अधर में लटका CNEB का भविष्य, ढाई सौ मीडियाकर्मी हो सकते हैं बेरोजगार

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खबरिया चैनलों के मीडियाकर्मियों के लिए एक बुरी खबर है। पहले से ही मंदी की मार झेल रही इस इंडस्ट्री में बेरोज़गारों की फौज़ बढ़ने वाली है। कंप्लीट न्यूज़ एंटरटेनमेंट ब्रॉडकास्ट यानि सीएनईबी के मालिकों ने अचानक ये फैसला किया है कि चैनल को न्यूज़ चैनल से हटाकर जेनरल इंटरटेनमेंट कैटेगरी यानि जीईसी में डाल दिया जाएगा। इसका मतलब ये निकला कि इस चैनल पर न खबरें प्रसारित होंगी और न समाचार आधारित कार्यक्रम। इस फैसले का असर सीधे सैकड़ों चैनल कर्मियों पर होगा।

एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर रजनीश कुमार ने मीडिया दरबार को बताया कि यह सूचना आधिकारिक तौर पर चस्पा कर दी गई है कि अब सीएनईबी अपना स्वरूप बदल रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट तौर पर नौकरी के लिए दिए गए अल्टीमेटम से इंकार किया, लेकिन इतना जरूर माना कि अब मौज़ूदा टीम में से अधिकतर लोगों की जरूरत नहीं रह जाएगी। फिलहाल सीएनईबी में करीब ढाई सौ लोग कार्यरत हं जिनमें से करीब एक सौ लोग न्यूज़रुम यानि संपादकीय से जुड़े हैं।

अचानक आई इस ख़बर से सभी मीडियाकर्मी हैरान-परेशान हैं। ज्यादातर लोगों का मानना है कि मीडियाकर्मियों को अगले महीने से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा, क्योंकि मनोरंजन चैनल में अधिकतर काम आउटसोर्सिंग के जरिए ही होता है। वैसे भी यह चर्चा तेज है कि जो मालिकान पूरा सेटअप लगे हुए न्यूज़ चैनल को चलाने का खर्चा तक नहीं उठा पा रहे, वो इंटरटेनमेंट चैनल का अपेक्षाकृत कई गुना अधिक खर्च कैसे उठा पाएंगे।

उधर बाजार के सूत्रों का मानना है कि प्रबंधन इस चैनल को बंद करने के मूड में है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि प्रबंधन संभवतः चैनल से न्यूज कंटेंट हटाकर इसे पूरी तरह गुरुद्वारे से लाइव प्रसारण वाला चैनल बना देगा। ग़ौरतलब है कि इस चैनल पर फिलहाल सुबह व शाम गुरुवाणी का गुरुद्वारे से लाइव प्रसारण होता है।

सीएनईबी न्यूज चैनल अपने शुरुआत से ही विवादित रहा है। कहने को तो कई बड़े-छोटे नाम इस चैनल से जुड़े, लेकिन कोई भी यहां लंबी पारी नहीं खेल पाया। जो भी आया, उसने कम से कम एक-दो नए प्रयोगों को अमलीजामा पहनाया, लेकिन जब तक वो पूरा हो पाता, उसे चलता कर दिया गया।

इस चैनल में जब हर कोई नाकाम रहा तो चिटफंडिये मालिक के बेटे अमनदीप सरान ने खुद मोर्चा संभाल कर काम शुरु कर दिया, लेकिन साल भर में उन्हें भी समझ में आ गया कि डूबे हुए नाव को बाहर निकालना आसान काम नहीं है। अभी इस ताज़ा सूनामी के तात्कालिक कारणों का पता तो नहीं चल पाया है, लेकिन इतना जरूर है कि इसमें सैकड़ों घर तबाह हो जाएंगे।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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