इस बार क्यों खामोश है मीडिया जूही प्रसाद के असली हत्यारे के सवाल पर?

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पुणे के बहुचर्चित जूही प्रसाद हत्याकांड में मंगेतर निमेश सिन्हा और उसकी पूर्व प्रेमिका अनुश्री कुंद्रा इस मामले को कानून की पेचीदगियों में उलझा कर पाक-साफ बचने की तैयारी में हैं। अदालत ने जूही के पिता ए.एन.प्रसाद की उस दलील को तो मान लिया है जिसमें निमेश को भी हत्या का आरोपी माना गया है, लेकिन अब अनुश्री उसे बचाने में जुटी है। हैरानी की बात ये है कि इस बार पुलिस के साथ-साथ मीडिया भी चुप्पी साधे हुए है।

ग़ौरतलब है कि भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी की रिश्तेदार और पटना निवासी 26 साल की वकील जूही प्रसाद को 13 अक्टूबर को पुणे में एक फ्लैट में जलाकर मार दिया गया था। मामले की आरोपी अनुश्री 13 अक्टूबर से ही फरार थीं और दिल्ली हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत भी ले आई थी। जब जूही के पिता ने निमेश पर आरोप लगाया कि यह सब उसी का करा-धराया है और उसी ने अनुश्री को भी गायब कर दिया है तो अनुश्री कुंद्रा ने आखिरकार एक महीने बाद पुणे न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।

जैसा कि जूही ने मृत्यु पूर्व दिए गए बयान में भी कहा था, अनुश्री को अपने प्रेमी निमेश सिन्हा के बारे में जब यह पता चला कि वह किसी और से शादी करनेवाला है तो वह पुणे आ गई। रातभर वो उनके साथ उनके घर में ही रही और रात को जब उसका प्रेमी और उसकी होनीवाली बीवी जूही सो रहे थे, तब उन पर पेट्रोल डाल दिया और जिंदा जला दिया।

जूही के पिता अभय नन्दन प्रसाद ने निमेश को दोषी ठहराते हुए बताया कि अगर वो दोषी नहीं था तो उस पर आग का सिर्फ 10 प्रतिशत असर ही क्यों हुआ? उन्होंने मौके के समय की तस्वीरों का हवाला देते हुए ये भी कहा कि अगर निमेश जूही को आग से बचा रहा था (जैसा कि निमेश ने पुलिस को दिए बयान में कहा था) तो उसके हाथ साफ कैसे बच गए। ग़ौरतलब है कि निमेश के हाथों में जलने का कोई निशान तक नहीं है।

उधर समर्पण करते वक्त अनुश्री ने न्यायालय एक अर्जी दी थी, जिसमें कहा था कि वह खुद ही इस घटना की पीड़ित है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को है और जूही के पिता को भय सता रहा है कि दोनों आरोपी पुलिस और मीडिया की चुप्पी के सहारे आसानी से छूट जाएंगे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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7 thoughts on “इस बार क्यों खामोश है मीडिया जूही प्रसाद के असली हत्यारे के सवाल पर?

  1. I Request to Indian Government to pls do something about this matter, Pls help Prasad’s family..
    A father lost his daughter, he lost एवेर्य्थिं Pls help these poor people…
    Give a tough punishment to the culprits अनुश्री कुंद्रा एंड निमेश सिन्हा..
    For this whole इंडियन सिटिज़न्स were thankful to u all..
    Pls help them……….

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