अदालत ने पुलिस को कहा, दर्ज़ करो निर्मल बाबा के खिलाफ़ ठगी और धोखाधड़ी का मामला

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तनया एवं आदित्‍य ठाकुर की याचिका पर सुनाया फैसला

सीजेएम, लखनऊ राजेश उपाध्याय ने गोमतीनगर थाने को आदेशित किया है कि दिल्ली स्थित कथित धार्मिक गुरु निर्मल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी विवेचना करें. सीजेएम ने बुधवार को यह आदेश तनया ठाकुर (कक्षा बारह की छात्रा) और आदित्य ठाकुर (कक्षा दस के छात्र) द्वारा धारा 156(3) सीआरपीसी के अंतर्गत प्रस्तुत याचिका पर दिया. तनया और आदित्य आईपीएस अधिकारी अमिताभ और सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन के बच्चे हैं. रोहित त्रिपाठी और नीरज कुमार याचीगण के वकील थे.

सीजेएम उपाध्याय ने कहा कि तनया और आदित्य द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर संज्ञेय अपराध बनता है और पर्याप्त आधार है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय श्री भगवन समर्ध बनाम आंध्र प्रदेश सरकार का भी उल्लेख किया, जिसमें इसी प्रकार से एक कथित धार्मिक व्यक्ति द्वारा बच्ची के इलाज़ में ठगी की जा रही थी. तनया और आदित्य ने आवेदन किया था कि निर्मल बाबा द्वारा तमाम लुभावने वादों से आम आदमी को ललचाने और फंसाने तथा अत्यंत सरलीकृत समाधान प्रस्तुत कर लोगों को ठगते का काम किया जाता है. यह धारा 417, 419, 420 आईपीसी के तहत चीटिंग और धारा 508 में ईश्वरीय नाराजगी का भय दिखा कर गलत लाभ लेना है. अतः मामले में एफआईआर दर्ज की जाए.

तनया एवं आदित्‍य ने 10 अप्रैल 2012 को थाना गोमतीनगर, लखनऊ में एफआईआर के लिए प्रार्थना पत्र दिया था और डीआईजी लखनऊ एवं एडीजी, ला ऑर्डर के स्तर पर एफआईआर दर्ज नहीं होने पर कोर्ट में धारा 156(3) सीआरपीसी के अंतर्गत याचिका दायर किया गया था. इसके विपरीत थानाध्यक्ष, गोमतीनगर के 24 अप्रैल की आख्या में यह कहा गया था कि तनया और आदित्य इस मामले से व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं हैं. यह भी कहा था कि उनके द्वारा ठगी और धोखाधड़ी के बारे में कोई साक्ष्य एवं साक्षी नहीं दिया जा सका है, अतः कोई पुष्ट एवं स्पष्ट साक्ष्य नहीं होने के फलस्वरूप थाना स्थानीय पर अभियोग पंजीकृत नहीं किया जा सकता. (भड़ास4मीडिया)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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