‘सबसे ऊपर’ तक पहुंच है पॉल बाबा की, मंतरी-संतरी की क्या बिसात?

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यूपीए की जीत और बजट शांति पूर्वक चलने के लिए भी प्रार्थना करते हैं पॉल बाबा और उनके इस  उपकार के लिए भारत सरकार के मंत्री भी उन्हें देते हैं धन्यवाद भरा पत्र

-लिमटी खरे-

अभी हाल के दिनों में निर्मल बाबा अचानक चर्चा में आये हैं. उनके ऊपर मुख्य आरोप यह है कि वे धर्म के नाम पर अंधश्रद्धा फैला रहे हैं और पैसा कमा रहे हैं. लेकिन निर्मल बाबा अकेले ऐसे आदमी नहीं है जो यह काम कर रहे हैं. लंबे समय से एक ईसाई धर्मप्रचारक पॉल दिनाकरन यही काम कर रहा है. पॉल की पहुंच कितने ऊपर तक है इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि उसके अंधविश्वासी मायाजाल में केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि ऊंची रसूखवाले लोग भी फंसते हैं जिनमें सोनिया गाँधी और उनके कुछ मंत्रियों तथा सांसदों के नाम भी शामिल है.

पॉल का दावा है कि उनके पिता ने ईसा मसीह को साक्षात ना केवल देखा है वरन् उन्हें भी शिक्षा ईसा मसीह के माध्यम से ही दिलवाई है. इस ईसा आशीर्वाद को पॉल ने व्यापार में तब्दील करते हुए पांच हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर लिया है. लेकिन धर्मप्रचारकों के इस धंधे में खुद सोनिया गाँधी शामिल हों यह थोड़ा चौंकानेवाला है. देश के जल संसाधन और अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री का एक पत्र इसी बात का प्रमाण प्रस्तुत करता है. सोनिया घांदी के इशारे पर कुछ सांसदों के पॉल का विशेष सत्र आयोजित किया गया जिसके बाद सरकारी तौर पर पत्र लिखकर न सिर्फ पॉल दिनाकरऩ को धन्यवाद दिया गया बल्कि यह भी कहा गया कि आगे इस तरह की कक्षाएं और आयोजित की जाएंगी.

पॉल दिनाकरन एक संदिग्ध व्यक्तित्व है। वह अंधविश्वास का फायदा उठाकर लोगों से पैसे ऐंठता है। 4 सितम्बर 1962 को जन्मे पॉल दावा करते हैं कि उनके अंदर अपने पिता के जरिए ईसा की आत्मा समा गई है। हालांकि वे एमबीए के विद्यार्थी रहे हैं लेकिन धर्म का उनका धंधा जोरदार है। शायद एमबीए में अर्जित विद्या को उन्होंने धर्म का कारोबार बढ़ाने के लिए बखूबी किया है. उनकी धर्म सभा में महज तीन हजार रूपए में अपने परिवार और बच्चों के लिए प्रार्थना की व्यवस्था की जाती है। पॉल का सालाना टर्न ओवर पांच हजार करोड़ रूपए से अधिक का है।

अकूत संपत्तियां बटोर चुके पॉल बाबा के पास अपना एक विश्वविद्यालय है कोयंबटूबर में. साढ़े सात सौ एकड़ जमीन पर बने इस विश्वविद्यालय के जरिए हर साल साढ़े सात हजार विद्यार्थी तैयार किये जाते हैं. ये सब पॉल बाबा की चंगाई का कमाल है कि उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी को ए ग्रेड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिला रखा है और कारुण्य यूनिवर्सिटी नामक इस विश्वविद्यालय के चांसलर बने बैठे हैं.

पॉल बाबा के प्रवचनों का नौ देशों में प्रसारण होता है और इन्हीं नौ देशों में पॉल बाबा ने 9 विशेष प्रेयर टॉवर बना रखे हैं जहां रोजाना चंगाई बांटी जाती है. पॉल बाबा के भारत में 29 प्रेयर टॉवर हैं. जीजस काल्स नाम से होने वाले इन कार्यक्रमों में प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं और पॉल बाबा को सुनते हैं. लेकिन याद रखिए पॉल बाबा के दरबार में कुछ भी मुफ्त नहीं है. लेकिन पॉल बाबा का मकसद सिर्फ पैसा कमाना भर नहीं होता है. अपने प्रेयर्स के जरिए वे धर्मांतरण को भी बढ़ावा देते हैं.

पॉल बाबा की पहुंच बहुत ऊपर तक है इसलिए उनकी कमाई पर कभी कोई हाथ नहीं डालता है. ईसाई होने के कारण वे सोनिया गांधी के भी कृपापात्र हैं. सोनिया गांधी खुद ईसाई हैं इसलिए वे ऐसी प्रार्थनासभा का महत्व समझती हैं. पिछले साल देश के जल संसाधन राज्यमंत्री मंत्री विन्सेंट एच पाल द्वारा एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था. इस प्रार्थना सभा में सोनिया गाँधी समेत अन्य कई सांसदों ने हिस्सा लिया था. बाद में मंत्री महोदय द्वारा एक पत्र लिखकर पॉल बाबा को इस प्राथना सभा में आने के लिए धन्यवाद प्रेषित किया गया और उनसे देश के सांसदों को पुनः सेवा देने की गुजारिश भी गयी थी ताकि देश को ईसा का आशिर्वाद मिल सके.

रामदेव बाबा ने लंबे समय में संपत्ति बनाई तो निर्मल बाबा के ‘दरबार की किरपा‘ ने कम समय में संपत्ति जोड़ी अब पॉल बाबा की संपत्ति इन सबसे कई गुना अधिक है। जब मीडिया ने निर्मल बाबा पर निशाना साधा तो भाजपा नेत्री उमा भारती ने मीडिया से सवाल दाग दिया था कि निर्मल बाबा दिखते हैं तो पॉल बाबा क्यों नहीं जो पैसे लेकर चंगाई बांटते हैं और धर्मांतरण करवाते हैं? सवाल तो सही है लेकिन उठाये कौन? जब पॉल दिनाकरन को सीधे सोनिया गांधी का संरक्षण प्राप्त होगा तो उमा भारती की आवाज सुनेगा कौन?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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2 thoughts on “‘सबसे ऊपर’ तक पहुंच है पॉल बाबा की, मंतरी-संतरी की क्या बिसात?

  1. is hisaab se nirmal baba “secular” thug hua aur ye Paul baba “communal” thug kyonki ye ghado se sirf paise nahi aiththa balki unko dharmantaran ki topi bhi pehnata hai;) Media Darbaar ko Paul baba ka asli chera prakashit karne ke liye badhai.

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