरक्षक के रूप में खुल कर सामने आ गए हैं। बैतूल जिले के प्रभारी मंत्री रहे कुंवर विजय शाह का अकसर बैतूल आना – जाना बना रहता है। ऐसे में मंत्री के साथ उनकी सरकारी कार में घुमने वाली फर्जी महिला अधिकारी को बचाने के पीछे मंत्री जी का भावनात्मक रिश्ता समझ के बाहर की बात है। बैतूल जिले में डेढ़ सौ से अधिक फर्जी जाति प्रमाण पत्रो के मामले सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा कर थक चुके है लेकिन आदिवासी समाज के हक पर दूसरे समाज के लोग डाका डाल कर मजे मार रहे है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

8 thoughts on “आदिवासी जिले की विडंबना: सांसद भी फर्ज़ी आदिवासी, अधिकारी भी फर्ज़ी आदिवासी”

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