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निर्मल बाबा ने फिर बदली टीआरपी, विरोधियों को फायदा समर्थकों को नुकसान: नंo-1 पर India TV

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निर्मल बाबा पिछले पंद्रह दिनों से खबरिया चैनलों की टीआरपी में उठा-पटक जारी रखे हुए हैं। पिछले कई सप्ताह से नंबर वन की कुर्सी से दूर रहने वाले इंडिया टीवी को दर्शकों ने फिर आसमान पर पहुंचा दिया। एक हफ्ते में 4.7 अंको की उछाल के साथ इंडिया टीवी नंबर वन पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि इंडिया टीवी को ये ताज़ा बढ़त बाबा के पोल-खोल की वजह से मिली है, लेकिन चैनल के कर्ता-धर्ता इसे रुटीन बता रहे हैं।निर्मल बाबा पिछले पंद्रह दिनों से खबरिया चैनलों की टीआरपी में उठा-पटक जारी रखे हुए हैं। पिछले कई सप्ताह से नंबर वन की कुर्सी से दूर रहने वाले इंडिया टीवी को दर्शकों ने फिर आसमान पर पहुंचा दिया।

इंडिया टीवी के न्यूज़ डायरेक्टर हेमंत शर्मा ने मीडिया दरबार से बातचीत में यह माना कि निर्मल बाबा के पोल-खोल को लोकप्रियता मिल रही है, लेकिन नंबर वन पर आने के लिए इसे आधार नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया टीवी पिछले साल ही नंबर वन पर पहुंच गया था और तब से महीनों इस पोज़ीशन पर जमा रहा था। उस समय तो बाबा का कोई कार्यक्रम नहीं चलता था।

उधर निर्मल बाबा के खिलाफ सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले आजतक को दर्शकों ने दूसरे पायदान पर पहुंचा दिया है। उसे करीब दो अंकों का नुक़सान पहुंचा है। ग़ौरतलब है कि इंडिया टीवी ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बाबा के कारनामों की पोल-पट्टी खोली थी। ज़ी न्‍यूज़ को भी बाबा विरोध की किरपा मिली और उसने न्‍यूज़-24 को झटका देकर पांचवें पायदान पर पहुंचा दिया है। ज़ी न्यूज़ 1.2 अंकों की बढ़त के साथ 9.7 की टीआरपी हासिल करने में कामयाब रहा है।

इस बार न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस ने एक बार फिर अच्‍छी बढ़त के साथ एक बार फिर टॉप टेन में वापसी कर ली है। ग़ौरतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में न्यूज़ एक्सप्रेस ही पहला ऐसा चैनल है जिसने निर्मल बाबा का विज्ञापन चलाने से मना कर दिया था और पोल-खोल की शुरुआत की थी। निर्मल बाबा के पक्ष में खबर दिखाने वाले पी7 को दर्शकों ने नकार दिया है और न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस दसवें पायदान पर पहुंच गया है। मात्र नौ महीनों में ही टॉप टेन चैनलों में शुमार होना न्यूज़ एक्सप्रेस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस ने साबित कर दिया है कि अच्‍छा कंटेंट दिखाकर भी टीआरपी पाई जा सकती है।

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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4 thoughts on “निर्मल बाबा ने फिर बदली टीआरपी, विरोधियों को फायदा समर्थकों को नुकसान: नंo-1 पर India TV

  1. दरबारी जी,
    बाबा के खिलाफ अभियान का भी असर हो सकता हैं लेकिन न्यूज एक्सप्रेस को तो लोग पहले भी अच्छा ही चैनल मानते थे.कम समय में इसने अच्छी जगह बनाई हैं.इंडिया टीवी अब सुधर रहा हैं वर्ना पहले तो मैं इसे न्यूज़ चैनल ही नहीं मानता था ये अलग बात हैं कि अब पी7 न्यूज पुराना इंडिया टीवी ही बनता जा रहा हैं.

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