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जमानत मिली तो राजा ने समर्थकों पर फेंकी फ्लाइंग किस, मीडिया पर मलानत

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-रेया शर्मा-

आखिरकार रानी के बाद राजा को भी जेल से बाहर जाने का मौका मिल ही गया… और बाहर आकर राजा साहब के अमले-फमलों ने भी फटकार लगाई मीडिया को ही। फटकार क्या बाकायदा गुत्थम-गुत्था भी हो गई कुछ मीडियाकर्मियों से। माइक फेंक दिए गए… भगा दिया गया… साथ ही चेतावनी भी दी गई कि इधर दिखे तो टांगें तोड़ दी जाएंगी।

दरअसल पूर्व संचार मंत्री ए. राजा को 15 महीनों बाद जमानत मिली है। उनके सपनों की रानी कनिमोझी को जमानत मिलने के करीब साढ़े पांच महीने बाद। पटियाला हाउस कोर्ट में 1.7 लाख करोड़ के 2जी घोटाले के मुख्‍य आरोपी ए. राजा को महज़ 20 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का फैसला कर दिया गया। 2 फरवरी 2011 से तिहाड़ में बंद राजा की रिहाई के बाद 2जी घोटाला मामले में अब कोई भी आरोपी जेल में नहीं है। 13 आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। 41 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।

राजा मंगलवार को कोर्ट में खासे बेचैन दिख रहे थे। बेसब्री से इंतजार कर रहे राजा को जब जज ने अपने पास बुलाया तब भी वे तनाव में दिख रहे थे, लेकिन जब जज ने जमानत का आदेश पढ़कर सुनाया तो उन्‍होंने दोनों हाथ जोड़कर कंधे के ऊपर उठाया। राजा का ऐसा करना उनके दो ढाई सौ समर्थकों को संकेत था कि उन्‍हें जमानत मिल गई है।

इसके बाद अदालत में मौजूद राजा समर्थकों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन कोर्ट से बहार निकलते समय राजा ने ऐसा इशारा कर डाला जो किसी पूर्व कैबिनेट मंत्री के लिए शोभा नहीं देता है। राजा ने अपने समर्थकों की तरफ फ्लाइंग किस फेंका। राजा के वकील ने जमानत के फैसले के बाद कहा कि उनके मुवक्किल ने अदालत का सहयोग किया है।

देर शाम राजा तिहाड़ जेल से बाहर भी आ गए। जमानत मिलने के बाद तिहाड़ से रिहा होकर वे नई दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर पहुंचे जहां उनके समर्थकों ने जमकर हुड़दंग मचाया और मीडिया पर हमला किया। एक निजी चैनल ने दावा किया कि राजा के गांव से करीब 500 समर्थक उनके आवास पर इकट्ठा हुए हैं और उन्हें शराब परोसी गई। इस दौरान बाहर मीडिया के जमावड़े को देखकर समर्थक भड़क गए और कुछ पत्रकारों की माइक और अन्य चीजें फेंकने की कोशिश की। मीडिया वालों को राजा समर्थकों ने उनके आवास के आस-पास भी न फटकने की चेतावनी दे डाली। एक समर्थक तमिल में यह कहते सुना गया, ‘‘इन्हीं मीडिया वालों की वजह से जेल में था हमारा राजा, भगाओ इन स्सालों को…”

बहरहाल, अदालत ने राजा साहब को जमानत देने के लिए छह-सात शर्ते रखीं हैं। राजा को अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करना होगा। वे किसी भी गवाह से किसी तरह का संपर्क नहीं रख सकते हैं और न ही सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। इसके अलावा अदालत जब-जब बुलाएगी, उन्‍हें कोर्ट में हाजिरी लगानी होगी। राजा अदालत की मर्जी के बगैर अपने गृह-राज्‍य तमिलनाडु भी नहीं जा सकेंगे।

उधर राजा की पार्टी डीएमके अभी भी उनके साथ खड़ी दिख रही है। पार्टी के नेता टीआर बालू ने मीडिया को बताया, ‘‘जब तक कोर्ट राजा को दोषी करार नहीं देता वह निर्दोष हैं। पार्टी उनका समर्थन करती रहेगी।”

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राजा को जमानत मिलने पर कहा, ‘‘यह अदालत का फैसला है। मैं इस पर टिप्‍पणी नहीं कर सकता।” उधर बीजेपी ने आरोप लगाया है कि राजा तो छोटी मछली है। 2जी घोटाला मामले में और भी बड़ी मछलियां हैं जिनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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